जब मोदी सरकार की तरफ से जीतेन्द्र सिंह बोलने के लिए खड़े हुए तो उन्होंने कांग्रेस नेता को फटकार लगाते हुए कहा कि आप बार बार कहते हो कि बीजेपी के आने के बाद कश्मीर में ग़दर होने लगी, क्या आपके राज में कश्मीर में हिंसा, आन्दोलन और पत्थरबाजी नहीं होती थी, 2008 और 2010 में भी कश्मीर में आन्दोलन हुआ था, 2010 में 100 लोग मारे गए थे, 2010 में भी पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया था, उस समय आप भी सरकार में थे, हमें तो नहीं कहा कि कांग्रेस के कदम पड़ते ही कश्मीर में ग़दर शुरू हो गया था।
उन्होंने कहा कि कश्मीर में पिछले डेढ़ साल से बीजेपी और पीडीपी गठ्बंधक की सरकार है, 8 जुलाई को आतंकी बुरहान वानी की मौत हुई उसके बाद आन्दोलन शुरू हो गया, पिछले डेढ़ वर्ष में तो सब कुछ सही था, क्या हमने एक ही दिन में दंगा कर दिया।
उन्होंने जिहादी अलगाववादियों को ललकारते हुए कहा कि जिहाद के नाम पर आज कश्मीर में पांच साल, दस साल और 15 साल के बच्चों के हाथों में पत्थर थमाया जा रहा है, अगर जिहाद इतना ही महान है तो ये अलगाववादी अपने बच्चों को आगे क्यों नहीं करते, अपने बच्चों को तो ये लोग बड़े बड़े शहरों में पढने के लिए भेज देते हैं लेकिन कश्मीर के गरीब बच्चों को जिहादी बना दिया जाता है, उन्हें बंदूकों के आगे कर दिया जाता है।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि अगर जिहाद इतना ही पवित्र है कि यहां से सीधा जन्नत जाने का मौका मिलता है तो अपने बच्चों से जिहाद क्यों नहीं करवाते हैं अलगाववादी नेता। ये अपने बच्चों को जिहाद से दूर क्यों रखते हैं। उन्होने कहा कि ये अपने बच्चों को भारत के बड़े शहरों और विदेशों में आराम से रखते हैं। और घाटी के बच्चों को जिहाद के लिए भड़काते हैं।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि कश्मीर में जिन युवाओं को भड़काया जाता है वो समाज के गरीब और पिछड़े तबकों से आते हैं। इन युवाओं को भड़का कर अलगाववादी अपना उल्लू सीधा करते हैं। उन्हे किसी की परवाह नहीं है। वो बस अपनी सियासत कर रहे हैं। गरीबों और मासूमों के खून पर सियासत बंद होनी चाहिए। जितेंद्र सिंह ने सभी सियासी दलों से अपील करते हुए कहा कि कश्मीर के मुद्दे पर सभी को आगे आना होगा।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि जम्मू और कश्मीर अनोखा है। अनोखा इसलिए है क्योंकि वहां का अपना संविधान है। उसी संविधान में लिखा है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। उसे तोड़ने और वहां आतंक का माहौल हम नहीं बनने दे सकते हैं। जितेंद्र सिंह ने कहा कि घाटी की स्थित के लिए सभी परेशान हैं। वहां के युवाओं को भारत के विकास में हिस्सेदार बनाना होगा। देश तरक्की कर रहा है। उस तरक्की का फायदा घाटी के युवाओं को भी मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आप लोग आल पार्टी मीटिंग बुलाने की मांग करते हैं, सवाल तो आपका बढ़िया है लेकिन जब गृह मंत्री राजनाथ सिंह श्रीनगर जाकर दो दिन रुकते हैं और कांग्रेस पार्टी को बातचीत करने के लिए बुलाते हैं तो बार बार बुलाने पर भी कांग्रेस के नेता राजनाथ सिंह से नहीं मिलते और यहाँ दिल्ली में बड़ी बड़ी बातें करते हैं।
उन्होंने कहा कि अब प्रश्न उठता है कि बात करें, आखिर हम किससे बात करें, क्या हुर्रियत से बात करें, कश्मीर को कौन रिप्रजेंट करता है, हुर्रियत वाले करते हैं या कश्मीर की सरकार करती है, हम हुर्रियत से क्यों बात करें।
