प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितम्बर 5 को जी-20 के सदस्य देशों को बताया कि पाकिस्तान किस तरह दक्षिण एशिया में आतंकवाद फैला रहा है और आतंकवाद को राज्य की नीति के एक औजार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
मोदी ने इस समूह से अपील भी की कि आतंकवाद के समर्थकों को अलग-थलग किया जाए और उन पर प्रतिबंध लगाया जाए।
मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से कहा कि आतंकवाद की समस्या किस तरह क्षेत्र को कुप्रभावित कर रही है।
मोदी ने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा, “कुछ ऐसे देश हैं, जो इसे राज्य की नीति के एक औजार के रूप में इस्तेमाल करते हैं। दक्षिण एशिया में एक मात्र देश हमारे क्षेत्र में आतंकी एजेंटों को फैला रहा है।”
पाकिस्तान के साथ भारत के संबंध उस समय अधिक बिगड़ गए, जब उसने जम्मू एवं कश्मीर में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए आतंकवादी बुरहान वानी को शहीद घोषित कर दिया।
मोदी ने जी-20 के अंतित सत्र में कहा, “हमारे लिए कोई आतंकवादी, सिर्फ आतंकवादी है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि हिंसा और आतंक की पनपती ताकतों ने एक बुनियादी चुनौती खड़ी कर दी है। मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि आतंकवाद के खिलाफ एकसाथ मिलकर कार्रवाई किया जाए।
उन्होंने कहा, “भारत की नीति आतंकवाद को कत्तई बर्दाश्त न करने की है। क्योंकि इससे कम कुछ भी पर्याप्त नहीं है।”
चीन से भी पाकिस्तान में पनप रहे आतंकवाद पर चर्चा
मोदी ने शी के साथ अपनी मुलाकात के दौरान पाकिस्तान के अशांत क्षेत्रों -गिलगिट-बाल्टिस्तान और पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर- से पैदा हो रहे आतंकवाद को लेकर चिंता जाहिर की, जहां चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा आने वाला है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितम्बर 4 को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को पाकिस्तान के अशांत इलाके से चलाए जा रहे आतंकवाद को लेकर भारतीय चिंता से अवगत कराया। इस क्षेत्र में 46 अरब डॉलर की लागत से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का निर्माण किया जा रहा है।
हांगझू शहर में जी-20 शिखर सम्मेलन के इतर शी के साथ 35 मिनट की मुलाकात के दौरान मोदी ने कहा, “दिल्ली और बीजिंग को एक-दूसरे के सामरिक हितों के प्रति संवेदनशील होना होगा।”
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने भारतीय संवाददाताओं से कहा, “मोदी ने कहा कि यह सर्वोच्च महत्व की बात है कि दोनों देशों को एक-दूसरे की आकांक्षाओं, चिंताओं और सामरिक हितों का सम्मान करना चाहिए।”
जब पूछा गया कि आतंकवाद पर चर्चा हुई या नहीं तो स्वरूप ने कहा, “यह मुद्दा उठाया गया।”
सीपीईसी बलूचिस्तान, गिलगित-बल्टिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के अशांत इलाके से होकर गुजरता है।
भारत ने जोर शोर से इस परियोजना का विरोध किया है, क्योंकि वह गिलगित-बल्टिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर पर अपना दावा करता है।
शी के साथ बातचीत के दौरान मोदी ने कहा कि विशकेक में चीनी दूतावास पर हमला आतंकवाद के नासूर का एक और प्रमाण है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंकी सूची में जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर के नाम को चीन ने शामिल नहीं होने दिया था, जिससे भारत नाराज है।
प्रधानमंत्री के रूप में मोदी की शी से यह आठवीं मुलाकात थी।
मुलाकात के दौरान शी ने मोदी से कहा, “काफी परिश्रम से निर्मित मजबूत संबंधों को बनाए रखने और अपने सहयोग को और आगे बढ़ाने के लिए चीन भारत के साथ काम करने को इच्छुक है।”
मोदी ने चीनी राष्ट्रपति से कहा कि आतंकवाद को लेकर हमारी प्रतिक्रिया राजनीति से अभिप्रेरित नहीं होनी चाहिए। मोदी का इशारा साफ तौर पर पाकिस्तान की ओर था जो भारत का चिर प्रतिद्वंद्वी और चीन का सदाबहार मित्र है।
जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर ब्रिक्स नेताओं और आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल के साथ बैठक में भी मोदी ने आतंकावाद का मुद्दा उठाया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा, “हर जगह बैठक में मोदी ने कहा, “दक्षिण एशिया या कही भी आतंकवादियों के पास बैंक या हथियार की फैक्ट्री नहीं है और वे वित्त पोषित हैं।”
पाकिस्तान के नाम लिए बिना मोदी ने टर्नबुल से कहा, “खास तौर से हमारा (भारत) पड़ोसी आतंकवाद के अस्थिर करने वाले प्रभाव से पीड़ित है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद के आपूर्तिकर्ताओं, निर्यातकों और वित्त पोषकों को चिह्न्ति किया जाना चाहिए।
जब स्वरूप से पूछा गया कि शी के साथ बैठक में परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत की सदस्यता का मुद्दा उठा या नहीं, तो उन्होंने इस बारे में कुछ भी बताने से इनकार कर दिया।
स्वरूप ने कहा, “जब हम हमारी सामरिक हितों, चिंताओं और आकांक्षाओं की बात करते हैं तो ऐसा नहीं है कि चीन हमारी सामरिक चिंतिाओं, हितों या आकांक्षाओं से अनभिज्ञ है और हम उनकी चिंताओं, आकांक्षाओं और हितों से अनभिज्ञ हैं। यह कुछ ऐसा है जो दोनों पक्षों को पता है।”
पहले गत जून महीने में परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में चीन ने यह कहते हुए भारत के प्रवेश को रोक दिया था कि उसने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किया है।
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