| संजय निरुपम एक मिलनसार व्यक्ति |
सेना द्वारा LOC पार आतंकी ठिकानों पर की गई सर्जिकल स्ट्राइक को फर्जी करार देने को लेकर विवादों में आये कांग्रेस नेता संजय निरुपम को अब धमकी भरे कॉल आ रहे हैं. संजय निरुपम ने शुक्रवार(7 अक्टूबर, 2016 ) को दावा किया कि कथित गैंगस्टर रवि पुजारी ने उन्हें फोन कर धमकी दी और सर्जिकल स्ट्राइक पर अपनी टिप्पणी के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहा.
संजय निरुपम का कहना है कि रवि पुजारी ने बुधवार, 5 अक्तूबर को सुबह करीब सवा ग्यारह बजे उनके आवास के लैंडलाइन पर एक विदेशी नंबर से फोन किया था और उन्होंने इसकी शिकायत वर्सोवा पुलिस थाने में दर्ज करवाई है. निरुपम का कहना है कि उन्हें फोन कर कहा गया है कि अगर सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर की गई टिप्पणी को लेकर उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी तो उनके और उनके परिवारों के सदस्यों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे.
सर्जिकल स्ट्राइक पर बयान के बाद डॉन रवि पुजारी की धमकी के अलावा संजय निरुपम को सोशल मीडिया पर भी निशाना बनाया जा रहा है. सोशल मीडिया पर संजय निरुपम की जमकर आलोचना की जा रही है और उनपर सेना पर संदेह करने व पाकिस्तान की आवाज बनने के आरोप लग रहे है.
| सर्जिकल स्ट्राइक पर सर्वप्रथम संदेह करने वाले अरविन्द केजरीवाल |
ये सब देखते हुए अब संजय निरुपम की पत्नी गीता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर अपने परिवार की सुरक्षा की मांग की है। गीता का कहना है कि वे भारत में ‘काफी असुरक्षित’ महसूस कर रही हैं. पीएम को लिखे पत्र में गीता ने दावा किया ‘उन्हें न केवल सोशल मीडिया पर बल्कि फोन कर काफी गंदे तरीके से खुलेआम गाली दी जा रही है.’
गीता ने लिखा, ‘हां, मेरे पति ने कहा कि राजनीतिक विषयों पर आसानी से चर्चा हो सकती थी. वे राजनीति और देश की बात कर रहे थे न कि अपनी निजी जिंदगी और परिवार की तो फिर संस्कृति और परिवार प्रधान इस देश में जहां देवी की पूजा होती है, वहां 80 वर्षीय उनकी मां को राजनीति में क्यों घसीटा जा रहा है और सोशल मीडिया पर काफी गंदे तरीके से उन्हें गाली क्यों दी जा रही है.’| मीम अफ़ज़ल |
| सीमा उलंघन करते राहुल गाँधी |
पाकिस्तान के मंसूबों को पूरा करते धमकी देने वाले
जहाँ तक संजय को धमकी की बात है, इसमें संजय अकेले दोषी नहीं। इस स्ट्राइक पर सर्वप्रथम सन्देह किया दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने। उन्हें क्यों नहीं दी धमकी? ठीक है संजय ने बहुत ही गलत बयान दिया, जबकि उनकी पृष्टभूमि ही आरआरएस की है। हालाँकि मैंने अपने एक लेख http://nigamrajendra28.blogspot.in/2016/10/blog-post_7.html
स्पष्ट रूप से लिखा है कि पाकिस्तान के आँसू पोंछ भारतीय सेना पर सन्देह करने वालों पर उसी तर्ज़ पर कार्यवाही हो जिस तरह तत्कालीन प्रधानमन्त्री लाल बहादुर शास्त्री ने की थी। अनेकों उनके ऐसे कठोर निर्णय थे, जिन्हें किसी भी हाल में सार्वजनिक नही किया जा सकता। 1965 की इंडो-पाक लड़ाई में भारत की आन,बान एवं शान में गुस्ताखी करने वालों को नहीं बक्शा। चाहे वह देश में जितने भी सम्मानित पद पर विराजमान क्यों न हो। शास्त्रीजी कठोरतम निर्णय लेने में सक्षम थे, उनकी सरकार होने के अलावा विपक्ष में इतना बल भी नहीं था, फिर जब मुद्दा राष्ट्र का हो, कोई आगे नहीं आने का साहस करता।
सरकार सो नहीं रही
इस समय हर भारतीय को बहुत ही सोंच-समझ कर कदम उठाने की जरुरत है। इस तरह के बयान देने वालों या बयान पर अपनी टीआरपी बढ़ाने के चक्कर में जो चौपालें जमाई जा रही हैं हैं, मेरी दृष्टि से वह भी गलत है। इन मुद्दों को केवल समाचारों तक ही सीमित रखा जाये तो बेहतर है। क्योंकि विरोधी कुछ का कुछ बोल रहे हैं और विदेशों में हमारा मजाक बन रहा है। परिचर्चा देश को सतर्क रखने वाले मुद्दों पर होनी चाहिए। जैसे '65 के युद्ध में दौरान गैर-फ़िल्मी राष्ट्रीय गीत, "कहनी है एक बात हमें इस देश के पहरेदारों से, संभल के रहना अपने घर में छुपे हुए गद्दारों से ...." आदि गीतों से जनता में राष्ट्रभक्ति को जागृत करना, रेडियो पर "ढोल की पोल" और "रेडियो झूठीस्तान" आदि कार्यक्रम प्रसारित होते थे। "रेडियो झूठीस्तान" में पाकिस्तान के झूठ को समाचार शैली में प्रसारित किया जाता था। भारत को राष्ट्रभक्ति के जोश में होश को अधिक शक्तिशाली बनाकर रखना है।

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