जम्मू एवं कश्मीर में प्रदर्शनकारियों की भीड़ से निपटने के लिए सरकार द्वारा नियुक्त विशेषज्ञों की समिति ने पैलेट की जगह मिर्च से भरी छोटी गोलियों यानी PAVA के इस्तेमाल की सिफारिश की है। प्रकृति में पाए जाने वाले मिर्च में यह रसायन होता है, जो जलन पैदा करता है। इन गनों में पेलारगोनिक एसिड वैनिलाइल अमाइड या PAVA इस्तेमाल किया जाता है जो मिर्च में पाया जाने वाला एक यौगिक है। दंगा नियंत्रण के लिए कई देशों में इसका इस्तेमाल पेपर शॉट्स के रूप में होता है।
बंदूक से निकलने के बाद PAVA बाहर फूट जाता है और जलन पैदा करने वाला यौगिक बाहर निकालता है। इसका इस्तेमाल 150 फुट की दूरी से किया जा सकता है। पैलेट की तरह चिली पेपर बॉल चमड़ी को नहीं भेदता है, जिसके कारण यह कम खतरनाक है। हालाँकि जब पत्थरबाजों पर यह योगिक गिरेगा तो उन्हें खुजली शुरू हो जाएगी, अगर आँखों में चला गया तो आँखों में तेज जलन मचेगी, इस जलन की वजह से पत्थरबाज पत्थर फेंककर ऑंखें खुजलाने लगेगा। आँखों में पड़ने के बाद इसका असर कई दिनों तक रहेगा, मलतब अब पत्थरबाजों की ऑंखें नहीं फूटेंगी बल्कि दो चार दिन के लिए वे घर बैठ जाएंगे।
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने अगस्त 25 को श्रीनगर में घोषणा की कि समिति ने पहले ही अपनी रिपोर्ट सौंप दी है और कश्मीर में पैलेट गन के विकल्प पर फैसला कुछ ही दिनों में ले लिया जाएगा।
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