भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान को ईंट का जवाब पत्थर से दिया है. भारतीय सेना के सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान के हालात ऐसे हैं कि लोग सड़कों पर उतर गए हैं. कभी भी सेना पूरे मुल्क पर अपना अधिकार जमा सकती है. नवाज़ शरीफ के सरकार पर विपक्ष पूरे तरीके से हावी है. इसके बावजूद नवाज़ शरीफ पाकिस्तान के मर्ज़ का इलाज ढूँढने के बजाये UN में कश्मीर राग अलाप रहे है.
पाकिस्तान में तख्ता पलटने से युद्ध की संभावनाएं प्रबल होती प्रतीत हो रही है। जब भी पाकिस्तान में फौज ने सत्ता संभाली है, भारत पर लोकतान्त्रिक तरीके से सत्ता में आयी पार्टी से कहीं अधिक हालात ख़राब ही हुए हैं।
पाकिस्तान के इतिहास में तख्ता पलट की कहानी कोई नई बात नहीं है. पाकिस्तान के हालात ऐसे हैं कि वहां कोई भी सरकार अपनी मजबूत पकड़ नहीं बना पाई है. पाकिस्तान के हालात ऐसे हैं कि ” उधर जरा सी गड़बड़ और इधर सरकार की ऐसी-तैसी.”
पहले भी हो चूका है नवाज़ का तख्ता पलट
1958
1971
1999
कुछ मुख्य बिंदु:
*68 साल में से 23 साल पाकिस्तान में सैन्य शासन रहा है.
- 1947 में बंटवारे के बाद बनी सरकार 11 साल चली.
- 1958 में जनरल अयूब खान ने सत्ता हथिया ली.
- 1960 में अयूब खान ने खुद को राष्ट्रपति घोषित किया.
- 1969 में जनरल यह्या खान ने अयूब खान को बेदखल किया.
- 1973 में जुल्फिकार अली भुट्टो प्रधानमंत्री बने.
- 1977 में जनरल जिया उल हक ने भुट्टो का तख्तापलट किया.
- 1979 में भुट्टो को फांसी पर लटका दिया गया.
- 1999 में नवाज शरीफ का परवेज मुशर्रफ ने तख्तापलट किया.
- 2008 तक पाकिस्तान पर सैन्य शासन रहा.
कैसे थे शरीफ-मुसर्रफ के रिश्ते
ये कहानी साल 1998 से शुरू होती है वो दौर था जब पाकिस्तान की कमान नवाज़ शरीफ के हाथों में थी. इसी सालनवाज़ शरीफ ने परवेज़ मुसर्रफ को पाकिस्तान के सेना प्रमुख के तौर पर नियुक्त किया था. शरीफ ने सपने में भी ऐसा नहीं सोचा होगा कि अगले साल यही शक्स उनके ही जड़ काट देगा. 1999 में जनरल परवेज़ मुसर्रफ ने नवाज़ शरीफ का तख्ता पलट दिया और पुरे आवाम में सैन्य शासन लागू कर दिया. इस दौरान शरीफ पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा कर साल 2000 में उन्हें देश निकला दे दिया गया था. तब नवाज़ शरीफ ने सऊदी अरब में जा कर शरण लिया था और अपने 7 साल वही गुज़ारे थे.
नवाज़ शरीफ की पाकिस्तान वापसी
साल 2007 शरीफ ने वापस पाकिस्तान लौटने का फैसला किया और लौटें भी. नवाज़ ने साल 2008 में हुवे चुनाव में भी हिस्सा लिया. लेकिन किस्मत और आवाम ने नवाज़ का साथ नहीं दिया और वो चुनाव हार गए. हालांकि उस वक़्त तो नवाज़ शरीफ के लिए स्थिति सामान्य नहीं हुई लेकिन बावजूद इसके थोड़े बहूत हालात शरीफ के साथ थे. कुछ समय बाद हालात बदलें और समय भी बदला और मुशर्रफ को भी 2008 में ही अपनी गद्दी छोड़नी पड़ी. साल 2013 में आम चुनाव के बाद नवाज़ ने एक बार फिर पाकिस्तान की कमान संभाली.
अप्रैल 2016 में भी नवाज़ पर लटकी थी तलवार
साल 2016 में एक बार फिर नवाज़ शरीफ पर तख्ता पलट की तलवार लटकने लगी थी जब पनामा पेपर लीक हुए थे. दरअसल पनामा पेपर्स के लीक होने के बाद पाकिस्तान में ऐसा माहौल बन गया था जिससे ऐसा लग रहा था कि एक बार फिर वो दिन दूर नहीं जब पाकिस्तान का तख्ता पलट हो सकता है. ऐसा कहना इस लिए वाजिब था क्योंकि जब ये पेपर्स लीक हुए थे तब जनरल राहील शरीफ का नाम खुल कर सामने आया था और ऐसा लग रहा था कि चौथी बार पाकिस्तान में सेना का राज होगा.
