डीजीपी भी करते हैं गलतबयानी
हाईवे गैंगरेप खुलासे की तरफ पूरे देश की निगाह है। मुख्यमंत्री की मानीटरिंग के चलते यूपी पुलिस पर जल्दी खुलासे का भारी दबाव है। पुलिस ने रविवार को तीन आरोपियों को पकड़ने का दावा किया। खुद डीजीपी जावीद अहमद ने प्रेस कांफ्रेंस में अधूरा खुलासा करते हुए दावा किया कि तीनों आरोपियों की पहचान पीड़िता मां-बेटी ने कर लिया है। डीजीपी ने गैंगरेप की पूरी कहानी बताई। किस तरह से आरोपियों ने कार पर लोहे का एक्सल फेंका। कार रुकते ही कैसे परिवार को बंधक बनाया और फिर गैंगरेप की घटना अंजाम दी। मगर इन तीन में से सिर्फ एक आरोपी को ही पुलिस कोर्ट में पेश करने की हिम्मत जुटा पाई। सवाल उठता है कि अन्य दो आरोपियों को कोर्ट में क्यों नहीं पेश किया गया। उस समय डीजीपी ने रईस निवासी सुतारी बुलंदशहर, बबलू निवासी फरीदाबाद और नरेश निवासी बठिंडा की गिरफ्तारी दिखाई थी। ्क्या अन्य दो आरोपी सिर्फ सीएम का गुस्सा ठंडा करने के लिए फर्जी ढंग से गिरफ्तार किए गए थे।
बाद में दो आरोपियों की जगह दूसरे पकड़े गए
जब दोपहर करीब ढाई बजे फास्ट ट्रैक कोर्ट में पुलिस आरोपियों को पेशी पर लाई तो उसमें बबलू और नरेश गायब रहे। उनके स्थान पर रईस के साथ हापुड़ के दहपा के शावेज और रबूपुरा निवासी जबर सिंह शामिल रहे। डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने आरोपियों के नाम बदले जाने पर कुछ भी कहने से इन्कार किया।
तेरहवी में जाते समय परिवार के साथ हुई घटना
नोएडा से एक परिवार हाईवे के जरिए शाहजहांपुर घर में तेरहवीं में शामिल होने जा रहा था।शुक्रवार देर रात राजमार्ग 91 पर बिजनौर के दोस्तपुर गांव के पास आधे दर्जन से अधिक बदमाशों ने कार पर लोहे का एक्सल फेंककर रोक लिया। फिर परिवार को खेत में ले जाकर बंधक बनाया और मां-बेटी के सामूहिक दुष्कर्म किया।
Comments