अल्वा ने आरोप लगाया कि जब केंद्र मनमोहन सिंह की सरकार थी तो मनमोहन सिंह ने उन्हें अपने कैबिनेट में शामिल करना चाहते थे, लेकिन सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह को ऐसा करने से रोक दिया। हर फैसले को खुद मनमाने ढंग से सोनिया गांधी लेती थीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में कुछ ऐसे लोग हैं जो अपनी मनमानी करते हैं और दूसरे की बात तक नहीं सुनते।
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मारग्रेट अल्वा ने किताब में लिखा है कि राजीव गांधी से जुडे बोफोर्स मामले को खारिज करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ तत्कालीन नरसिंह राव सरकार के अपील करने के फैसले ने राव को लेकर सोनिया गांधी के मन में संदेह बढ़ा दिया था जिससे दोनों के बीच दूरियां बढ़ी। अपने राजनीतिक सफर को कलमबद्ध करने वाली किताब ‘‘करेज एंड कमिटमेंट” के विमोचन के पहले अल्वा ने कहा कि फैसले के बाद आग बबूला सोनिया ने उनसे पूछा कि क्या राव उन्हें जेल भेजना चाहते हैं।
सोनिया और नरसिंह राव के बीच संबंधों में खटास
सोनिया और राव के बीच तल्ख संबंधों को याद करते हुए अल्वा ने कहा कि बोफोर्स मामले पर बिना उनकी जानकारी के सीबीआई से सीधे निपटने के पीएमओ के फैसले ने राव के प्रति सोनिया का संदेह गहरा कर दिया। उन्होंने इंडिया टूडे टीवी के करण थापर से कहा, ‘‘मैं सीबीआई की प्रभारी मंत्री थी और उन्होंने मुझसे वह कहा, फैसला मेरी जानकारी के बिना लिया गया। फाइल पर पीएमओ ने सीधे कार्रवाई की।’
अल्वा ने राव के निधन पर सम्मान नहीं जताने के लिए पार्टी नेतृत्व से असहमति जताई। उन्होंने कहा, ‘‘उनका पार्थिव शरीर एआईसीसी परिसर भी नहीं लाया गया। तोप ढोने की गाड़ी गेट के बाहर फुटपाथ पर पार्क की गयी।’ उन्होंने कहा, ‘‘चाहे जो भी मतभेद रहा हो, वह प्रधानमंत्री थे, वह कांग्रेस अध्यक्ष रहे थे, वह मुख्यमंत्री थे, वह पार्टी के महासचिव थे। जब एक व्यक्ति की मौत होती है आप उस तरह का व्यवहार नहीं करते।
74 वर्षीय अल्वा ने कहा कि राव के निधन पर जिस तरह उनके साथ व्यवहार हुआ उससे उनको चोट पहुंची। साथ ही कहा, ‘‘किसी दिवंगत नेता के साथ इस तरह व्यवहार नहीं किया जाना चाहिये।” 2008 में कर्नाटक विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी की अपनी आलोचना के बाद पार्टी महासचिव के पद से इस्तीफे के बारे में बात करते हुए अल्वा ने कहा, ‘‘टिकट बेचने के बारे में कहकर मुझे नतीजा भुगतना पड़ा।” अल्वा ने कहा कि चुनावों के पहले पार्टी के खिलाफ बोलने के लिए सोनिया ने उन्हें फटकार लगाई। चुनावों में भाजपा की जीत हुई।
एके एंटनी मुझे निलंबित करवाना चाहते थे
अल्वा ने कहा, ‘‘उन्हें लगा कि मैंने यह (केरल के मुख्यमंत्री के रूप में एंटनी को हटाने का) करवाया। लेकिन मैंने उनसे अच्छा बर्ताव किया। लोगों ने मुझसे कहा कि दरअसल, उन्होंने मेरी बर्खास्तगी की सिफारिश की, लेकिन गांधी ने कहा- नहीं।’ उन्होंने यह भी दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अक्सर कहते थे कि वह अपने मंत्रिमंडल में उन्हें लेना चाहते हैं।
राव और सोनिया के बीच खटास भरे संबंधों पर और प्रकाश डालते हुए अल्वा ने कहा, ‘‘राव रविवार की शाम कभी-कभार मुझे कॉल करते थे और बस इतना पूछते थे कि महिला क्या चाहती हैं। मैं कुछ नहीं कह पाती थी।” उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन वह जानना चाहते थे कि 10 जनपथ का मूड क्या है। वह चिंतित थे। वह सोनिया के साथ कोई झगड़ा या परेशानी नही चाहते थे। और जब मैं सोनियाजी से बात करती थी तो उन्हें हमेशा लगता था कि किसी न किसी वजह से राव चीजों से उस तरह निपटने के लिए तैयार नहीं थे जैसा कि उन्हें करना चाहिए।”
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