कश्मीर में अलगाववादियों पर कार्रवाई
आपको बता दें कि अलगाववादियों और कुछ आतंकी संगठनों में भी कई मुद्दों पर मतभेद है। इस कारण कुछ अलगाववादियों को सुरक्षा दी गई है। इसकी वापसी के संबंध में भी राजनीतिक स्तर पर फैसला लिया जा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक अलगाववादियों पर केंद्र और रियासत की ओर से हर साल लगभग 100 करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं। यह खर्च केंद्र और रियासत सरकार द्वारा उठाया जाता रहा है। दरअसल कश्मीर में शांति प्रयासों के तहत केंद्र सरकार ने अलगाववादियों को अलग-थलग करने की रणनीति बनाई है। इसके तहत कश्मीर के सिविल सोसाइटी और प्रमुख सियासी दलों से सर्वदलीय समिति बातचीत करेगी।
इसमें उदारवादी अलगाववादियों को तभी शामिल किया जाएगा जब वे जम्हूरियत, इंसानियत और कश्मीरियत के अटल सिद्धांत पर विश्वास रखते हैं। इसी सिद्धांत पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने अलगाववादियों से बातचीत शुरू की थी। गिलानी को संविधान के दायरे में बातचीत मंजूर नहीं है।
वहीं अब मोदी सरकार ने गिलानी को तरजीह नहीं देने की रणनीति पर काम शुरू किया है। इसके तहत गिलानी के बेटे से पूछताछ की तैयारी है। एनआईए ने अलगाववादियों के गिलानी गुट के मोहम्मद अशरफ सेहरई और पीर सैफुल्लाह से पूछताछ की है।
पहले चरण में छह और लोगों से पूछताछ होगी। केंद्र अलगाववादियों को चारों ओर से घेरकर विवश करने की रणनीति पर चल रहा है। इसके तहत विदेशी फंडिंग पर ब्रेक लगाकार मुकदमे चलाए जाएंगे और देश के अंदर मिलने वाली सुविधाएं भी बंद कर दी जाएंगी।

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