
| विशाल ददलानी |
सोशल मीडिया पर एक सत्या कर्ण नाम की आईडी से एक पोस्ट हुआ है, जिसपर खूब बवाल हो रहा है, और लोग कमेंट के जरिये अपनी राय दे रहे हैं l
उसमे एक लड़के की कहानी है जिसकी माँ मर जाती है फिर वो आध्यात्म की तालाश में भटकता है……उसकी मुलाकात एक साध्वी से होती है…जो काम बोले तो सेक्स के मार्ग से होकर आध्यात्म तक पहुँचने में उसकी मदद करती है…लौंडा आध्यात्म तक बाद में पहुंचता है…पहले उस साध्वी के साथ सेक्स करता है…सम्भोग से समाधि की ओर टाईप में…हिंदू भाई लोग की भावना गम्भीर रूप से घायल हो बीच चौराहे छटपटाने लगी थी…फिलिम में एक आध्यात्मिक न्यूड सीन भी था। अभी ये हरियाणा विधानसभा में जैन मुनि तरुण सागर को इंवाइट करने को लेकर जो बवाल मचा है…जिसमे मुनि महाराज हमेशा की तरह बिना चड्ढी के नँगे पुंगे बैठकर विधानसभा में प्रवचन बांच रहे थे…जिसे अपने हिन्दू भाई लोग डिफेंड कर रहे हैं….क्या है ये दोगलापन भाई?
मने अध्यात्म का चड्ढी से क्या संबंध?आध्यात्म तक पहूंचने में चड्ढी कौन सी बाधा पहूंचाती है? या सारा आध्यात्म उसी चड्ढी में घुसा होता है…वहीं से प्रस्फुटित होकर चारों दिशाओं में फैलता है? चड्ढी ना पहनेंगे तो प्रभु ना मिलेंगे?
अगर वो नहीं बर्दाश्त हो सकता तो किस मुंह से इन जैसी नंगो को पूजते हो? इनका विरोध नहीं करते? विरोध करने वालों को गरियातें हो?नंगई वाली साधू संतई करनी है तो जंगल नदी पहाड़ जाओ समाज में ये ऐसा नंगापा अच्छा नहीं लगता…महावीर स्वामी को जब ज्ञान प्राप्त हुआ तो उनके कपडे कब उतर गये उन्हें पता ही ना चला…ये लोग नंगे होकर आध्यात्म खोजने चले हैं…कसम से हमारे सामने कोई पड़ जाये तो पिछवाड़े में बांस डाल सारा आध्यात्म मुंह से निकाल दूँ।”
पोस्ट पर आये कुछ ऐसे कमेंट्स
इस पोस्ट पर लोगों ने जमकर कमेंट किये, जिसमें कुछ पक्ष में थे और कुछ विपक्ष में l आप भी पढ़ें इस पोस्ट पर आये कमेंट्स को lसत्या कर्ण की आईडी से हुआ एक और पोस्ट
जैन मुनि तरुण सागर पर ये कड़वा पोस्ट सोशल मीडिया पर बवाल मचाए हुए है, जहाँ लोग इस पर कमेंट के जरिए अपनी राय दे रहे हैं वही कुछ लोग इस पोस्ट को लिखने वाले सत्या कर्ण नाम के यूज़र पर अपना गुस्सा भी उतार रहे हैं l
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“जैन दिगम्बर तरुण सागर…वही जो आध्यात्म के उस चरम लेवल तक पहुँच चुके हैं कि सरम लिहाज सब मर चुकी ..कपड़े लत्ते की परवाह ही नहीं करते… क्या क्या दिख रहा है होस नहीं रहता…उन्ही के बारे में कल अपनी राय लिख दी तो बवाल हो रहा है…तर्क भी कैसे कैसे? शर्म निगाहों में होती है कपड़ों में नहीं…वाह वाह वाह वाह…सुनकर आँखें भर आई….वो साधारण पुरुष नहीं महापुरुष हैं…दो चम्मच पानी पीकर दो दिन काम चलातें हैं…जाड़ा गर्मी बरसात हर सीजन में बिना कपड़ों के ऐसे ही रहतें हैं…खाना भी बहुत सादा और कम खाते हैं…एक तपस्वी जीवन व्यतीत करतें हैं….