हरक सिंह रावत हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए थे। उत्तराखंड की हरीश रावत सरकार में मंत्री रहे हरक सिंह उन 9 विधायकों में शामिल थे जिन्होंने वित्त विधेयक पर राज्य सरकार के खिलाफ मतदान किया था। हरक सिंह पर आरोप लगते ही उत्तराखंड में राजनीतिक भूचाल आ गया क्योंकि उन्हें ही हाल की कांग्रेस में हुई बग़ावत का मुख्य कर्ता-धर्ता माना जाता है। दिल्ली के सफ़दरजंग एनक्लेव थाने में 32 वर्षीय महिला बीते शुक्रवार को ही हरक सिंह रावत पर बलात्कार का आरोप लगाया था, उसने कहा था कि नौकरी का झांसा देकर उसका शोषण किया गया।
महिला के बयान से पलट जाने के बाद बाजी एक बार फिर से हरक सिंह रावत के हाथ में है। इधर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा है कि बिना सबूत उन पर कोई आरोप न लगाए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत होने पर वो किसी भी जांच के लिए तैयार हैं। महिला ने 164 के बयान (मजिस्ट्रेटी बयान) में मुख्यमंत्री हरीश रावत पर मोबाइल से धमकी देने और मुकदमा दर्ज कराने की बात कही है तो इससे हरीश रावत की मुसीबत बढ़ सकती है। उनके खिलाफ षड्यंत्र रचने, धमकी देने और आईटी एक्ट की धाराओं में केस हो सकता है। वहीं, महिला के खिलाफ भी झूठा मुकदमा दर्ज कराने के मामले में कार्रवाई का आधार है। जिसमें दोषी पाए जाने पर छह महीने की कैद या जुर्माना अथवा दोनों सजाएं हो सकती हैं।
Comments