दशहरा पर देश में जहां पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और सैन्य प्रमुख राहिल शरीफ, हाफिज सईद के चेहरों को रावण के पुतलों पर लगाकर जलाया गया। वहीं मंगलवार रात दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में कुछ छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अपना गुस्सा निकाला। छात्रों ने पीएम मोदी और योग गुरु बाबा रामदेव के पुतलों को रावण की जगह जलाया। टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में एनसयूआई (नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया) के सदस्य मसूद ने कहा, ”हां, जेएनयू की एनएसयूआई यूनिट ने ऐसा किया है। हमारा प्रदर्शन वर्तमान सरकार से हमारा असंतोष प्रदर्शित करता है। विचार ये है कि सरकार से बुराई को बाहर किया जाए और एक ऐसा सिस्टम लाया जाए जो प्रो-स्टूडेंट और प्रो-पीपल हो।” कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई के कुछ सदस्यों ने बुराई के प्रतीक रावण की तरह पीएम मोदी को दर्शाते हुए पुतला फूंका। स्टूडेंट्स ने कार्ड पर स्लोगन लिखे- ”बुराई पर सत्य की जीत होकर रहेगी।” इस साल अध्यक्ष पद के लिए जेएनयूएसयू चुनाव में हिस्सा लेने वाले सन्नी धीमान के मुताबिक, यह प्रदर्शन सरकार की सामूहिक विफलता का प्रतीक था। उन्होंने कहा, ”पुतला सभी मोर्चों पर सरकार की विफलता को दर्शाने के लिए जलाया गया। यह प्रदर्शन गौ रक्षा के नाम पर मुस्लिमों और दलितों पर अत्याचारों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे यूथ फोरम फॉर डिस्कशंस एंड वेलफेयर एक्टिविटीज (YFDA) को नोटिस जारी करने के जेएनयू प्रशासन के फैसले के खिलाफ था। हमें लगता है कि यूनिवर्सिटी ने ऐसा सरकार के दबाव में किया और वह YFDA को निशाना बना रहे हैं क्योंकि इस समूह में ज्यादातर मुस्लिम छात्र हैं।”
टीओआई से बातचीत में एक अन्य छात्र ने कहा, ”देखिए इस सरकार ने देश का क्या हाल कर दिया है। जो वादे उन्होंने (मोदी) ने किए, कागज पर ही हैं। वह सिर्फ उन्हें भाषणों में दोहराते रहते हैं। इस दशहरा हमने बकवास खत्म करने का फैसला किया और उन्हें कुछ असल काम करने के लिए मजबूर किया जाए।”
पुतले में रावण के मुख्य सिर के तौर केन्द्र में पीएम मोदी, अन्य सिरों में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, नाथूराम गोडसे, योग गुरु रामदेव, साध्वी प्रज्ञा, आसाराम बापू और अन्य के चेहरे लगाए गए थे। पुतला जेएनयू कैंपस के मशहूर सरस्वती ढाबा के नजदीक जलाया गया। लोगों ने कथित तौर मोदी सरकार के खिलाफ नारे भी लगाए।
आज पुरस्कार वापस करने और देश में असह्य महसूस करने वाले पता नहीं कहाँ छुप गए ? जेएनयू में फिर साम्प्रदायिकता और देश विरोधी ताकतें अपना सिर उठा रहीं हैं। लेकिन इतना जरूर है कि छद्दम धर्म-निरपेक्षता का स्वांग रचने वालों की बछियां जरूर खिल उठी होंगी। नेताओं के पुतले जलाना तो एक बार को मान भी लिया जाये, लेकिन नाथूराम गोडसे, बाबा रामदेव, और बापू आसाराम के पुतले जलाना उन अदृश्य बातों को उजागर कर रहा है, जिसे गंभीरता से देखने एवं पढ़कर मनन करने की जरुरत है।
आसाराम
आसाराम वही संत है, जिसे बलात्कार के आरोप में पिछली सरकार ने जेल में डाला है। क्या पिछली सरकार का एक भी मंत्री ईमानदारी से राष्ट्र को आसाराम को जेल भेजे जाने के षड्यंत्र की सच्चाई बताने का कष्ट करेगा। लगभग तीन वर्ष पूर्व एक हिन्दी पाक्षिक को सम्पादित करते इस षड्यंत्र को उजागर किया था। बापू ने अपने 9 जून 2012 के समागम में कहा था: " सोनिया मैडम बहुत हो गया, अब इटली वापस जाओ, तुम हिन्दुओं को ईसाई बनाओगी, आसाराम और उसके चेले उनको वापस हिन्दू बनाते रहेंगे।" यह था आसाराम के बलात्कार आरोप का षड्यंत्र। इन प्रवचनों उपरान्त से ही आसाराम को लपेटने की तैयारी शुरू हो गयी थी।
बाबा रामदेव 
रामदेव ने दिल्ली के रामलीला मैदान में राष्ट्रव्यापी यूपीए सरकार द्धारा किये जा रहे घोटालों को उजागर करने अभियान छेड़ा था, जिस कारण सरकार की बहुत ज्यादा किरकिरी हो रही थी।
नाथूराम गोडसे
धन्य है, कम से कम इस हुतात्मा को याद तो किया। यह वह हुतात्मा है जिसने भारत में छद्दम धर्म-निरपेक्षता के जन्मदाता महात्मा गाँधी का वध कर भारत के एक और विभाजन को रोका था। अन्यथा आजकी तारीख में पाकिस्तान की सीमाएं भारत से बड़ी होती और भारत, वर्तमान पाकिस्तान से भी छोटा होता। गोडसे का विरोध करने वालों को कोर्ट में दिए 150 बयानों को गंभीरता से अध्ययन करना होगा।
यानि संक्षेप में कहा जाये तो जेएनयू में दशहरा के अवसर पर जिन लोगों के पुतले का दहन किया है, इस बात को सिद्ध करता है, कि ये समस्त छद्दम हिंदूवाद के घोर विरोधी हैं। ये सभी देश से छद्दम धर्म-निरपेक्षता की अर्थी निकालने में प्रयन्तशील है। बहुत हो गया छद्दम समाजवाद, धर्म-निरपेक्षता एवं हिन्दू विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने का। विश्व देखेगा कि छद्दमवाद के खिल रहे नंगे नाच का दमन भी इसी स्थल से होगा।
Comments