कोझिकोड : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक को संबोधित किया। उरी हमले के बाद पीएम मोदी ने अपना पहला सार्वजनिक भाषण दिया। पीएम ने पाकिस्तान को बेनकाब करते हुए कहा कि एक ऐसा देश है जो यह नहीं चाहता कि 21वीं सदी एशिया की बने। पीएम ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज के हुक्मरान आतंकियों के आकाओं के लिखे हुए भाषण पढ़कर कश्मीर के गीत गा रहे हैं। पीएम ने कहा कि भारत उरी हमला नहीं भूलेगा। https://www.facebook.com/BJP4India/videos/1326720017368518/
-मेरे प्यारे देशवासियों देश का भविष्य शांति, सद्भावना से जुड़ा हुआ है। हम एक स्वर से बोलते हैं। आज सवा सौ करोड़ देशवासी उस देशभक्ति की भाव से भरे हुए हैं। भारत की आन-बान-शान के लिए देश कोई भी कीमत देने के लिए तैयार है।
-पाकिस्तान के हुक्मरान सुन लें हमारे 18 जवानों का बलिदान बेकार नहीं जाएगा। आपको अलग-थलग करने में भारत सफल रहा है और दुनिया में हम आपको अकेला रहने के लिए मजबूर कर देंगे। वह दिन दूर नहीं होगा जब पाकिस्तान की आवाम पाकिस्तान के हुक्मरानों के खिलाफ लड़ाई लड़ने सड़कों पर जा आएगी।
-पाकिस्तान की आवाम से मैं कहना चाहता हूं आपको गुमराह करने के लिए हजार साल तक हिंदुस्तान से लड़ने की बात की जाती है। आज दिल्ली में एक सरकार है और यह सरकार चुनौती स्वीकार करती है। हिंदुस्तान आपसे लड़ाई लड़ने को तैयार है। आइए हम गरीबी से लड़ें। आइए लड़ाई लड़ते हैं बेरोजगारी को खत्म करने की। लड़ाई लड़ें और देखें कि बेरोजगारी को पहले कौन खत्म करता है। हम अशिक्षा के खिलाफ लड़ाई लड़ें। आइए लड़ाई लड़ें प्रसूता महिलाओं और नवजातों को बचाने की। आओ देखें-कौन जीतता है।
-पाकिस्तान की आवाम अपने हुक्मरानों से पूछे कि दोनों देश एक साथ आजाद हुए। क्या कारण है कि हिंदुस्तान दुनिया में सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट करता है और आपका देश आतंकवाद एक्सपोर्ट करता है।
-मैं आज यहां से सीधे पाकिस्तान की आवाम से बात करना चाहता हूं। जो हुक्मरान आतंकवादियों के लिखे हुए भाषण पढ़ते हैं उनसे देश को कोई उम्मीद नहीं है। मैं पाकिस्तान की आवाम को याद दिलाना चाहता हूं कि 1947 से पहले आपके पूर्वज भी इसी संयुक्त हिंदुस्तान की धरती को प्रणाम करते थे इसी को अपनी मिट्टी मानते थे। उसी की याद दिलाते हुए मैं आज आपसे कुछ बात करना चाहता हूं। पाकिस्तान की आवाम अपने हुक्मरानों से पूछे कि पीओके तो आपके पास है आप उसे भी संभाल नहीं पाते। बांग्लादेश को भी संभाल नहीं पाए, आप सिंध, गिलगिट, पख्तून और बलोचिस्तान को संभाल नहीं पा रहे हो और कश्मीर की बात कर गुमराह कर रहे हो।
-पड़ोसी देश के नेता उनके हुक्मरान जो कहा करते थे-हजार साल लड़ेंगे, कहां खो गए कहीं नजर नहीं आ रहे। आज के हुक्मरान आतंकियों के लिखे हुए भाषण पढ़कर कश्मीर के गीत गा रहे हैं।
-हमारे सुरक्षा बल के जवान आतंकवाद की इस लड़ाई को जीतते चले गए हैं इसका कारण केवल शस्त्र नहीं है, बल्कि जवानों का मनोबल सबसे ऊंचा है, सबसे बुलंद हौसला है। भारत के सवा सौ करोड़ भारतीयों का मनोबल हमारी सेना का ताकत है।
-पड़ोसी देश एक घटना में सफल हुआ और हमारे 18 जवानों को शहीद कर दिया। यदि वे 17 बार सफल होते तो बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाने में कामयाब हो जाते। सवा सौ करोड़ भारतीयों को सेना और सुरक्षा बलों पर गर्व है।
-पिछले कुछ महीनों में 17 बार पड़ोसी देश ने आतंकवादियों को भारत में भेजकर देश को तहस-नहस करने का प्रयास किया। हमारी सेना ने इऩ प्रयासों को विफल किया। हमारे सुरक्षा बलों ने इन आतंकियों के नापाक इरादों को पूरा नहीं होने दिया।
-उरी में हमारे पड़ोसी देश की वजह से हमारे 18 जवानों को बलिदान होना पड़ा। आतंकवादी कान खोलकर सुन लें यह देश इस बात को कभी भूलने वाला नहीं है।
-कहीं भी आतंकवादी घटना होने पर यह बात सामने आती है कि आतंकवादी का उस देश से संबंध है या ओसामा बिन लादेन की तरह वह देश उसका पनाहगाह बनता है।
-21वीं सदी को अपना बनाने के लिए एशिया के सभी देश अपना योगदान दे रहा है लेकिन एक देश ऐसा है जो चाहता है कि 21वीं सदी एशिया की न बने। वह देश चाहता है कि एशिया में खून खराबा हो और एशिया रक्तरंजित हो।
