कैलाश अस्पताल केन्द्रीय मंत्री महेश शर्मा का है। खबर के मुताबिक, खुर्जा के रहने वाले अभिषेक का कहना है कि वो अपनी पत्नी एकता की डिलीवरी के लिए कैलाश अस्पताल ले गया था। अस्पताल वालों ने उससे 10,000 रुपए जमा कराने के लिए कहा था। जब वो पैसे लेकर काउंटर पर पहुंचा तो अस्पताल वालों ने 1000 के नोट देखकर पैसे लेने से मना कर दिया।
इस पर अभिषेक अस्पताल वालों से मिन्नतें करने लगा कि वो बाद में बदल कर ला देगा फिलहाल इसे जमा कर लिया जाए। लेकिन अस्पताल ने एक नहीं सुनी और पत्नी की डिलीवरी में देरी की वजह से उसकी बच्ची की मौत हो गई।
मृदुभाषी डॉ शर्मा
वैसे जहाँ तक डॉ शर्मा के व्यक्तिगत स्वभाव की बात है, बहुत ही मृदु भाषी एवं मिलनसार व्यक्ति हैं। वह भी पुरानी दिल्ली के हैं। लगभग एक दशक से अधिक समय पूर्व उनके कैलाश हॉस्पिटल, नोएडा, में उनसे सरसरी मुलाकात हुई थी, हर रविवार को हॉस्पिटल में दाखिल समस्त मरीजो से मिलते हैं। केवल तभी उनसे कुछ ही पल बातचीत हुई थी, उस समय वह केवल हॉस्पिटल के स्वामी थे। वास्तव में, उस समय मेरे बहनोई डॉ के.बी. निगम, कृषि वैज्ञानिक, किडनी ट्रांसप्लांट के लिये भर्ती थे। जितनी बार उस दौरान हॉस्पिटल गया, किसी भी कर्मचारी--गार्ड से लेकर उच्च अधिकारी -- को किसी से दुर्व्यवहार करते नहीं देखा। चाहे वित्तीय स्थिति से ही क्यों न सम्बंधित हो। बल्कि एक बार तो हॉस्पिटल से छुट्टी मिलते कुछ 2000 रुपये और जमा करने थे, उच्च अधिकारी से सम्पर्क कर, डॉ निगम ने घर आकर एम्बुलेंस चालक को दिए। डॉ शर्मा के स्वभाव को देखते हुए, उम्मीद है इस दुःखद घटना का संज्ञान लिया होगा। जिस हॉस्पिटल का स्वामी इतना मिलनसार हो, उसके हॉस्पिटल में ऐसी घटना का होना क्या कोई षड्यंत्र तो नहीं? यह भी संभव हो सकता है कि सरकार के इस कदम को कलंकित करने के उद्देश्य से विरोधियों द्धारा इस तरह की हरकत की हो ? आज कुछ भी संभव है।
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