भारत की ओर से एलओसी के पार पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में सर्जिकल स्ट्राइक किए जाने को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार के पास सर्जिकल स्ट्राइक की कार्रवाई के सबूत मौजूद हैं। दूसरी ओर, ड्रोन, सेटेलाइट और भारतीय सैनिकों ने इस कार्रवाई की रिकॉर्डिंग की है लेकिन सेना और खुफिया एजेंसी इस वीडियो को जारी करने के खिलाफ है।
पाकिस्तान में किनके जनाजों पर फातिया पढ़ा गया
पाकिस्तान में किनके जनाजों पर फातिया पढ़ा गया
पिछले हफ्ते नियंत्रण रेखा के पास भारतीय सेना द्वारा किए गए सर्जिकल स्ट्राइक पर बड़ा खुलासा हुआ है। इससे भारत के एलओसी पार पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक पर पाकिस्तानी झूठ को चश्मदीदों ने बेनकाब कर दिया है। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक एक चश्मदीद ने यह बताया कि सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान जेहादियों की पनाहगाहों को तबाह कर दिया गया और दोनों पक्षों के बीच भारी गोलीबारी हुई जिसमें कई आतंकी ढेर हो गए।
गवाहों के मुताबिक सर्जिकल स्ट्राइक के बाद उन्होंने आतंकियों के ठिकानों को जलते हुए देखा। आधी रात अचानक फायरिंग की आवाजें सुनाई दी। आवाजें काफी दूर तक सुनाई दे रही थी। अखबार के मुताबिक उसने नियंत्रण रेखा के पास रहनेवाले कई लोगों से बातचीत की। एलओसी के पास रहने वाले लोगों का दावा है कि 29 सितंबर की रात हुए सर्जिकल स्ट्राइक में मारे गए लोगों के शवों को ट्रक में लादकर ले जाया गया और उन्हें सुबह होते ही दफना दिया गया। मारे गए आतंकियों का अंतिम संस्कार बड़े ही गुपचुप तरीके से किया गया।
गवाहों के मुताबिक मारे गए आतंकियों के लिए मस्जिद में दुआ भी की गई। नमाज-ए-जनाजा चाल्हाना के मस्जिद में पढ़ी गई। कुछ शवों को दफनाया गया और कुछ शवों को आतंकियों के कैंप में ले जाया गया।
अंग्रेजी अखबार के मुताबिक पांच चश्मदीदों में से 2 जो दुधनियाल के हैं उन्होंने जानकारी दी कि अल-हवाई पुल के पास पुरवा के मुख्य बाजार के पास एक गिरी इमारत दिखी , जहां एक मिलिट्री आउटपोस्ट है जिसका उपयोग लश्कर करता है। दोनों चश्मदीदों ने कहा कि अलहवाई ब्रिज वह आखिरी बिन्दु है जहां घुसपैठ करने वाले समूह अपने साथ सामान लोड करते हैं और फिर एलओसी के रास्ते कुपवाड़ा जाते हैं।
सूत्रों के अनुसार, केंद्र के पास तीन सूत्रों से भेजे गए सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मौजूद हैं। सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि पीओके में भारतीय सेना की ओर से अंजाम दिए गए सर्जिकल स्ट्राइक के यूएवी (ड्रोन) से लिए गए सबूत हैं। यूएवी के जरिये इस कार्रवाई का वीडियो सरकार के पास है। दूसरा सबूत यह है कि सैटेलाइट के जरिये भी सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो बनाया गया है। इसके अलावा, सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देने के समय भारतीय सैनिकों जो हेल्मेट पहने थे, उस पर लगे कैमरे से भी कार्रवाई की रिकाडिंग की गई है, जो सबूत के तौर पर केंद्र के पास मौजूद है।अंग्रेजी अखबार के मुताबिक पांच चश्मदीदों में से 2 जो दुधनियाल के हैं उन्होंने जानकारी दी कि अल-हवाई पुल के पास पुरवा के मुख्य बाजार के पास एक गिरी इमारत दिखी , जहां एक मिलिट्री आउटपोस्ट है जिसका उपयोग लश्कर करता है। दोनों चश्मदीदों ने कहा कि अलहवाई ब्रिज वह आखिरी बिन्दु है जहां घुसपैठ करने वाले समूह अपने साथ सामान लोड करते हैं और फिर एलओसी के रास्ते कुपवाड़ा जाते हैं।
ये सर्जिकल स्ट्राइक पाकिस्तान के गले नही उतरी और पाकिस्तानी आवाम के सामने अपनी इज्जत बचाने के लिए वहां की हुकूमत ने इस सर्जिकल स्ट्राइक को नकार दिया। पाक हुकूमत के नकारे जाने के बाद कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने भी इसे फर्जी करार दिया व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने सरकार से इसके सबूत दिखाने की बात कही।
सर्जिकल स्ट्राइक के सबसे बड़े सबूत!!
