दुनिया में शायद ही ऐसा कोई इंसान हो जो फ़िल्में देखता हो और जेम्स बॉन्ड को न जानता हो. हम सभी अपनी ज़िंदगी के किसी न किसी दौर में जेम्स बॉन्ड से ज़रूर प्रेरित थे और उसी की तरह बनना भी चाहते थे. दुनिया की सबसे तेज़ कारें, लेटेस्ट मॉडल के गैजेट्स, महंगे सूट और ख़ूबसूरत नवयुवतियां उस किरदार की चमक में इज़ाफा करती थीं, और रही-सही कसर उसका देश के नाम पर कुर्बान हो जाने की प्रतिब्द्धता पूरा कर देती थी. आख़िर हम लोगों में से ऐसे कितने ही हैं जो जेम्स बॉन्ड को पर्दे पर देख कर देश के लिए कुछ कर गुज़रना चाहते थे.
वास्तविक दुनिया में और ख़ास तौर पर भारत में यदि आप ऐसे ही किसी किरदार की तलाश करें तो आपकी तलाश अजीत कुमार डोवाल पर आकर ठहर सकती है. अजीत जो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं. अजीत के बराबर की ऊंचाईयों पर पहुंचना कोई हंसी-ठिठोली नहीं है. हमारे अपने जेम्स बॉन्ड से जुड़ी 11 ऐसी कही-अनकही बातें जो अजीत डोवाल को ख़ासमख़ास बनाती हैं। जिसे कांग्रेस ने बनाया और मोदी ने इस्तेमाल किया। अपने पाकिस्तान प्रेम एवं वोट-बैंक और मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण कांग्रेस डोवाल के अनुभव को नज़रअंदाज़ करती रही। यदि कांगेस और इसके समर्थकों ने डोवाल का उचित प्रयोग किया होता, पाकिस्तान को न जाने कब का उसकी हैसियत से अवगत करा दिया होता। देश में आतंकवाद अपनी जड़ें नहीं फ़ैलाने पाता। वास्तव में कांग्रेस आतंकवाद की आड़ में अपने घोटालों और नाकामियों को छुपाती रही।
सीमा के इस पार तो लोग सुरक्षित नहीं हैं, और सीमा पार रह कर देश के लिए अहम जानकारियां मुहैय्या कराना कोई बच्चों का खेल नहीं है.
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2. पाकिस्तान में अंडरकवर एजेंट की भूमिका के बाद वे इस्लामाबाद में स्थित भारतीय हाई कमीशन के लिए 6 वर्षों तक काम करते रहे.
अब भी आप कुछ कहना चाहते हैं क्या?
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3. क्या आपको कांधार में IC-814 का अपहरण याद है? इस पूरे प्रकरण में अपहृत लोगों को सुरक्षित वापस बुलाने में उनकी अहम भूमिका थी.
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4. सन् 1971 से 1999 के बीच वे 15 ऐसे अपहरण के मामले सुलझा चुके हैं.
5. सन् 1986 में वे मिज़ोरम में फील्ड एजेंट की भूमिका में थे. वहां उन्होंने मिज़ो नेशनल फ्रंट बना कर भारत सरकार के खिलाफ़ हथियार उठा चुके लड़ाकों को समझा-बुझा कर और बलपूर्वक हथियार छोड़ने हेतु मना लिया. उन्होंने मिज़ो लड़ाकों को शांति मार्ग पर चलने हेतु प्रेरित किया.
इस पूरे प्रकरण और भारतीय राज्य मशीनरी के घुसपैठ से मिज़ो लड़ाकों का मनोबल टूट गया, और इस प्रकार 20 सालों से चली आ रही अंतर्कलह व विरोध का अंत हो गया.
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6. सन् 80 के दशकों में वे बतौर पाकिस्तानी एजेंट गोल्डन टेंपल में दाखिल हुए थे और खालिस्तान के लिए लड़ रहे लड़ाकों से अहम जानकारियां बाहर ले आए थे.
कहा जाता है कि वे एक रिक्शा चालक के वेश में वहां दाखिल हुए थे. ऑपरेशन ब्लैक थंडर ने विद्रोहियों को आत्मसमर्पण पर मजबूर कर दिया था.
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7. उन्होंने कश्मीर के विरोधी कूका परे और उसके साथी लड़ाकों को प्रतिवादी ताकत बनने के लिए मना लिया.
इसकी वजह से जम्मू कश्मीर में 1996 से चुनाव हो रहे हैं.
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8. वे सबसे कम उम्र के पुलिस अफ़सर हैं जिन्हें विशेष सेवा के लिए पुलिस मेडल मिला था.
उन्हें इस तमगे को हासिल करने में सिर्फ़ 6 साल लगे.
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9. सन् 2014 के जून माह में इस्लामिक स्टेट द्वारा बंधक बनाई गयी 46 भारतीय नर्सों को वे सबके चंगुल से सुरक्षित वापस ले आए.