इस भौतिक संसार की मोह माया से बहुत ऊपर उठ चुकें हैं…इस मारे उन्हें बीच समाज नंगे होकर घूमने की आजादी मिल जाती है…जो लोग आध्यात्म नहीं समझते वो इस बात को कभी नहीं समझ सकते…इरशाद इरशाद…समाज…एक ऐसी प्रणाली है जिसमे विभिन्न धर्म, समुदाय, वर्ग, आयु, लिंग,विचारधारा के लोग रहतें हैं…जिसमे औरतें बच्चे बच्चियां भी आतीं हैं..वो भी हर धर्म समुदाय की..गैर हिन्दू या जैन समुदाय की भी…भारत एक आजाद देश है और हम सब इसके आजाद नागरिक..लेकिन हमारी आजादी वहां से खत्म होती है जहाँ से अगले की नाक शुरू होती है….कोई अपनी आजादी को उस सीमा तक नहीं ले जा सकता जहाँ से दूसरों को असुविधा होनी शुरू हो जाये… आपके बच्चे आपकी बीवी, बहने ,मातायें आध्यात्मिक हो सकतीं हैं लेकिन सबकी नही… समाज के कुछ अनकहे नियम होतें हैं जिसे लोग चुपचाप फॉलो करते हैं…ये किसी को बताए नहीं जाते सब अपने आप समझतें हैं….समाज में रहने की वजह से…जैसे की छोटे बच्चों को नंग धड़ंग देखने की सबकी आदत है…कोई इसे बुरा नहीं समझता…ऐसे ही नँगे पुंगे घूमते बड़े अच्छे दिखतें हैं…लोग अपने छोटे लड़कों की नंगू पंगू फोटो खिंचाते हैं…उसे सहेजकर रखतें हैं और दूसरोँ को भी दिखाते हैं…फेसबुक पर भी अपलोड करते हैं…लेकिन वहीं छोटी बच्चियों की बिना कपडे वाली तस्वीर कोई नही खिंचाता… सार्वजनिक रूप से दिखाने की बात सोची भी नहीं जा सकती….जानतें हैं क्यों? क्योंकि ये समाज का एक अनकहा नियम है…जो किसी को बताया नहीं जाता …सब अपने आप समझते बूझतें हैं..सब जानतें हैं ऐसा करना बुरा लगता है। वहीं जब बच्चों की या लड़कों की ही उम्र बढ़ती हैं तो उनके लिंग के प्रकार में परिवर्तन होने लगता है…रंग बदल जाता है..बाल निकलने लगतें हैं…वो ऐसा नहीं रह जाता की सार्वजनिक रूप से यूं ही घूम सके…इस शारीरिक परिवर्तन की वजह से लोगों का नजरिया बदल जाता है देखने का…भले हम पांच साल की उम्र में नँगे क्यूट दिखते थे…पर अब नही दिखेंगे…अगर मैं फेसबुक जैसे सार्वजनिक मंच पर रोज अपनी नंगी फोटो अपलोड करने लगूं तो कितने मित्र खासकर महिला मित्र ऐसीं हैं जो मुझे अनफ्रेंड या ब्लॉक नहीं करेंगी? इसी तरह जब महिलायें उम्र के एक पड़ाव तक पहुँचती हैं तो उनके प्रति समाज का नजरिया बदल जाता है…वो खुलेआम उघाड़ स्तनों के साथ नहाती हैं…ना उन्हें फर्क पड़ता है ना औरों को….लेकिन नीचे फिर भी पहने रहतीं हैं..हम कहें की हमने आध्यात्म के उस चरम को छू लिया है आपके नजीरिये में खोट है तो कितने लोग इस बात को स्वीकार कर पायेंगे? हो सकता है कुछ हाई लेवल के लोगो को दिक्कत ना हो…पर 99% लोग असहज हो जायेंगे…ठीक वैसा ही हमारा समाज है…आप आध्यात्मिक हो…आपका नजरिया आध्यात्मिक है….लेकिन सबका नहीं…आपको फर्क नहीं पड़ता…लेकिन और लोगों को पड़ता है… सनद रहे समाज में हर धर्म के लोग होतें हैं और उस धर्म से अगल धर्म के महिलायें पुरुष और बच्चे भी… आप सोचिये की कोई मुस्लिम सूफी संत अल्लाह के नूर से बेहोश होकर सड़क पर नंग धड़ंग घूमे तो आपके घर की महिलाओं बच्चों पर कैसा असर पड़ेगा…क्या वो उसे भी उस नजीरिये से देख सकेंगी जिस नजरिये से तरुण सागर को देखतीं हैं?”