सुबूत तो अब चीख चीख कर बोलने भी लगे है, LOC पार के बासिन्दे बता रहे है कि खैरातीबाग़, चल्हाना, तीतवाल, अहलवल ये वो केम्प थे जहाँ आधी रात को गोलीबारी की आवाजे सुनी और उनको जलते देखा था ! हर केम्प से 15 आतंकी मारे गये (at least) और कुछ जंगलों में भाग गये !
उन लोगों के मुंह पर ताला लग सकता है जो भारत द्वारा POK में घुसकर की गयी सर्जिकल स्ट्राइक को फर्जी बता रहे हैं। नियंत्रण रेखा (LOC) के पार रहने वाले कुछ ऐसे लोग सामने आए जिन्होंने दावा किया है कि उन्होंने पीओके में भारतीय सेना द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक की गतिविधियों और फिर उसके नतीजों को देखा है।
सीमारेखा के निकट के गावों में रह रहे लोगों ने दावा किया है कि 29th सितम्बर की रात यहाँ बड़े स्तर पर गोलीबारी हुई थी, मारे गए लोगों के शव दिन खुलने से पहले ही ट्रकों में भरकर ले जाए गए the और बड़े ही गुपचुप तरीके से आतंकवादियों को दफना दिया गया। चस्म्दीदों के इस बयान के बाद भारतीय सेना के सर्जिकल हमले के दावे को झूठा बता रहे पाकिस्तान की पोल खुल गयी है, पाकिस्तान भारतीय सेना के सर्जिकल हमले को फर्जी बताते हुए यह दावा कर रहा है कि भारतीय सेना ने सीमापार से ही मोर्टार दागे the जिसमे दो पाक सैनिक मारे गए।
अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस में छापी खबर के मुताबिक एक चश्मदीद ने तो ये भी बताया कि ‘जिहादियों की पनाहगाहों को तबाह कर दिया गया, दोनों पक्षों के बीच भारी गोलीबारी भी हुई, जिहादियों की ये मेकशिफ्ट बिल्डिंग उनके इस पार आने से पहले अपने मुल्क की आखिरी पनाहगाह होती थी। अखबार के मुताबिक नियंत्रण रेखा के पास रहने वाले लोगों ने निशाना बनाये गए आतंकी ठिकानों की जानकारी भी अखबार को दी, लोगों ने यह भी बताया कि मारे गए आतंकियों कि संख्या सैन्य अधिकारियों द्वारा बताई गयी संख्या से कम भी हो सकती है लेकिन इस हमले ने आतंकियों के इरादों और हौसलों को ज़रूर पस्त किया है और उनके बुनियादी ढांचे को पर्याप्त क्षति पहुंचाई है।
जब भारतीय सेना सर्जिकल स्ट्राइक कर रही थी तब अमेरिकन NSA ने सटेलाईट द्वारा LOC पर हुई इस हलचल को देखा और भारतीय NSA अजित डोभाल से फोन कर बातचीत की थी। यह बातचीत जब हुई तब भारतीय सेना सर्जिकल स्ट्राइक कर रही थी और ईसे देखकर ही अमेरिकन NSA ने अजित डोभाल को फोन किया था। इसके अलावा अमेरिकन NSA ने सटेलाईट द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक की तस्वीरें भी कैप्चर की थी।
भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान कई तस्वीरें ली थी व इसका वीडियो भी बनाया था लेकिन इसको पब्लिक करना खतरनाक साबित हो सकता था इसलिए ऐसा नही किया गया। भारतीय सेना वीडियो जारी कर अपने काम करने का तरीका पाकिस्तान को नही बता सकती लेकिन फिर भी कुछ ऐसे सबूत सामने आये है जिनसे ये साबित हो जायेगा की सर्जिकल स्ट्राइक हुई थी।
