बीजेपी शासित राज्य में हुआ तो अत्याचार… वरना कोई बात नहीं ! |
देश में दलितों पर अत्याचार की घटनाएं एक के बाद एक सामने आ रही हैं, जरा कुछ घटनाओं को देखिए। 11 जुलाई को गुजरात के ऊना में गौ रक्षा के नाम पर 4 दलित युवकों की पिटाई कर दी गई। इसके 9 दिन बाद बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में दो दलित युवकों को बाइक चोरी के शक में बुरी तरह पीटा गया और फिर उनके चेहरे पर पेशाब करने की बात भी सामने आई। तीसरी घटना भी बिहार से ही है। 3 अगस्त को यहां छात्रवृति घोटाले के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे राज्य भर के दलित छात्रों पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पुलिस का कहर टूटा। छात्रों को दौड़ा-दौड़ा कर लाठियों से पीटा गया।
अब इन तीनों घटनाओं पर हो रही सियासत को देखिए। ऊना की घटना निश्चित रूप से शर्मनाक है और इसके दोषियों को उचित सजा दी ही जानी चाहिए। इस घटना पर गुजरात की सरकार कार्रवाई कर भी रही है। इस घटना के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और बीएसपी सुप्रीमो मायावती तक गुजरात का दौरा कर आए हैं। उन्होंने अपनी तरफ से पीड़ितों के जख्मों पर मरहम लगाने की कोशिश की और उन्होंने ढांढस बंधाया।
यहां तक तो ठीक था, लेकिन सवाल तब उठता है जबकि बीजेपी शासित राज्यों में दलितों पर कहीं भी अत्याचार की खबर सुनायी देती है तो राहुल गांधी, केजरीवाल और मायावती पहली फ्लाइट से दलितों के घर पहुंचते हैं, दलितों का हाल चाल पूछते हैं और बीजेपी सरकार के खिलाफ जमकर आग उगलते हैं, बीजेपी को दलित विरोधी बताते हैं, लेकिन वैसी ही घटनाएं गैर बीजेपी शासित राज्यों या फिर इनके दोस्तों के शासन वाले राज्यों में घटित होती हैं तो इनके मुंह से एक शब्द तक क्यों नहीं निकलता।
बिहार के मुजफ्फरपुर में दलितों की पिटाई के बाद चेहरे पर पेशाब करने की खबर आई, इससे दर्दनाक, दुखद और अपमानजनक बात और क्या हो सकती है, लेकिन न तो राहुल गांधी को इस पर चिंता हुई ना ही अरविंद केजरीवाल को और ना ही मायावती को। जब नीतीश कुमार के बिहार में दलितों की बर्बरतापूर्वक पिटाई होती है, पुलिस लाठीचार्ज में दर्जनों दलित छात्र घायल होते हैं तो भी राहुल गांधी, केजरीवाल और मायावती अपनी आंखें बंद कर लेते हैं, ये लोग न तो बिहार का दौरा करते हैं और ना ही नीतीश कुमार का विरोध करते हैं।
सवाल है कि आखिर एक जैसी घटनाओं पर ही इन नेताओं का ऐसा अलग-अलग नजरिया क्यों है? क्या बिहार में जो हुआ वो दलितों का उत्पीड़न नहीं, वो दलितों का अपमान नहीं क्योंकि वो बीजेपी के शासन वाले राज्य में नहीं हुआ। या फिर फिर इसलिए कि बिहार में जो सरकार है वहां राहुल की कांग्रेस भी हिस्सेदार है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मित्र हैं और मायावती को आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए नीतीश का साथ चाहिए, भविष्य में कांग्रेस से भी गठबंधन की संभावनाएं बनती हैं।
पटना में प्रदर्शन कर रहे दलित छात्र हाल ही में नीतीश कुमार सरकार की तरफ से दलित छात्रों को दी जाने वाली छात्रिवृत्ति में कटौती का विरोध करने पहुंचे थे। दलित छात्रों के संगठन ‘छात्र कल्याण संघ’ ने पटना में विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया था। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार छात्र विधानसभा मार्च करने वाले थे। इस मार्च में भाग लेने के लिए राज्य के तमाम जिलों से छात्र पटना पहुंचे थे। आगे बढ़ रहे छात्रों को पुलिस ने जेपी गोलंबर के पास रोक दिया और बाद में उन पर लाठियां बरसाई गईं। लाठीचार्ज में 12 से ज्यादा छात्रों को चोटें आई हैं जिन्हें पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
छात्रों की पिटाई की इस घटना के बाद बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी पीएमसीएच पहुंचे और घायल छात्रों से मिले। सुशील मोदी ने मांग की कि सरकार दोषी पुलिसकर्मियों की पहचान करके सख्त कार्रवाई करे और छात्रवृत्ति की कटौती को वापस ले। जीतन राम मांझी ने कहा कि छात्रवृति की कटौती की लड़ाई अब सदन से लेकर सड़क तक होगी।
इस घटना की गूंज संसद से लेकर बिहार विधानसभा तक में सुनाई दी। बीजेपी ने बिहार विधानसभा में जमकर हंगामा किया और घटना की न्यायिक जांच की मांग की। वहीं लोकसभा में लोकजनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान ने इस मामले को उठाया। चिराग पासवान ने कहा कि दलितों के मसीहा बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा के नीचे दलित छात्रों को दौड़ा दौड़ा कर पीटा गया। आरजेडी से निकाले जाने के बाद अलग पार्टी बनाने वाले पप्पू यादव ने भी इस मामले को उठाया और बिहार की नीतीश सरकार को दलित विरोधी करार दिया।
इस घटना की गूंज संसद से लेकर बिहार विधानसभा तक में सुनाई दी। बीजेपी ने बिहार विधानसभा में जमकर हंगामा किया और घटना की न्यायिक जांच की मांग की। वहीं लोकसभा में लोकजनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान ने इस मामले को उठाया। चिराग पासवान ने कहा कि दलितों के मसीहा बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा के नीचे दलित छात्रों को दौड़ा दौड़ा कर पीटा गया। आरजेडी से निकाले जाने के बाद अलग पार्टी बनाने वाले पप्पू यादव ने भी इस मामले को उठाया और बिहार की नीतीश सरकार को दलित विरोधी करार दिया।
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