| राजा दाहिर |
उन्होंने पुष्करणा हिन्दू ब्राह्मण राजा को बदनाम करने के लिए अपनी ही बहन से विवाह करने के मनगढंत किस्से लिखने शुरू किये . अब अगर कोई हिन्दू धर्म को समझता है तो वो समझ सकता है कि अपनी ही बहन से विवाह करना हिन्दू धर्म की नही दुसरे धर्मों की प्रथा है . और ये मुस्लिम इतिहासकारों का सफेद झूठ था उनको आने वाले समय में बदनाम करने के लिए .
उन इतिहासकारों ने एक और झूठ फैलाया कि ये महान हिन्दू राजा हर रात को एक नवयौवना (कुंवारी लड़की) का बलात्कार करता था . और 32 साल तक राजधर्म का पालन करने वाले राजा के बारे में ये भी महज़ एक झूठ था .
हिन्दू इतिहास पर गौर किया जाए तो पुण्य सलिला सिंध भूमि वैदिक काल से ही वीरों की भूमि रही है . वेदों की ऋचाओं की रचना इस पवित्र भूमि पर बहने वाली सिंधु नदी के किनारों पर हुई .
| राजा दाहिर अपनी फौज के साथ |
मगर राजा दाहिर ने सभी समाजों को अपने साथ लेकर चलने का संकल्प लिया . आगे चलकर महाराजा दाहिर ने सिंध का राजधर्म सनातन हिन्दू धर्म को घोषित कर ब्राह्मण समाज की भी नाराजगी दूर कर दूरदर्शिता का परिचय दिया . दाहिर की पत्नी ने कई दूसरी औरतों के साथ जौहर ( गुप्तांग जलाने के लिए ) कर लिया ताकि कोई भी अरबी उनके मृत शरीर से भी बलात्कार न कर सके .
पाकिस्तानी मुस्लिम सिंधी को भी राजा दाहिर के बारे में मालुम होना चाहिए और शुक्रगुजार भी होना चाहिए कि उन्होंने पैगम्बर मोहम्मद के भागे हुए परिवार को खतरनाक उमायादों से बचाते हुए अपने पास रहने को जगह दी . राजा दाहिर ने अपने महल में इमाम हुसैन के अनुयायी मुहम्मद बिन अल्लाफी को रहने की जगह दी . उस समय अल्लाफी को उमायाद जान से मार देने के लिए तलाश रहे थे क्योंकि अल्लाफी अहल-ए-बैत (पैगम्बर मोहम्मद का सीधा खून) का आखिरी वंशज था . यही नही राजा दाहिर ने पैगम्बर मोहम्मद के पौते हुसैन को भी शरण देने की पेशकश की थी . मगर जब हुसैन शरण के लिए बढ़ रहा था , उसे कर्बला इराक में बंदी बना लिया गया और बाद में कड़ी यातनाएं देते हुए मार दिया गया .
अंत में उनकी ही बेटियों ने पहले सूझ बुझ और अक्लमंदी से खलीफा के हाथों मुहम्मद बिन कासिम को मरवा कर अपना बदला लिया और बाद में खुद को खलीफा से बचाते हुए एक दुसरे को ही मार दिया . राजा और उनकी बेटियों के बलिदानों से प्रेरित होकर ही सिंधी लेखक ने यह पंक्तियां लिखी हैं- “ हीउ मुहिजो वतन मुहिजो वतन मुहिजो वतन, माखीअ खां मिठिड़ो, मिसरीअ खां मिठिड़ो, संसार जे सभिनी देशनि खां सुठेरो। कुर्बान तंहि वतन तां कयां पहिंजो तन बदन, हीउ मुंहिजो वतन मुहिजों वतन मुहिजो वतन । “
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