इन मोहतरमा को तो सब जानते ही है, जानते भी कैसे न होगे भला, इनका काम ही है ड्रामा करके trp बटोरना l खैर फिर भी एक बार और बताते है कि ये मोहतरमा है तृप्ति देसाईl इनका सिर्फ और सिर्फ एकसूत्रीय कार्यक्रम है वो है कुछ ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करना जिनसे कि इन्हें ढंग की मीडिया कवरेज मिल जाए और ये चारित्रिक रूप से लिबरल भी कहलाती रहे l कुल मिला के अगर आप इनका आंकलन करोगे तो वही गुण इनमे उसी शुद्धता के साथ देख सकते हो जो गुण एक कांग्रेसी और वामपंथी के अन्दर कूट कूटकर भरे होते है l
अब मैडम के पास कुछ करने को था नही तो इन्होने सोचा कि क्यों न कुछ बबाल ही खड़ा किया जाए और ये निकल पड़ी शनि मंदिर पर हंगामा करने क्योकि इन्हें ये ज्ञात था कि मीडिया कवरेज तो इस मुद्दे पर मिलना तय है हीl वो इसलिए क्योकि भारत ऐसा देश है जहाँ ऐसे मुद्दे पर ताली पीटने वाले बहुत से मिल जायेगे और साथ ही मुद्दे पर “कुतर्क” भी जबर करेगे और अगर कोई साथ न आएगा तो कांग्रेस का साथ तो है ही और फिर वामपंथी लौबी का समर्थन तो मिलना तय ही है l
हाँ तो तृप्ति जी तैयार हो गयी झंडा बुलंद करके और लोगो को बताया कि अरे ये तो घनघोर अन्याय हो रहा हैl ऐसा कैसे हो रहा है, ये तो होना ही नही चाहिए था l शनि के मंदिर में क्यों नही प्रवेश कर सकती है महिलाए?इस चीज से इन्हें कोई फर्क नही पड़ता है कि देश में हजारों मंदिर ऐसे है जहाँ पर अपनी मर्जी से महिलाएं जाने या न जाने का फैसला करती है l कई मंदिर ऐसे भी हैं जिनमे पुरुषों का प्रवेश निषेध है लेकिन नही इन्हें कोई फर्क नही पड़ता है कि धार्मिक मान्यताएं क्या है और उनका क्या प्रायोजन है, इन्हें तो बस अपना उल्लू सीधा करने से मतलब है l तो साहब तैयार किया गया कार्यक्रम और कुछ एक लोग आये फिर ये संख्या बढती गयी और कुछ कांग्रेसी और वामपंथी महिलाओ को इकठ्ठा करके शुरू कर दी नौटंकी फिर मैडम की नौटंकी चलती रही और कुछ कांग्रेसी और वामपंथी महिलाओ को लेकर मैडम जमीन पर खूब लोटी ठीक उसी प्रकार से जैसे देशी बारात में नागिन डांस करते हुए देशी लौंडे लोटते है और जैसे तैसे करके येन केन प्रकारेण मैडम को मंदिर में प्रवेश मिल गया और अपने कुछ वामपंथी साथियों को लेकर मैडम कर आई “मोक्ष” की प्राप्ति अंदर जाकर l तथाकथित बुद्धिजीवी बड़े हुए और लम्बे लम्बे,भारी भारी शब्दों में बताया कि ये नई सोच की जीत है l कोई इन तथाकथित बुद्धिजीविओ को अब क्या और कैसे समझाये कि आगे क्या होगा क्योकि मूर्खो की 2 नश्ल होती है, एक तो “बददिमाग” और दूसरा “बेदिमाग” l पहली किस्म जो बददिमाग वाली होती है इन्हें आप समझा सकते है थोडा मेहनत करके लेकिन जो ये दूसरी किस्म है बेदिमाग वाली इनको समझाना माने कि भैंस के आगे बीन बजाना और ये नई सोच की जीत बताने वाले वही दूसरी नश्ल के थे lऔर मीडिया ने कवरेज दे डाला l
सोशल मीडिया माने के इन दिनों अपने आप में बहुत ही बड़ी पॉवर है l इस पॉवर ने जब तृप्ति देसाई पर पॉवर दिया कि थोडा ऐसा ही कुछ क्रांतिकारी सा मुस्लिम समाज के लिए भी कर के दिखाओ क्योकि ये जो आप लड़ाई लड़ रही है वो पुरुष और स्त्री के बीच के भेदभाव की है और फिर जब बात महिलाओ के अधिकार की ही हो रही हो तो ये तो मजहब से परे है और वैसे भी महिलाओ की स्तिथि पर गौर किया जाए तो हम पाते है कि हिन्दू समाज में महिलाओ का जीवन मुस्लिम महिलाओ के जीवन की तुलना में देखा जाए तो जन्नत है और मुस्लिम महिलाओ की हालत बहुत ही बदतर है l
अब हुआ ये कि तृप्ति देसाई आगयी जोश में और उनके अन्दर जो एक “क्रांति” वाला कीड़ा वाला कीड़ा था वो कुलबुल कुलबुल करने लगाl फिर क्या था तृप्ति ने ठान लिया कि वो किसी दरगाह में महिलाओ का प्रवेश कराकर ही दम लेंगी l तृप्ति ने कार्यक्रम बनाया हाजी अली की दरगाह में महिलाओ का प्रवेश कराने का लेकिन ये क्या हुआ, यहाँ तो मैडम की जूतम पैजार की नौबत आगयी और मैडम अपना बोरिया बिस्तर समेट नौ दो ग्यारह व हाजी अली दरगाह में फ़िलहाल कोई भी कार्यक्रम करने से मना कर दिया l
“हाजी अली सबके लिए” नामक फोरम से भी अपना समर्थन त्वरित रूप से ख़त्म कर दिया और आगे बताने की जरुरत नही क्या होगा l
कायदे वाली और कहने की बात ये है कि समाज में बहुत से सामाजिक काम है करने के लिए पुरुष और महिलाओ के समान अधिकार या फिर विकास से सम्बंधित कई काम है करने को और उनमे योगदान भी दिया जायेगा समाज द्वारा लेकिन तृप्ति जैसे लोग हिन्दू समाज की परम्पराओं और मान्यताओ को ही छिन्न भिन्न करने में अपनी खासी रूचि और दिलचस्पी दिखाते है और खुद को खामखा में ही राजा राम मोहन समझने की नादानी करने लगते है वहीँ दूसरी तरफ मुस्लिम समाज के तलाक,सरिया जैसे दकयानूसी कानून के खिलाफ जब मुह खोलने की बारी आती है तो इन्हें सांप सूंघ जाता है l ऐसा क्यों?? करो न समाज सुधार अब….जरुरत है इन्हें आप जैसे लोगो की….आप जैसे लोग ही मसीहा हो सकते हो इनके लेकिन नही आपने तो भीष्म प्रतिज्ञा कर ली है कि हिन्दुओ को ही चैन से न रहने दोगे क्योकि ये कौम दयालु और विशाल ह्रदय वाली है न l
तृप्ति मैडम, हम आपको खुला चैलेन्ज देते है आज जाओ किसी मुस्लिम बाहुल्य इलाके में और घुसके दिखाओ फिर वहां किसी दरगाह या मस्जिद में फिर आके बताना आपकी “क्रान्ति” पर कितनी सूजन आई या फिर “क्रांति” नष्ट भी हो सकती है l
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