60 के दशक में देव आनन्द की फिल्म "असली नकली"का एक गीत "लाख छुपाओ, छुप न सकेगा,, राज ये इतना गहरा" आज भी चर्चित है। जिसे कांग्रेस प्रवक्ता मीम अफ़ज़ल ने चरितार्थ कर दिया। कांग्रेस नेता मीम अफजल ने ऐसा खतरनाक बयान दे दिया है जिसकी वजह से पूरे देश में उनकी आलोचना हो रही है साथ ही लोग यह भी कह रहे हैं कि हम कितना भी कहें कि आतंकवादी को कोई धर्म नहीं होता लेकिन कांग्रेस नेता मीम अफजल की बातों से लग रहा है कि आतंकवादियों का एक धर्म होता है।
आतंकवाद का धर्म नही मजहब होता है
सोनिया गाँधी बटला हाउस एनकाउंटर में मारे गए आतंकवादियों पर आंसू बहाती हैं, दिग्विजय "श्री ओसामा जी" कहते हैं। यदा-कदा कांग्रेस के अन्य नेता भी कुछ न कुछ बता कर जनता का ज्ञान बढ़ाते रहते हैं। लेकिन जनाब मीम साहब ने तो सिद्ध ही कर दिया कि आतंकवाद का मजहब यानि इस्लाम होता है। समस्त आतंकवाद विरोधियों को आतंकवादियों का धर्म नहीं मजहब बताने के लिए मीम साहेब का शुक्रिया अदा करना चाहिए। मीम साहेब की अपनी निजी राय हो सकती है, लेकिन राय देने से ही कोई निष्कर्ष निकलता है।
बात दरअसल यह थी कि जी न्यूज के 'ताल ठोंक के' प्रोग्राम में आतंकियों के अंतिम सस्कार पर बहस चल रही थी, मुद्दा यह था कि आतंकी को दफनाना चाहिए या उन्हें कचरे के साथ जला देना चाहिए ताकि उन्हें जन्नत नसीब ना हो, ज्यादातर लोगों की राय थी कि आतंकियों की लाश को जला देना चाहिए, मीम अफजल उस वक्त पैनल में मौजूद नहीं थे इसके बावजूद भी उन्होंने फोन पर अपनी राय रखी।
उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर चर्चा का विषय है, इसपर जल्दबाजी से फैसला होने पर देशवासियों की भावनाएं आहत हो सकती हैं, उन्होंने कहा कि इस्लाम में माना जाता है कि आदमी को दफनाने के बाद पापी के भी पाप ख़त्म हो जाते हैं और उन्हें जन्नत नसीब होती है, मीम अफजल का मतलब यह था कि आतंकवादी अगर किसी की जान लेता है तो उसे पाप मिलता है, उसे पाप की सजा भी देनी चाहिए लेकिन उसके पाप को ख़त्म करने और उसे जन्नत में भेजने के लिए उसे दफनाना जरूरी है, भले ही वह आतंकी है।
उनका कहना था कि अगर आतंकियों को जला दिया गया तो इससे इस्लाम के साथ साथ भारत के मुस्लिमों की भी भावनाएं आहत हो सकती हैं।
मीम साहेब जो आतंकवादी बेगुनाहों को मार किसी पत्नी से उसका पति, किसी माँ-बाप की आंख का तारा, बच्चों के सिर से बाप का साया, भाई/बहन से उनका भाई छीन रहा हो, उसके साथ किस बात की हमदर्दी? बल्कि ऐसे ज़ालिमों को अग्नि के सुपुर्द करना अग्नि देवता का अपमान है। ऐसे दरिंदो को तो अग्नि के सुपुर्द करने की बजाए चील, कौए और गिदों के आगे डाल देना चाहिए।
इसी पैनेल में पाकिस्तान के मशहूर विद्वान् तारिक फ़तेह ने बताया कि इस्लाम की आड़ में आतंक फैलाने वालों को जन्नत और हूरें मिलने की बात कह कर बरगलाया जाता है, इसलिए वो रास्ता ही बंद कर देना चाहिए, ऐसे आतंकवादियों को जला दिया जाना चाहिए, तारिक फ़तेह तो इससे भी एक कदम आगे जा कर इज़रायल की सोच पर चलने की सलाह दी, जहां आतंकवादियों के शवों पर सुअर की चर्बी का तेल डाल कर आग लगाई जाती है।
बीजेपी सांसद साक्षी महाराज को लगता है कि आतंकवादियों के शवों को चौराहे पर जला दिया जाना चाहिए।
अगर कांग्रेस नेता के अनुसार आतंकवादियों को जलाने से एक धर्म के लोगों की भावनाएं आहात होंगी तो हमारा देश आतंक के साथ कैसे लड़ पाएगा, अगर आतंकी दफनायें जाएंगे, उनकी मौत पर फतीह पढ़ा जाएगा, अगर उनकी कब्र पर लोग जाकर फूल चढ़ाएंगे यही नही हमारे देश के लोगों को मारने वाले आतंकियों की हमारे देश में कब्र बनायी जाएगी, उन्हें जमीन दी जाएगी तो हम आतंकवाद से कैसे लड़ पाएंगे। हमें पाकिस्तान से भी अधिक हमारे देश के कुछ लोगों से ज्यादा खतरा है।
जब 1965 में इंडो-पाक लड़ाई में मुस्लिम क्षेत्र में ब्लैकआउट के समय टॉर्च से रौशनी की जाती थी। ऐसी कोई बात नहीं। देश तब भी इन जैसों से निपटा था अब भी निपटेगा। पुलिस बहुत साहसी और शक्तिशाली है।

Comments