राजनाथ ने कहा कि सदन में आज हुई बहस स्वस्थ लोकतंत्र का एक अच्छा उदाहरण है। देश के गृह मंत्री के नाते मेरी जिम्मेदारी है कि मैं संसद को बताऊं कि सरकार ने कश्मीर मुद्दे पर क्या कदम उठाए हैं। गृह मंत्री ने सदन को बताया कि घाटी में पत्थरबाजी की घटनाओं में करीब 100 एंबुलेंसों को नुकसान पहुंचा। इसके बावजूद 400 और एंबुलेंसों को घायलों की मदद के लिए लगाया गया है। उन्होंने कहा कि घाटी में झड़पों में 4500 सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं। सुरक्षा बलों को अधिकतम संयम बरतने का निर्देश दिया गया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाजी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आज(अगस्त 10) राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने धमाकेदार बयान देते हुए कहा कि जब तक पाकिस्तान को ठीक नहीं किया जाएगा, पाकिस्तान को दुरुस्त नहीं किया जाएगा, वहां से आने वाले जहर को नहीं रोका जाएगा, वहां से आने वाले आतंकवाद को नहीं रोका जाएगा, कश्मीर की समस्याएं ख़त्म नहीं होंगी, उन्होंने राजनाथ सिंह की तरफ इशारा करते हुए कहा – अब मुझे कहना ही पड़ेगा, आपको पाकिस्तान को दुरुस्त करना ही पड़ेगा, राजनाथ सिंह ने भी सर हिलाकर राम गोपाल को कहने का इशारा कर दिया और राम गोपाल यादव ने धमाकेदार बयान दे दिया।
इससे पहले कश्मीर समस्या के लिए राम गोपाल यादव ने कश्मीर के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि उनकी गलतियों की सजा आज पूरा भारत और कश्मीर भुगत रहा है, उन्होंने बताया कि हमारी सेनाओं से 1962 के युद्ध में भारत ने पाकिस्तान के लाहौर तक पहुँच गयी थीं, जैसलमेर बॉर्डर के काफी आगे तक कब्जा कर लिया था लेकिन हमने बहुत बड़ी गलती हो गयी जिसकी हम सजा भुगत रहे हैं।
उन्होंने बताया कि हमें पाकिस्तान के आधे भाग पर कब्जा कर लेना था उसके बाद पाकिस्तान को जब लाहौर छिनने का डर होता तो उसकी अक्ल ठिकाने आ जाती लेकिन हमने शिमला समझौते में भारत की जमीन पाकिस्तान को दे दी, जबकि पाकिस्तान ने समझौते का कभी पालन ही नहीं किया, अगर हमारे पास गिलगिट का इलाका रहता तो सियाचिन में हमारे सैनिकों को शहीद नहीं होना पड़ता, हमारी सेनायें गिलगिट में रहती और वहीँ से पाकिस्तान को ठोंक देंतीं। अगर हम वह गलती ना करते तो पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर, मुजफ्फराबाद, सब कुछ भारत के पास रहता लेकिन पंडित जी ये मसला लेकर UN में लेकर चले गए और मामला वहीँ पर अटक गया, अगर यह मामला UN में लेकर जा जाते तो आज कश्मीर की समस्या नहीं होती।
उन्होंने मुलायम सिंह यादव का जिक्र करते हुए कहा कि जब वे रक्षा मंत्री बने तो पाकिस्तान की अक्ल ठिकाने लगा दी थी, पाकिस्तान बॉर्डर पर हमेशा गोलीबारी करता रहता था तो मुलायम सिंह ने भी आदेश दे दिय कि इन्हें ठीक करने के लिए जो कर सकते हो करो, हमारे आदेश का इन्तजार मत करो, उसके बाद पाकिस्तान की तरफ से गोलियों की आवाज सुनायी देनी बंद हो गयी।
उन्होंने कहा कि आज ऐसा कोई दिन नहीं होता जब बॉर्डर पर हमारे सैनिक शहीद ना होते हों, इतना सब कुछ होते हुए भी पाकिस्तान अलगाववादियों को फंडिंग कर रहा है, आतंकवादी लोग कश्मीर के युवाओं को बरगलाते हैं, उन्हें तरह तरह से सपने दिखाते हैं, उन्हें ट्रेनिंग देने के लिए अपने यहाँ ले जाते हैं और उनके हाथों से अपने ही लोगों की हत्या करवाते हैं।
उन्होंने कहा कि जब तक भारत पाकिस्तान के कब्जे वाले भाग पर कण्ट्रोल नहीं करेगा तब तक ऐसा होता रहेगा, उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लोग भारत के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं क्योंकि अभी भी भारत और पाकिस्तान के कई परिवार ऐसे हैं जिसके एक भाई भारत में जबकि दूसरे भाई भारत में रहते हैं, शादी विवाह में ये लोग पाकिस्तान जाना चाहते हैं लेकिन रिश्तों में तनाव की वजह से इन्हें वीजा नहीं मिलता।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आर्मी ही भारत के साथ रिश्तों को अच्छा नहीं होने देना चाहती क्योकि ऐसा होने के बाद इनके हाथों से सत्ता छिन जाएगी, ये लोग अपने हाथों में सत्ता बनाए रखने के लिए भारत के साथ जानबूझकर रिश्ते खराब रखना चाहते हैं, उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के सैनिकों और आर्मी अफसरों के बाद अच्छे अच्छे मकान होते हैं, पैसा होता है, उनके ऊपर कोई कानून नहीं चलता लेकिन वहां का आम आदमी तबाह है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान दुनिया के सभी मंचों पर कुछ भी कहे लेकिन वह भारत में अशांति फैलाने के लिए आतंकवाद का रास्ता कभी नहीं छोड़ेगा, पाकिस्तान चाहता है कि वह कश्मीर के लोगों को बहकाकर अपने साथ कर ले ताकि उसकी सेना इधर आ जाए, कश्मीरी पाकिस्तानी सेना के साथ मिल जाएं और भारत से पूरा कश्मीर छीन ले।