यह मामला इराक़ के टिकरित का है.
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10. अजीत न सिर्फ़ एक बेहतरीन खूफ़िया जासूस हैं बल्कि एक बढ़िया रणनीतिकार भी हैं. वे कश्मीरी अलगाववादियों जैसे यासिन मलिक, शब्बीर शाह के बीच भी उतने ही पॉपुलर हैं जितना भारत के आला अफ़सरों के बीच.
गर उन्हें एक बेहतरीन मनोवैज्ञानिक कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी.
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11. देश में शांति के दौरान दिये जाने वाले प्रशस्ति तमगे, कीर्ति चक्र से भी उन्हें नवाज़ा जा चुका है.
इसमें ऑपरेशन ब्लैक थंडर की बहुत ही अहम भूमिका रही है.
चाणक्य जैसा दिमाग और बाजीराव जैसा हौंसला। असली जिंदगी का जेम्स वान्ड IPS श्री अजित कुमार डोभाल जो भारत के 6 साल पाकिस्तान में जासूस रहे. . .
भारत के बदलते और खूंखार होते रुख के पीछे का मास्टरमाइन्ड . . .
इनके बारे में कुछ ख़ास बातें :
* 1945 में एक गढ़वाली ब्राह्मण परिवार में जन्म। पिता आर्मी में ब्रिगेडियर थे। दादा प्रथम विश्व युद्ध में लड़े ।
* 1968 में IPS का एग्जाम टॉप किया। केरल batch के IPS officer बने ।
* 17 साल की duty के बाद ही मिलने वाला medal 6 साल की duty के ही बाद मिला ।
* पाकिस्तान में जासूस के तौर पर तैनाती। पाकिस्तान की आर्मी में मार्शल की पोस्ट तक पहुंचे और 6 साल भारत के लिए जासूसी करते रहे ।
* 1987 में खालिस्तानी आतंकवाद के समय पाकिस्तानी agent बनकर दरबार साहिब के अंदर पहुंचे। 3 दिन आतंकवादियों के साथ रहे। आतंकवादियों की सारी information लेकर operation black thunder को सफलता पूर्वक अंजाम दिया ।
* 1988 में कीर्ति चक्र मिला। देश का एक मात्र non army person जिसे यह award मिला है ।
*असम गए। वहां उल्फा आतंकवाद को कुचला ।
* 1999 में plane hijacking के समय आतंकवादियों से dealing की l
* RSS के करीबी होने के कारण मोदी ने सत्ता में आते ही NSA (National Security Advisor) बनाया l
* बलोचिस्तान में raw फिर से active की। बलोचिस्तान का मुद्दा international बनाया ।
* केरल की 45 ईसाई नर्सों का iraq में isis ने किडनैप किया। डोभाल खुद इराक गए। isis से पहली बार hostages ज़िंदा बिना बलात्कार हुए (महिला) वापिस लौटे
* राष्ट्रपति अवार्ड मिला ।
* 2015 मई में भारत के पहले सर्जिकल आपरेशन को अंजाम दिया। भारत की सेना म्यांमार में 5 किमी तक घुसी । 50 आतंकवादी मारे ।
* नागालैंड के आतंकवादियों से भारत की इतिहासिक deal करवाई। आतंकवादी संगठनों ने हथियार डाले।
* भारत की defence policy को agressive बनाया। भारत की सीमा में घुस रहा पाकिस्तानी ship बिना किसी warning के उड़ाया। कहा बिरयानी खिलाने वाला काम नही कर सकता।
* कश्मीर में सेना को खुली छूट दी। pallet gun सेना को दिलवाईं। पाकिस्तान को दुनिया के मुस्लिम देशों से ही तोड़ दिया।
* 2016 september आज़ाद भारत के इतिहास का 1971 के बाद सबसे इतिहासिक दिन। डोभाल के बुने गए surgical operation को सेना ने दिया अंजाम। PoK में 3 किलोमीटर घुसे। 40 आतंकी और 9 पाकिस्तानी फौजी मारे। दोनों surgical strikes में zero casuality
*Right Wing Hindu संगठन vivekanand youth forum की स्थापना की।
*Right Wing Hindu संगठन vivekanand youth forum की स्थापना की।
एक वो बाजीराव था जो कहा करता था मैं दिल्ली जीत सकता हूँ। मैं दिल्ली पर भगवा लहरा सकता हूँ।और उसने वो कर दिया जो शिवाजी ना कर सके। दिल्ली से मुगलों का नाश । एक यह डोभाल है जो कहता है की मैं इस्लामाबाद जीत सकता हूँ। सरकारें हौंसला दिखाएँ। डोभाल बहुत कुछ कर सकते हैं।
अब तो आप समझ ही गए होंगे कि हम जेम्स बॉन्ड के बजाय अजीत डोवाल पर क्यों फिदा रहते हैं. और हमारे देश को ऐसे कितने ही अजीत डोवाल की ज़रूरत हैं.
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