दिल्ली हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि संविधान
के अनुसार उप राज्यपाल के पास ही सभी तरह के संवैधानिक अधिकार हैं क्योंकि
दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश है, दिल्ली सरकार को सभी मामलों में उप
राज्यपाल से अनुमति लेनी होगी, केजरीवाल को केवल स्पेशल प्रोसीक्यूटर की
नियुक्ति कर सकती है।
इस आदेश के बाद हाई कोर्ट ने उन सभी
आदेशों और नोटीफिकेशंस को रद्द कर दिया जो केजरीवाल सरकार ने बिना उप
राज्यपाल की अनुमति के लिए थे, अब केजरीवाल को सभी कानून पारित करने के लिए
फिर से उप-राज्यपाल की अनुमति लेनी पड़ेगी और फिर से उन्हें पास कराने के
लिए फिर से केंद्र सरकार के पास भेजना होगा, मतलब अब केजरीवाल को कानून के
हिसाब से ही चलना होगा।
हाई कोर्ट ने केजरीवाल सरकार को लताड़ते
हुए कहा कि आप दिल्ली में उप-राज्यपाल को नजरअंदाज नहीं कर सकते, दिल्ली
केंद्र सरकार के अधीन है, केंद्र सरकार के पास ही यहाँ की सभी शक्तियां हैं
और उप-राज्यपाल ही यहाँ के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी हैं, अगर दिल्ली सरकार
को कोई कानून पास कराना है तो पहले उसे नजीब जंग से अनुमति लेनी होगी और
फिर उसे केंद्र सरकार के पास भेजना होगा।
जानकारी के लिए बता दें, जब से केजरीवाल
दिल्ली के मुख्यमंत्री बने हैं उन्होंने उप-राज्यपाल से सास-बहू की तरह
लड़ाई छेड़ दी है, केजरीवाल वैसे तो बहू की भूमिका में हैं लेकिन उन्हें
मंजूर नहीं है कि घर की चाबी सास यानी उप-राज्यपाल नजीब जंग के पास रहे,
केजरीवाल के आने के बाद दिल्ली में अराजकता का माहौल बन गया है, दिल्ली के
सभी विकास कार्य रुक गए हैं और केजरीवाल दिल्ली के काम ना करने का आरोप
केंद्र सरकार पर लगाते हैं।

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