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धमकी देने वाले पाकिस्तान के हाथ मजबूत कर भारत को कमजोर न करें

Sanjay Nirupam
संजय निरुपम एक मिलनसार व्यक्ति 
पीओके में सेना के सर्जिकल स्ट्राइक पर उठाए गए सवाल के बाद से मुंबई कांग्रेस के प्रमुख संजय निरूपम का सोशल मीडिया पर माखौल उड़ाया जा रहा है. जिसके कारण उनकी पत्नी ने परेशान होकर पीएम मोदी से अपने परिवार की सुरक्षा की अपील की है. उनकी पत्नी का कहना है कि वह भारत में काफी असुरक्षित महसूस कर रही हैं.
       
सेना द्वारा LOC पार आतंकी ठिकानों पर की गई सर्जिकल स्ट्राइक को फर्जी करार देने को लेकर विवादों में आये कांग्रेस नेता संजय निरुपम को अब धमकी भरे कॉल आ रहे हैं. संजय निरुपम ने शुक्रवार(7 अक्टूबर, 2016 ) को दावा किया कि कथित गैंगस्टर रवि पुजारी ने उन्हें फोन कर धमकी दी और सर्जिकल स्ट्राइक पर अपनी टिप्पणी के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहा.
संजय निरुपम का कहना है कि रवि पुजारी ने बुधवार, 5 अक्तूबर को सुबह करीब सवा ग्यारह बजे उनके आवास के लैंडलाइन पर एक विदेशी नंबर से फोन किया था और उन्होंने इसकी शिकायत वर्सोवा पुलिस थाने में दर्ज करवाई है. निरुपम का कहना है कि उन्हें फोन कर कहा गया है कि अगर सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर की गई टिप्पणी को लेकर उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी तो उनके और उनके परिवारों के सदस्यों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे.
सर्जिकल स्ट्राइक पर बयान के बाद डॉन रवि पुजारी की धमकी के अलावा संजय निरुपम को सोशल मीडिया पर भी निशाना बनाया जा रहा है. सोशल मीडिया पर संजय निरुपम की जमकर आलोचना की जा रही है और उनपर सेना पर संदेह करने व पाकिस्तान की आवाज बनने के आरोप लग रहे है.
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सर्जिकल स्ट्राइक पर सर्वप्रथम संदेह करने वाले अरविन्द केजरीवाल 
ये सब देखते हुए अब संजय निरुपम की पत्नी गीता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर अपने परिवार की सुरक्षा की मांग की है। गीता का कहना है कि वे भारत में ‘काफी असुरक्षित’ महसूस कर रही हैं. पीएम को लिखे पत्र में गीता ने दावा किया ‘उन्हें न केवल सोशल मीडिया पर बल्कि फोन कर काफी गंदे तरीके से खुलेआम गाली दी जा रही है.’
गीता ने लिखा, ‘हां, मेरे पति ने कहा कि राजनीतिक विषयों पर आसानी से चर्चा हो सकती थी. वे राजनीति और देश की बात कर रहे थे न कि अपनी निजी जिंदगी और परिवार की तो फिर संस्कृति और परिवार प्रधान इस देश में जहां देवी की पूजा होती है, वहां 80 वर्षीय उनकी मां को राजनीति में क्यों घसीटा जा रहा है और सोशल मीडिया पर काफी गंदे तरीके से उन्हें गाली क्यों दी जा रही है.’
पाञ्चजन्य से पत्रकारिता 
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मीम अफ़ज़ल 
संजय निरुपम जो वास्तव में संघ परिवार से हैं, इन्होंने पाञ्चजन्य साप्ताहिक से अपनी पत्रकारिता प्रारम्भ की। उस समय साप्ताहिक के सम्पादक भानु प्रताप शुक्ल होते थे। इसमें कोई दो राय नहीं, निजी जीवन में बहुत ही मृदुभाषी हैं। पाञ्चजन्य छोड़ने के कई वर्षो उपरान्त मिलने पर लेशमात्र भी समय के अंतराल का आभास नहीं होने दिया। उनके इसी व्यवहार के कारण इतना सबकुछ बोलने उपरान्त भी संजय के विरुद्ध एक भी शब्द लिखने का साहस नहीं जुटा पाया। इसी तरह कॉलेज के सहपाठी है मीम अफ़ज़ल। इनसे भी दो बार भेंट हो चुकी है। अब पार्टी का जो निर्देश होगा, उसका पालन तो होगा ही। 
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सीमा उलंघन करते राहुल गाँधी 
यह ठीक है कि पार्टी अध्यक्षा सोनिया गाँधी ने कोई टिप्पणी नहीं की, परन्तु इन्हें मोहरा बनवा दिया। और उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने बयान देकर सीमाओं का उलंघन जरूर किया, लेकिन यह स्पष्ट कर दिया कि कांग्रेस का जो भी नेता सर्जिकल स्ट्राइक पर बोल रहा है, किसी का निजी बयान नहीं, बल्कि पार्टी लाइन है। अन्यथा बचाओ में आने की बजाय पार्टी से निकाल दिया होता। यह सब बवंडर सिर खड़े चुनाव हैं। मोदी सरकार के इस कदम से उत्तर प्रदेश, पंजाब और फिर गोवा में होने वाले चुनाव में सबको अपनी हार स्पष्ट रूप से दिख रही है, जिस कारण जनता से इस मुद्दे को दूर करने, या यूँ कहा जाए भुलाने का एक असफल प्रयास किया जा रहा है। जनता को जितना भ्रमित करने के लिए जो बयानबाज़ी हो रही, उतनी ही जनता में राष्ट्रभावना प्रबल हो रही है। 
 पाकिस्तान के मंसूबों को पूरा करते धमकी देने वाले
जहाँ तक  संजय को धमकी की बात है, इसमें संजय अकेले दोषी नहीं। इस स्ट्राइक पर सर्वप्रथम सन्देह किया दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने। उन्हें क्यों नहीं दी धमकी? ठीक है संजय ने बहुत ही गलत बयान दिया, जबकि उनकी पृष्टभूमि ही आरआरएस की है। हालाँकि मैंने अपने एक लेख http://nigamrajendra28.blogspot.in/2016/10/blog-post_7.html


सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर पक्ष और विपक्ष में जमकर राजनीति हो रही है। एक तरफ जहां केजरीवाल और चितंबरम के खिलाफ याचिका दायर की गई है तो वही द...
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स्पष्ट रूप से लिखा है कि पाकिस्तान के आँसू पोंछ भारतीय सेना पर सन्देह करने वालों पर उसी तर्ज़ पर कार्यवाही हो जिस तरह तत्कालीन प्रधानमन्त्री लाल बहादुर शास्त्री ने की थी। अनेकों उनके ऐसे कठोर निर्णय थे, जिन्हें किसी भी हाल में सार्वजनिक नही किया जा सकता। 1965 की इंडो-पाक लड़ाई में भारत की आन,बान एवं शान में गुस्ताखी करने वालों को नहीं बक्शा। चाहे वह देश में जितने भी सम्मानित पद पर विराजमान क्यों न हो। शास्त्रीजी कठोरतम निर्णय लेने में सक्षम थे, उनकी सरकार होने के अलावा विपक्ष में इतना बल भी नहीं था, फिर जब मुद्दा राष्ट्र का हो, कोई आगे नहीं आने का साहस करता। 
सरकार सो नहीं रही 
Image result for lal bahadur shastriयदि कोई भी भारतीय कानून को हाथ में लेने का प्रयास या सोंच रख रहा है, मोदी सरकार को कमजोर कर पाकिस्तान के हाथ मजबूत कर रहा है।  सरकार करेगी कार्यवाही। भारत में जेलों की कमी नहीं। अगर जेलें कम पड़ती हैं तो स्टेडियम भरे पड़े है। धमकी देने वाले समझ रहे हैं कि "जैसे सरकार गूंगी और बहरी है।" दोस्तों उपरोक्त लेख में स्पष्ट लिखा है "नरेंद्र मोदी और लाल बहादुर शास्त्री की कार्यशैली और सोंच में केवल दो/चार छटाँक का अंतर है। "  दोनों में अन्य प्रधानमंत्रियों से अलग एक समानता है, "समस्या की जड़ को पकड़ना, पत्तों से नहीं लड़ना।" क्योंकि पत्तों से खेलने वाले पत्तों में फंस कर रह गए, समस्या का समाधान नहीं कर पाए। इसीलिये एक हिन्दी पाक्षिक को सम्पादित करते नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर लिखा था "शास्त्री के बाद देश को मिला सख्त प्रशासक।" अगर शास्त्रीजी ने अपने 18 माह के कार्यकाल से जवाहरलाल नेहरू के 18 वर्ष को भुलवा दिया था, ठीक उसी राह पर वर्तमान प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी चल रहे हैं, ऐसी धमकियाँ देकर विचलित मत करो। ये प्रधानमंत्री शास्त्रीजी के अधूरे काम, भारत को विश्व में स्वाभिमान से जीने देने की राह पर अग्रसर है। 
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इस समय हर भारतीय को बहुत ही सोंच-समझ कर कदम उठाने की जरुरत है। इस तरह के बयान देने वालों या बयान पर अपनी टीआरपी बढ़ाने के चक्कर में जो चौपालें जमाई जा रही हैं हैं, मेरी दृष्टि से वह भी गलत है। इन मुद्दों को केवल समाचारों तक ही सीमित रखा जाये तो बेहतर है। क्योंकि विरोधी कुछ का कुछ बोल रहे हैं और विदेशों में हमारा मजाक बन रहा है। परिचर्चा देश को सतर्क रखने वाले मुद्दों पर होनी चाहिए। जैसे '65 के  युद्ध में दौरान गैर-फ़िल्मी राष्ट्रीय गीत, "कहनी है एक बात हमें इस देश के पहरेदारों से, संभल के रहना अपने घर में छुपे हुए गद्दारों से ...." आदि गीतों से जनता में राष्ट्रभक्ति को जागृत करना, रेडियो पर "ढोल की पोल" और "रेडियो झूठीस्तान" आदि कार्यक्रम प्रसारित होते थे। "रेडियो झूठीस्तान" में पाकिस्तान के झूठ को समाचार शैली में प्रसारित किया जाता था। भारत को राष्ट्रभक्ति के जोश में होश को अधिक शक्तिशाली बनाकर रखना है।  



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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)

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