ग़ौरतलब है कि पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल खुदकुशी मामले पर दिल्ली में सियासी संग्राम जारी है। कहा जा रहा है कि वन रैंक वन पेशन की मांग को लेकर रामकिशन ग्रेवाल की ने जंतर मंतर पर बुधवार को खुदकुशी कर ली थी। यहाँ ये भी बता दें कि केवल कुछ दिन पहले ही राहुल गांधी ने OROP का मुद्दा एक बार फिर से उठाया था और उनके काफ़ी दिन बाद अचानक ये मुद्दा उठाने के तुरंत बाद ये आत्महत्या अपने आप में काफ़ी सवाल पैदा करती है ? क्या ये उत्तर प्रदेश चुनावों को देखते हुए कोंग्रेस और PK की सोची समझती रणनीति है ।
एक बड़ी बात और है जो जो सामने आ रही है । अपुष्ट सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक पूर्व सैनिक किशन ग्रेवाल की बैंक की ओर से कैल्कुलेशन में समस्या होने कारण उन्हें संशोधित पेंशन मिलने में देरी हो रही थी ना कि उन्हें OROP की कोई समस्या था ।
तीसरी बात ये कि अभी तक ये स्पष्ट नहीं हुआ है कि किशन ग्रेवाल ने कोई पेंशन OROP के तहत ली थी या उसको लेने के वो हक़दार थे क्यूँकि OROP के लिए प्रोटेस्ट करने वालों ने जंतर मंत्र पर एंटरटेन नहीं किया था। मिली जानकारी के अनुसार स्वर्गीय ग्रेवाल ने ६ साल ११ दिन सेना के लिए काम किया था और उनको जंतर मंतर पर घुसने भी नहीं दिया जगया था क्यूँकि ये बताया गया कि वे OROP लेने के लिए निम्नतम योग्यता पूरी नहीं करते थे।
लेकिन फिर भी मोदी सरकार के ख़िलाफ़ विपक्ष एक बड़ा अभियान चलाने की कोशिस करेगा , हमें ऐसा भी लगता है जैसे आम आदमी पार्टी की रैली में गजेंद्र सिंह की बलि चढ़ायी गयी थी। वैसे ही कहीं किसी के द्वारा प्लानिंग के तहत चुनावी लाभ कमाने के लिए राम किशन ग्रेवाल के साथ तो नहीं हुआ ?
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