क्या था पूरा मामला
दरअसल जब पनामा पेपर्स लीक होने की खबर सामने आई उस वक़्त नवाज़ को रोम जाना था लेकिन ऐन वक़्त में ही उन्होंने मोस्को जाने का फैसला कर लिया. मोस्को पहुचने के बाद उनहोंने कुछ लोगों से मुलाकात भी की और उसके बाद वो लंदन के लिए रवाना हुए. लंदन जाने का बहाना ये था कि नवाज़ अपने दिल के जांच के लिए लंदन गए थे. ऐसे में एक सवाल जरुर उठ रही थी कि ऐसा कौन सा जांच था जो पाकिस्तान में नहीं किया जा सकता था. आपको बता दें कि इस से पहले नवाज़ को दिल से जुडी कोई शिकायत नहीं आई थी तो अचानक लंदन जाना एक बड़ा सवाल खड़ा करता है. जब मामले ने तूल पकड़ा तब नवाज़ ने लंदन से ही प्रेस कॉन्फ्रेंस किया और पनामा पेपर्स पर सफाई भी दिया था. उस वक़्त पाकिस्तान के सारे बड़े नेता जैसे इमरान खान, चौधरी निसार, PPP प्रमुख आसिफ अली ज़रदारी, पाकिस्तान के राष्ट्रपति मामनून हुसैन, और JUIF प्रमुख मौलान फजलुर हुसैन सारे पाकिस्तान से बहार थें. अगर कोई पाकिस्तान में था तो वो थे सेना प्रमुख राहील शरीफ. क्या ये सब तख्ता पलट के डर से हुवा था. हालांकि उस वक़्त नवाज़ की ये चाल तो काम आ गई थी. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या इस बार नवाज़ अपनी गद्दी बचा पाएंगे?
पाकिस्तान में चल रही है तख्ता पलट की साजिश
पाकिस्तान का इतिहास यही कहता है कि जब-जब पाकिस्तानी हुकूमत भारत से लोहा लेने में विफल रहा है तब-तब वहां ऐसी स्थिति बनी है कि वहां की सेना ने सरकार को जड़ से उखाड़ फेका है. ऐसा होना इस बात को तो नहीं दर्शाता है कि सेना ने मजबूती के साथ अपने विदेश नीतियों को संभाला है लेकिन पाकिस्तानी आवाम को इसका हर्जाना जरुर भुगतना पड़ा है. भारत के प्रधानमंत्री के भाषण में भी पाकिस्तानी आवाम का ये जिक्र कहीं न कहीं इस बात पर मोहर लगाती है.
कश्मीर लेंगे हमसे….
जरा सोचिये नवाज शरीफ जिन्हें खुद नही पता कि वो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कब तक है वो हिंदुस्तान से कश्मीर लेने की बात करते हैं. मोदी सरकार ने सीमा पार से लगातार बढ़ रहे आतंकवाद पर पाकिस्तान को ऐसा करारा तमाचा जड़ा है कि पाकिस्तान इसे बताने में भी हिचकिचा रही है.
तख्ता पलट के आसार
पाकिस्तान के ऐसे हालत हैं कि कोई भी भारत-पाकिस्तान के मौजूदा हालत पर सोचने के बजाये सरकार और सेना के बिच चल रहे विपरीत विचारधारा से परेशान है. इस हालत से पाकिस्तान में जो तस्वीर बन रही है वो काफी चौकाने वाली है, वो ये है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख राहिल शरीफ और नवाज शरीफ के बीच कुछ ठीक नही चल रहा है. दूसरी ओर नेता विपक्ष इमरान खान ने भी नवाज़ शरीफ़ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. इमरान अपने बयानों में कही से भारत को या प्रधानमंत्री मोदी को जवाब देते नज़र नहीं आ रहे है इतर वो नवाज़ के हुकूमत को ही गलत ठहरा रहे है. ऐसे में एक बात साफ़ है कि कहीं न कहीं पाकिस्तान में तख्ता पलट की राजनीती जोरों पर है और इसका फायदा भारत को जरुर होगा.
तख्ता पलट रोकने कि कोशिश
नवाज़ शरिफ़ को कहीं ना कहीं इस बात क अनदेशा हो रहा है कि पाकिस्तान कि सेना और विपक्ष मिल कर उनके तख्ता पलट के कोशिश मे लगी है. पाकिस्तानी सेना के ओर से जारी किये गये फर्जी वीडियो इस बात का जीता जागता प्रमाण है जिसमें पाकिस्तानी सेना ने ये दिखाने का प्रयास किया है कि भारत के ओर से कोई सर्जिकल स्ट्राइक नहीं किया गया. बल्कि पाकिस्तान ने हिन्दुस्तान के जवानों पर हमला किया है.
Comments