उन्होंने कहा कि जब तक पाकिस्तान को दुरुस्त नहीं किया जाएगा कश्मीर का मसला सुलझ ही नहीं सकता, आप पाकिस्तान के साथ दोस्ती करने की कितनी भी कोशिश कर लो, कश्मीरियों को कितनी भी सुविधाएं दे तो समस्याएँ सुलझने वाली नहीं हैं, उन्होंने कहा कि आज कश्मीर के हर घर में पाकिस्तान का टीवी देखा जा रहा है, उसमे क्या दिखाया जाता है क्या आपको पता नहीं है, उसमे जिहाद के नाम पर लोगों को खुलेआम भड़काया जाता है, आतंकी को शहीद बताया जाता है, हमारी आर्मी के खिलाफ जहर भरा जाता है।
उन्होंने राजनाथ सिंह की तरफ इशारा करते हुए कहा कि क्या आप पाकिस्तानी चैनलों को भी नहीं रोक सकते, जब आप पाकिस्तान से आने वाले जहर को नहीं रोक पा रहे हैं तो कश्मीर को कैसे ठीक कर पाएंगे, आज कश्मीरियों के दिल और दिमाग दोनों में जहर भरा जा रहा है, ये पाकिस्तान की तरफ से हो रहा है, पाकिस्तान के इशारे पर अलगाववादी कर रहे हैं, पाकिस्तान के इशारे पर आतंकवादी कर रहे हैं, आप जहर को रोकिये, तभी इलाज कर पाएंगे।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान हमारा कश्मीर लेने की फिराक में है तो आप उससे अपना कश्मीर मांगिये, पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर भी तो हमारा है, मुजफ्फराबाद तक की जगह हमारी है, आप सभी बड़े मंचों पर आवाज उठाइये।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की जुर्रत तो देखिये, हमारे कश्मीर से आधी जगह चीन को दे दी और चीन से वहां से पाकिस्तान आने जाने का रास्ता बना लिया, समस्या बहुत गंभीर हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि चाहे हुर्रियत कांफ्रेंस हो या अलगाववादी, इन्हें समझाने की बहुत कोशिश हुई, कई बार सेमीनार आयोजित किये गए, लेकिन ये लोग पाकिस्तान में बैठे हुए अपने आका का कहना ही मानते हैं, उनके ही आदेश पर काम करते हैं इसलिए इनसे कोई उम्मीद रखना बेईमानी होगी।
पत्थरबाजों को क्या गोदी में बैठा कर पुचकारा जाये, उन पर
लाड़-प्यार जताया जाए?
उन्होंने कहा कि अगर कश्मीर में हिंसा हो रही है तो कार्यवाही भी होनी चाहिए, अगर आप बल का प्रयोग नहीं करते तो समझा जाएगा कि आपने कश्मीर पाकिस्तान को दे दिया, लेकिन कोशिश कीजिये कि पैलेट गन का प्रयोग ना हो, बाकी के कोई भी बल प्रयोग कर लो।
उन्होंने कहा कि जब पाकिस्तान से अलगाववादियों की फंडिंग हो रही है तो बॉर्डर के साथ साथ पूरे कश्मीर में चौकसी होनी चाहिए, कश्मीर में अन्दर बैठे आतंकियों पर भी कार्यवाही होनी चाहिए।
स्मरण आती है, लगभग 1986 की है, जब गृह विभाग के कुछ अधिकारियों से दंगो पर हुई बातचीत के दौरान हर चौराहे पर पुलिस पॉकिट बनाने के अलावा रबर बुलेट के प्रयोग का सुझाव देते ही उपस्थित उच्च अधिकारी सकते में आ गए। सरकार द्धारा पुलिस पॉकिट तो स्थापित होनी शुरू हो गयीं, लेकिन रबर बुलेट का कुछ मुस्लिम सांसदों के अतिरिक्त वोट के भूखे नेताओं ने विरोध किया था। इक्तेफाक से 14 नवम्बर को दिल्ली के मोतिया खान में साम्प्रदायिक दंगा हो गया। जामा मस्जिद क्षेत्र में भगदड़ हुई और मटिया महल चौक पर स्थित पॉकिट में तैनात राइफल लिए पुलिस अपनी जान बचाने सामने एक मकान में घुस गए,जबकि भागती भीड़ को स्थानीय जनता ने ही नियंत्रित किया था। बरहाल, वास्तविकता यह है कि पेलेट गन हो या रबर बुलेट का प्रारम्भ से विरोध होता रहा है।
समझ नहीं आता कि पेलेट गन या रबर बुलेट का विरोध क्यों होता या हो रहा है? चुटकी भर पैसे लेकर सुरक्षाकर्मियों( सेना एवं अन्य दल ) पर पत्थर फेंकने वालों को क्या गोदी में बैठाकर पुचकारा जाये, उन पर लाड़-प्यार जताया जाए? जब पत्थरबाज इतना सबकुछ होने के बाबजूद अपने हरकतों से बाज़ नहीं आ रहे, फिर इन नेताओं को क्यों डर लग रहा है ? हो भी क्यों न, जब इस गन से अगर बिल्कुल ही अन्धे हो गए फिर इनको वोट देगा कौन?
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