भारतीय सेना ने सर्जिकल हमले की फूटेज सरकार को सौंप दी है। देश के सशस्त्र बल चाहते हैं कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आतंकवादियों के ठिकानों पर सर्जिकल हमले का विडियो फुटेज सरकार जारी करे। इस संबंध में अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री कार्यालय को करना है। भारतीय सेना के आला अधिकारियों ने बताया कि आर्मी चाहती है कि भारत इस सबूत को सबके सामने रख दे ताकि उन लोगों को जवाब मिल जाए, जो आरोप लगा रहे हैं कि हमला हुआ ही नहीं। पाकिस्तान बार-बार कह रहा है कि 29 सितंबर को तड़के सर्जिकल स्ट्राइक नहीं हुआ था।
क्यों देंगे सबूत:- केंद्र सरकार के पास हैं कार्रवाई के सबूत, सैटेलाइट से भी बनाया गया वीडियो!
सेना के उच्च अधिकारी ने कहा सेना चाहती है कि सरकार वीडियो रिलीज़ करे ताकि उन लोगों को मुंहतोड़ जवाब मिले जो कह रहे हैं कि ऐसा कोई हमला हुआ ही नहीं। पड़ोसी देश के इस रुख को देखते हुए आर्मी ने अपनी बात सामने रखी है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी मांग की है कि मोदी सरकार पाकिस्तान के झूठ को बेनकाब करे। वहीं कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने हमले की सत्यता पर सवाल उठाया है। वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने बताया कि हमले का फुटेज जारी करने या न करने का निर्णय पाकिस्तान के रुख को देखते हुए किया जाएगा।
तनाव दोगुना करेगी वीडियो:-
इस बात पर भी नजर है कि विडियो जारी करने से कहीं भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और न बढ़ जाए क्योंकि फुटेज सामने आने पर पाकिस्तान सरकार और वहां की सेना अपने देश में बुरी तरह घिर जाएगी। आर्मी के शीर्ष रणनीतिकारों ने कहा कि सेना के पास इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि क्रॉस-बॉर्डर हमला बहुत प्रभावी रहा। इस संबंध में विडियो फुटेज के अलावा फोटोग्राफ भी हैं, जिन्हें सैनिकों और अनमैंड एरियल वीकल्स ने शूट किया था।
क्या कहते हैं अधिकारी:-
एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘इसमें कोई शक नहीं है कि हमले से दूसरे पक्ष को भारी नुकसान हुआ। सरकार के पास इसका सबूत भी है कि हमारे जवानों ने प्रभावी ढंग से निशाने साधे।’ अब तक सर्जिकल हमले पर सशस्त्र बलों का केवल एक सार्वजनिक बयान 29 सितंबर को डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिटरी ऑपरेशंस लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह की ओर से आया है।
लाइव है स्थिति:-
राहा:- सेना के तीनों अंगों की स्टाफ कमेटी के प्रमुख एयर चीफ मार्शल अरूप राहा ने मंगलवार को कहा कि कॉमेंट्स इसलिए नहीं किए जा रहे हैं क्योंकि स्थिति अब भी’लाइव’ है। उन्होंने कहा, ‘मुझे कुछ नहीं कहना चाहिए क्योंकि यह बेहद संवेदनशील मामला है और स्थिति अब भी लाइव है।’ राहा ने यह भी कहा कि वायुसेना जवाब देने की ताकत रखती है, लेकिन वायु सेना के इस्तेमाल के बारे में कोई भी निर्णय सरकार को करना है।
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