-एक देश चाहता है कि पूरा एशिया आतंक की चपेट में आए। एशिया के अंदर जहां-जहां आतंक की घटनाएं हो रही हैं, हर देश एक देश को ही जिम्मेदार बताता है। एक देश एशिया में षड्यंत्र कर रहा है। एशिया में आतंक के लिए एक देश ही जिम्मेदार है।
-दुनिया आज मान रही है कि भारत आजे सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।
-देश एक ही मंत्र को लेकर तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह विकास का मंत्र है 'सबका साथ, सबका विकास'।
-केरल के हजारों कार्यकर्ताओं का बलिदान प्रेरणा है। मैं भरोसा देता हूं कि ये बलिदान कभी बेकार नहीं जाएगा। भाजपा केरल का भाग्य बदलेगी।
-हमारी सरकार गरीबों को समर्पित है।
-पिछली शताब्दी के तीन महान विचारकों महात्मा गांधी, दीनदयाल उपाध्याय और लोहिया ने भारत के राजनीतिक चिंतन को प्रभावित किया।
-50 साल पहले किसी राजनीतिक पंडित ने जनसंघ के बारे में कुछ नहीं कहा।
-जनसंघ से शुरू हुई भाजपा देश की नंबर एक पार्टी बन गई । जनता ने भाजपा को देश सेवा का मौका दिया।
-अपने विदेश दौरे पर केरल के लोगों से मिला।
-देश में कहीं भी केरल की प्रशंसा सुनता हूं तो गर्व महसूस करता हूं।
-आज इस धरती पर मुझे दोबारा आने का सौभाग्य मिला है। साधु, संतों और संस्कार की वजह से पूरी दुनिया में केरल का सम्मान है।
-पीएम मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत मलयालयम में किया और लोगों का अभिवादन किया।
केरल में मोदीजी ने जिस प्रकार से पाकिस्तान को आतंकवाद पर आईना दिखाया उसके दूरगामी परिणाम होंगें इसमें कोई शक नहीं परंतु मोदीजी ने काफी कुछ बोलने से छोड़ भी दिया जिससे कई लोग निराशा व्यक्त कर रहे हैं,लेकिन ये क्या कम है कि लालकिले से सिर्फ बलूचिस्तान का नाम लेने के बाद जहाँ पाकिस्तान में तहलका मच गया है वहीं अब बलूचिस्तान के साथ-साथ मोदीजी ने सिंध,गिलगित,पीओके का भी जिक्र करके पाकिस्तान को जोरदार तमाचा मारा है जिसकी गूँज आने वाले लंबे समय तक पाकिस्तान को चैन से सोने नहीं देगी,मेरे हिसाब से मोदीजी का संयमित भाषण देना उचित ही है क्योंकि उरी हमले का सटीक व जोरदार जवाब पाकिस्तान को सुषमा जी संयुक्त राष्ट्र के मंच से सारी दुनियाँ के सामने दें यही सही होगा अतः सुषमा जी के भाषण का महत्व कम न हो जाये इसलिय मोदीजी का अभी ज्यादा कुछ न बोलना उचित ही है।हर देशवासी यही चाहता है कि पाकिस्तान फिर से भारत का हिस्सा बने और ये तभी संभव है जब भारत ताकत के बजाय दिमाग़ से काम करे और सबसे पहले दुनियाँ के टुकड़े पर पलने वाले पाकिस्तान को ये टुकड़े मिलने बंद करवाये जिसके बाद मजबूर होकर पाकिस्तान को भारत की शरण में आना ही पड़ेगा और शायद यही मोदीजी की नीति भी है इसलिये इस विषय पर मैं उनके हर एक कदम का समर्थन प्रत्येक भारतवासी को करना चाहिए।
केरल में मोदीजी ने जिस प्रकार से पाकिस्तान को आतंकवाद पर आईना दिखाया उसके दूरगामी परिणाम होंगें इसमें कोई शक नहीं परंतु मोदीजी ने काफी कुछ बोलने से छोड़ भी दिया जिससे कई लोग निराशा व्यक्त कर रहे हैं,लेकिन ये क्या कम है कि लालकिले से सिर्फ बलूचिस्तान का नाम लेने के बाद जहाँ पाकिस्तान में तहलका मच गया है वहीं अब बलूचिस्तान के साथ-साथ मोदीजी ने सिंध,गिलगित,पीओके का भी जिक्र करके पाकिस्तान को जोरदार तमाचा मारा है जिसकी गूँज आने वाले लंबे समय तक पाकिस्तान को चैन से सोने नहीं देगी,मेरे हिसाब से मोदीजी का संयमित भाषण देना उचित ही है क्योंकि उरी हमले का सटीक व जोरदार जवाब पाकिस्तान को सुषमा जी संयुक्त राष्ट्र के मंच से सारी दुनियाँ के सामने दें यही सही होगा अतः सुषमा जी के भाषण का महत्व कम न हो जाये इसलिय मोदीजी का अभी ज्यादा कुछ न बोलना उचित ही है।हर देशवासी यही चाहता है कि पाकिस्तान फिर से भारत का हिस्सा बने और ये तभी संभव है जब भारत ताकत के बजाय दिमाग़ से काम करे और सबसे पहले दुनियाँ के टुकड़े पर पलने वाले पाकिस्तान को ये टुकड़े मिलने बंद करवाये जिसके बाद मजबूर होकर पाकिस्तान को भारत की शरण में आना ही पड़ेगा और शायद यही मोदीजी की नीति भी है इसलिये इस विषय पर मैं उनके हर एक कदम का समर्थन प्रत्येक भारतवासी को करना चाहिए।

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