केंद्र व दिल्ली सरकार के बीच राष्ट्रीय राजधानी के अधिकार को लेकर चल रही लड़ाई पर दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को अहम फैसला सुनाया। केजरीवाल सरकार को बड़ा झटका देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि उपराज्यपाल ही दिल्ली के प्रशासनिक प्रमुख हैं और दिल्ली के हर फैसले करने का अधिकार उपराज्यपाल (एलजी) के पास ही है। दिल्ली हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी है कि उपराज्यपाल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के प्रशासनिक प्रमुख हैं।
इस मामले पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि उपराज्यपाल के पास ही सभी संवैधानिक अधिकार हैं। दिल्ली से जुड़े हर फैसले करने का अधिकार एलजी के पास है। एलजी की अनुमति से ही दिल्ली सरकार फैसला ले सकती है। इसलिए एलजी का हर फैसला दिल्ली सरकार माने। हाईकोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार केवल स्पेशल पब्लिक प्रोजीक्यूटर नियुक्त कर सकती है। हाईकोर्ट ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार की इस दलील में कोई दम नहीं है कि उपराज्यपाल मंत्रियों की परिषद की सलाह पर काम करने के लिए बाध्य हैं। इस दलील को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। उच्च न्यायालय ने कहा कि एसीबी को केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई से रोकने की केंद्र की 21 मई 2015 की अधिसूचना न तो अवैध है और न ही अस्थायी। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सेवा मामले दिल्ली विधानसभा के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं और उपराज्यपाल जिन शक्तियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, वे असंवैधानिक नहीं हैं।
इस मामले पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि उपराज्यपाल के पास ही सभी संवैधानिक अधिकार हैं। दिल्ली से जुड़े हर फैसले करने का अधिकार एलजी के पास है। एलजी की अनुमति से ही दिल्ली सरकार फैसला ले सकती है। इसलिए एलजी का हर फैसला दिल्ली सरकार माने। हाईकोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार केवल स्पेशल पब्लिक प्रोजीक्यूटर नियुक्त कर सकती है। हाईकोर्ट ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार की इस दलील में कोई दम नहीं है कि उपराज्यपाल मंत्रियों की परिषद की सलाह पर काम करने के लिए बाध्य हैं। इस दलील को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। उच्च न्यायालय ने कहा कि एसीबी को केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई से रोकने की केंद्र की 21 मई 2015 की अधिसूचना न तो अवैध है और न ही अस्थायी। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सेवा मामले दिल्ली विधानसभा के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं और उपराज्यपाल जिन शक्तियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, वे असंवैधानिक नहीं हैं।
हाईकोर्ट को आज यह तय करना था कि दिल्ली पर किसका कितना अधिकार है। क्या दिल्ली को लेकर जारी केंद्र सरकार की अधिसूचना सही थी या नहीं, या क्या दिल्ली सरकार बिना उपराज्यपाल की अनुमति के फैसले ले सकती है? या फिर क्या उपराज्यपाल को दिल्ली सरकार के फैसले को मानना ज़रूरी होगा? इस फैसले के बाद अब सब साफ हो गया है कि दिल्ली के सर्वेसर्वा उपराज्यपाल ही होंगे। साथ ही, उपराज्यपाल की मंजूरी के बिना जारी की गई सभी अधिसूचनाओं को भी हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। उपराज्यपाल की अनुमति लिए बिना किए गए सभी फैसले अवैध हैं।
दिल्ली हाईकोकर्ट ने कहा है कि दिल्ली सरकार के पास आयोग बनाने का अधिकार नहीं है। इसके साथ ही नौ अलग-अलग याचिकाओं में भी दिल्ली के केजरीवाल सरकार को झटका लगा है। दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच अधिकारों की लड़ाई को लेकर दायर 9 अलग-अलग याचिकाओं और अर्जियों पर आदालत ने फैसला सुनाया है। जिसमें एसीबी पर अधिकार, उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के अधिकार, दिल्ली सरकार के अधिकार, दिल्ली पर केंद्र का अधिकार जैसे अहम मुद्दों पर कानूनी रुख साफ़ हो गया है।
गौर हो कि बीते समय में कई मामलों पर केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच टकराव की खबरें सुर्खियों में रही हैं। पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं होने की वजह से दिल्ली में पुलिस और जमीन से जुड़े सभी मामले केंद्र सरकार के अधीन आते हैं। केंद्र सरकार के अधीन आने वाले सभी विभागों के अधिकार उपराज्यपाल के पास होते हैं।
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