मुस्लिमों के बड़े दिल के कारण ही भारत मुस्लिमों की तरफ आकर्षित हुआ और वो ही असली हक़दार है भारत में रहने के, ये कहना था मणिशंकर अय्यर का जो के हमेशा से भारत विरोधी रहे हैं और पाकिस्तान के प्रति उनका प्रेम जगजाहिर है.
मणिशंकर अय्यर इंदौर में चल रहे लेफ्ट फ्रंट द्वारा आयोजित प्रोग्राम ‘Stop Politics of Hate’ में बोल रहे थे। मणिशंकर ऐय्यर ने यह भी कहा की मुस्लिमों ने 600 साल भारत में राज किया और सिर्फ प्यार बांटा, कभी हिंसा नहीं की.बॉम्बे हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जीबी कोलसे पाटिल ने कहा की हिन्दू धर्म सिर्फ नाम का है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है। मणिशंकर राष्ट्र को जबाब दो कि "मुग़ल राज से पूर्व भारत में किसका राज था?" कुछ तो शर्म करो।
उन्होंने ये भी कहा की भारत का सबसे बड़ा दुश्मन RSS है। मजे की बात यह है की प्रोग्राम ‘Stop Politics of Hate’ था मगर वहां पर जस्टिस पाटिल और मणिशकंर ऐय्यर ने जमकर नफरत फैलाते हुए हिंदुओं और RSS के खिलाफ जस्टिस पाटिल ने कहा की हिंदुत्व सिर्फ नाम का है और ब्राह्मण ही देश के असली दुश्मन हैं।
उन्होंने कहा की हम सब (वामपंथी और मुस्लिम) को एकजुट होना चाहिए और भारत को RSS और ब्राह्मणों से बचाना चाहिए। वामपंथी इस कदर अलग थलग पड़ गए हैं कि अब हिंदुओं को हिंदुओं से ही लड़ने की साजिश रच रहे हैं।
जस्टिस पाटिल ने यहाँ तक कह दिया की अब हमें हिंदुस्तान शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योकि हिंदुस्तान हिन्दू शब्द का इस्तेमाल करता है और हिंदुस्तान बिना मुसलमानों के संभव नहीं है।वामपंथी दल ‘Popular Front of India’ ने इस प्रोग्राम को आयोजित कराया था और जाहिर सी बात है इस प्रोग्राम में देश भर के सारे देश विरोधियों को बुलावा भेज गया था और मणिशंकर अय्यर कैसे चूक जाते !
याद होगा कि अभी कुछ ही माह पूर्व यही मणिशंकर किस तरह पाकिस्तान टीवी पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विरुद्ध बोल रहे थे। अय्यर के इस तरह व्यवहार को देख ऐसा प्रतीत होता है कि "मणिशंकर अय्यर परिवर्तित हिन्दू तो नहीं।" यदि यह भ्रम सरासर गलत है तो क्षमा चाहूंगा। जब तत्कालीन प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह ने रामजन्मभूमि विवाद को सुलझाने हेतु एक सर्वदलीय पार्टी का गठन कर अयोध्या जाकर समीक्षा कर रिपोर्ट देने को कहा। उस समिति में मणिशंकर अय्यर और सय्यद शहाबुद्दीन भी थे, रामजन्मभूमि तक पहुँचने उपरान्त भी मन्दिर के अंदर नहीं गए। जबकि अन्य सभी मन्दिर ने अंदर जाकर पूजा भी की। सुलेमान सेट आदि द्धारा पूजन किये जाने की रपट के साथ चित्र भी उस समय कई पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित भी हुए थे। अब इनसे कोई पूछे जब तुम्हे अंदर नहीं जाना था, फिर किस लिए सरकार का खर्चा किया?
जब तक देश में इन जैसे नेताओं का बोलबाला रहेगा देश को कहीं दुश्मन तलाशने की जरुरत नहीं।
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