“उन लोगों का तो खतना भी हुआ रहता है ना? पता है ना खतने वाला लिंग कैसा दिखता है? ये भी जरूरी नहीं वो सूफी संत बुड्ढा ही हो…जवान भी हो सकता है…जरूरी नहीं मर्द ही हो औरत भी हो सकती है…किसी भी उम्र की…तब आपका नजरिया कंट्रोल रह पायेगा उस गैर धर्म की नंगी महिला के प्रति? अगर ऐसी महिलाओं की संख्या बढ़ जाये… जगह जगह घूमती दिखने लगे तब आपके घर की महिलाओं को दिक्कत नहीं होगी जब आप उन्हें देखकर मजे लोगे या लार चुआओगे? अगर आप के घर की महिला ऐसी बन जाये तो दूसरे धर्म के लोग भी इसे आध्यात्मिक नजरिये से देख सकेंगे? तब आपको दिक्कत होगी या नहीं? बर्दास्त कर पाओगे अपने घर की महिला के स्तन और नितंबों पर वो कामुक निगाहें? रोक सकोगे उस गन्दी नजर को?होगा बर्दाश्त? ये धर्म लिंग बदलने पर खुद के नजरिये को बदलने से रोक पाओगे? फिर ये दोगली बातें क्यों? कुछ लोग कह रहे हैं कि काली माता या फिर खजुराहों के मंदिरोँ में भी तो नग्न मूर्तियां हैं क्या वो भी तोड़ दी जायें? सनद रहे मूर्तियां चल फिर नहीं सकती…अचानक किसी चौराहे पर आपके सामने आकर नही खड़ी हो सकतीं…ये चॉइस आपकी है कि आप वहां जाकर या अपने बच्चों को ले जाकर उसे देखें या दिखाये…ऑप्शन है आपके पास…लेकिन जब ये नागा सन्यासी अचानक किसी पांच साल के बच्चे के सामने आ टपकते होंगे तब उस पर क्या प्रभाव पड़ता है? वो नागा साधू आध्यात्मिक है पर जरूरी तो नहीं आपका बच्चा भी आध्यात्मिक हो? लोग कह रहे हैं किसी को दिक्कत नहीं होती तब आपको क्या आपत्ति है? कौन गैरंटी लेता है इस बात की किसी को दिक्कत नहीं? जरूरी है इन नँगे बाबाओं और उनके हजारों भक्तो के सामने किसी की हैसियत हो आपत्ति जता सकने की होने के बावजूद भी? भावनाओं के आधार पर इस दोगलेपन का जस्टिफिकेशन हमसे तो ना बर्दास्त हो पायेगा…भले पूरी दुनिया करती रहे…भले सब हमको गरियातें रहें…जमीर में ये दोगलापन हम नही ला सकते…हमसे ना हो पायेगा l”
इस पोस्ट पर कमेंट्स के जरिए लोगों ने यूज़र को गाली भी देना शुरू कर दिया, और तरह-तरह के ज्ञान देना शुरू कर दिए l लोगों ने इस यूजर को इतना तक कह दिया की ज्यादा ज्ञानी ना बनो..! आप भी पढ़िए कमेंट्स…

कुछ और कमेंट्स जिनसे लोगों ने अपना गुस्सा निकला…

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