उन्होंने कहा कि अब सवाल उठता है स्टाकहोल्डर का, यहाँ पर हम कश्मीरी पंडितों को भूल जाते हैं, कश्मीरी पंडितों के बिना कश्मीरियत की चर्चा कैसे हो सकती है, आज कश्मीरियत, जम्हूरियत, फलानियत और ढमाकियत की चर्चा सभी लोग करते हैं लेकिन कश्मीरी पंडितों की चर्चा कोई नहीं करता, स्टाकहोल्डर कश्मीरी भी हैं, कश्मीरी पंडित भी हैं, सिख भी हैं, लद्दाखी भी हैं, सभी लोग हैं, हम इन्हें कैसे भूल जाते हैं।
देखें वीडियो
मन्हास ने कहा कि जैसा कि उच्च सदन घाटी में हिंसक उपद्रव के बीच हालात पर चर्चा कर रहा है, “जम्मू एवं कश्मीर केवल कश्मीर नहीं है। यह राज्य जम्मू, कश्मीर और लद्दाख से मिलकर बना है।” सुरक्षा बलों के हाथों एक विद्रोही कमांडर के मारे जाने के बाद से घाटी में शुरू हुए हिंसक उपद्रव के दौरान 55 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और हजारों लोग घायल हुए हैं।
मन्हास ने कहा कि जम्मू की पाकिस्तान के साथ 500 किलोमीटर लंबी सीमा है और समस्याएं उसके हिस्से में भी हैं।
भाजपा सांसद ने कहा, “जम्मू इलाके में राज्य की 55 प्रतिशत आबादी निवास करती है। कुछ सात लाख शिक्षित युवक रोजगार प्राप्त हैं। वे भी बंदूक उठा सकते थे। वे भी आजादी की मांग कर सकते थे।”
उन्होंने आगे कहा, “जम्मू के लोगों ने हमेशा लोकतंत्र में विश्वास किया है।” लेकिन कश्मीर घाटी में, “राष्ट्रवाद और अलगाववाद के बीच लड़ाई चल रही है।” उन्होंने कहा, “कश्मीर घाटी में लोग अलगाववादियों के आदेश का पालन करते हैं।”
राज्य सभा में कांग्रेस और उसके समर्थक कुछ दलों और उनके नेताओं को भाजपा--एक सांसद से लेकर मंत्री तक-- सभी ने धो दिया। कांग्रेस और उसकी समर्थक पार्टियों को सैनिक कार्यवाही में मर एवं ज़ख़्मी होते वोट-बैंक की चिन्ता थी, न की इतने वर्षों से पसरी जमाये बैठे अलगाववादियों की करतूतों से मरते सेना एवं अन्य सुरक्षा कर्मियों के मारे जाने की।
पाकिस्तान के टुकड़ों पर पल रहे अलगाववादियों ने अपने परिवार को क्यों कश्मीर से बाहर रखें हुए हैं?किसी भी अलगाववादी का परिवार कश्मीर में नहीं रहता, कोई जम्मू, हैदराबाद,बैंगलोर,दिल्ली या किसी अन्य सुरक्षित स्थानों पर निवास कर रहे हैं। वास्तव में अगर जिहाद जन्नत में पहुंचाता है तो अपने परिवार को क्यों जहन्नुम में जाने के लिए कश्मीर से बाहर रखे हुए हो?
कश्मीर में कर्फ्यू के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल से उपद्रवियों के घायल होने पर उनसे हमदर्दी रखने वालों पर सीआरपीएफ के डायरेक्टर जनरल के दुर्गा प्रसाद ने पर करारा निशाना साधा है। कहा है कि लोग पैलेट गन से घायल उपद्रवियों के मानवाधिकारों की दुहाई दे रहे हैं मगर, वे जवान मानवाधिकार का रोना रोने कहां जाएं, जिनके कैंप पर गोला-बारूद फेंका जा रहा है। जो जवान शहीद हो रहे हैं, क्या उनके मानवाधिकार नहीं हैं।
क्या सर्वदलीय कश्मीरी अलगाववादियों से सैनिकों पर पत्थर फैंकना बंद करने के लिए बोलेंगे ?क्या पाकिस्तान ज़िन्दाबाद के नारे लगाना बन्द करेंगे? क्या अलगाववादी पाकिस्तानी झंडा फहराना बन्द करेंगे? क्या अलगाववादी भारत विरोधी नारे लगाने और लगवाने बन्द करेंगे? क्या कश्मीरी आतंकवादियों को संरक्षण देना बन्द करेंगे? सेना केवल तुम्ही को निशाना क्यों बनाती है? देश के और दूसरे राज्योँ में भी सीमा पर सेना तैनात है वहाँ सेना भारतीयों को निशाना क्यों नहीं बनाती? केवल कश्मीरियों पर ही क्यों गोली चलाती है ?आदि आदि अनेकों प्रश्न हैं जिनका सर्वदलीय को कश्मीरियों से पूछने होंगे। बीवी-बच्चे किस कोर्ट में जाएं।
Comments