बीते कई दिनों से सरकार ने कई चीज़ों को बैन कर दिया. कभी मैगी बैन, तो कभी पोर्न बैन, कभी फ़िल्में बैन, तो कभी किताबों पर लगाम लगाई जाती है. लेकिन इन सब के अलावा अगर मैं आपसे कहूं कि भारत में भारतीय भी बैन हैं, तो आप यकीन नहीं करेंगे! लेकिन ये सच है दोस्त, भारत की इन 5 जगहों पर भारतीयों का जाना भी बैन है.
2. Free Kasol
1. Uno-In-Hotel, Bangalore
आईटी सेक्टर का तो बैंग्लोर गढ़ है. लेकिन अगर आप इंडियन हैं जनाब, तो इस होटल में कमरा मिलने वाला नहीं. ये होटल सिर्फ़ जपानियों के लिए है. ये होटल 2012 में निपोन इंफ्रास्कच्टर द्वारा बनवाया गया था. लेकिन 2014 में कुछ हादसे हो जाने पर इन्होंने इंडियंस् को आने से मना कर दिया.
हिमाचल के कसौल में एक रेस्तरां में भारतीयों के आने पर मनाही है. अगर आप इंडियन हैं तो इस रेस्तरां में आपको खाना नहीं मिलने वाला क्योंकि यहां पासपोर्ट देखने के बाद एंट्री मिलती है.
3. गोवा का एक समुद्री किनारा सिर्फ़ विदेशियों के लिए
जी हां, जिस गोवा में आप अपने दोस्तों के साथ छुट्टियां मनाने जाते हैं, वहां एक समुद्री किनारा ऐसा भी है जहां सिर्फ़ विदेशी सैलानी ही जा सकते हैं. आपका जाना यहां वर्जित है.
चेन्नई में एक क्षेत्रिय राजा की रियासत को एक छोटे से होटल में तब्दील कर दिया गया है. ये Triplicane के पास स्थित है. एक रिपोर्ट के अनुसार पहले इसका नाम Highlands था बाद में Broadlands कर दिया गया. यहां लोगों का पासपोर्ट देखने के बाद ही एंट्री मिलती है.
5. पुड्डूचेरी का Beach
गोवा के बाद पुड्डूचेरी का भी एक Beach है जहां सिर्फ़ विदेशी लोग ही जा सकते हैं. भारतीयों को यहां आना एक तरह से बैन है.
भारतीयों का अपने की देश में इतना बड़ा अपमान
देखा आपने! अपने ही देश में कई जगहों पर हम जा नहीं सकते. ये होता है भेदभाव. लेकिन एक बात ये भी है कि हम भारतीयों की छवि कुछ भारतीयों ने ही विदेशियों के समक्ष खराब बना दी है. जिसमें सुधार करने के लिए हम सबको थोड़ा ऊपर उठना होगा.आज एक न्यूज़ पोर्टल पर इस समाचार को पढ़ कर हैरान हो गया, कि हमारे ही नेता अपने ही देश में हम भारतीयों की कितनी ज़बर्दस्त बेइज़्ज़ती कर रहे हैं? और चैन्नई के एक होटल में ये क्या बकवास
लिखी है। क्या है ? क्या इन तथ्यों की जाँच संभव है? देश के बुद्धिजीवी पत्रकार और छद्दम धर्म-निरपेक्ष नेता कहाँ है?
ऐसे क्या कारण हैं कि भारतीयों का इन जगहों पर जाना वर्जित है? क्यों अपने ही देश में भारतवासी बेगाने या वर्जित हैं? जब हम किसी भी विदेशी धरती पर कदम रखते हैं, जहाज से बाहर आते ही वहां के कानून पालन करना प्रारम्भ कर देते हैं, जबकि भारत में हमेशा कानून को अनदेखा करते रहते हैं। कौन है ज़िम्मेदार: जनता या फिर नेताओं की तुष्टिकरण नीति?
भारत में जब कलकत्ता हाई कोर्ट ने अपने एक ऐतिहासिक निर्णय में कहा: "...either remove these ayats, or face ban on Koran ..." तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने तुरन्त संसद के माध्यम से कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्णय को निरस्त कर दिया था, शाहबानो केस निर्णय को संसद निरस्त कर सकती है, लेकिन आज तक किसी भी भारतीय नेता ने अरब देश में स्वामी दयानन्द रचित "सत्यार्थ प्रकाश" पर लगे प्रतिबन्ध को निरस्त करवाने में पूर्ण रूप से असफल हैं।
बात 1986 की है, जब मेरे ही एक ज्येष्ठ भाई जद्दा गए थे, लेकिन लगभग एक ही वर्ष में किसी बहाने से नौकरी छोड़ भारत वापस आ गए। जहाँ न ॐ, किसी हिन्दू भगवान का नाम तक नहीं ले सकते, कोई अपना त्यौहार भी नहीं मना सकते। दिवाली भी मनाई पाकिस्तानी मुसलमानो के कारण। एक पाकिस्तानी जिस को ड्राइंग आती थी,उस महानुभाव ने एक कागज पर गणेश-लक्ष्मी का चित्र बनाकर चुपचाप पूजा करने को कहकर, बाहर पुलिस को देखते रहे। अचानक पुलिस की रेड पड़ते ही उन पाकिस्तानियों ने अपने इस्लाम का गुणगान करना शुरू कर पुलिस को भ्रमित कर दिया। मेरे इस समाचार को केवल आर्गेनाइजर साप्ताहिक ने प्रमुखता के साथ आधे पृष्ठ पर प्रकाशित किया था। जिसका आज तक किसी ने खंडन तक नहीं किया।
आज भारत में कितने बार, बार-डांस रेस्टोरेंट्स हैं, क्या वहाँ भारतीयों का जाना वर्जित है? यदि नहीं, फिर इन स्थानों पर क्यों पाबन्दी है? यह देश कब तक दो सिद्धान्तों पर चलता रहेगा?
बात 1986 की है, जब मेरे ही एक ज्येष्ठ भाई जद्दा गए थे, लेकिन लगभग एक ही वर्ष में किसी बहाने से नौकरी छोड़ भारत वापस आ गए। जहाँ न ॐ, किसी हिन्दू भगवान का नाम तक नहीं ले सकते, कोई अपना त्यौहार भी नहीं मना सकते। दिवाली भी मनाई पाकिस्तानी मुसलमानो के कारण। एक पाकिस्तानी जिस को ड्राइंग आती थी,उस महानुभाव ने एक कागज पर गणेश-लक्ष्मी का चित्र बनाकर चुपचाप पूजा करने को कहकर, बाहर पुलिस को देखते रहे। अचानक पुलिस की रेड पड़ते ही उन पाकिस्तानियों ने अपने इस्लाम का गुणगान करना शुरू कर पुलिस को भ्रमित कर दिया। मेरे इस समाचार को केवल आर्गेनाइजर साप्ताहिक ने प्रमुखता के साथ आधे पृष्ठ पर प्रकाशित किया था। जिसका आज तक किसी ने खंडन तक नहीं किया।
आज भारत में कितने बार, बार-डांस रेस्टोरेंट्स हैं, क्या वहाँ भारतीयों का जाना वर्जित है? यदि नहीं, फिर इन स्थानों पर क्यों पाबन्दी है? यह देश कब तक दो सिद्धान्तों पर चलता रहेगा?
Comments