संविधान के आर्टिकल 131 के तहत अगर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो जाए तो उसका निपटारा सुप्रीम कोर्ट ही कर सकता है।
केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच चल रहे अधिकारों की लड़ाई में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार को दिल्ली हाईकोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट से भी करारा झटका मिला है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा है कि आप खुद को पूर्ण राज्य कैसे कह सकते हैं। केजरीवाल के लिए दो दिन के भीतर ये दूसरा बड़ा झटका है। केजरीवाल सरकार ने अप्रैल महीने में ही सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी जिसमें मांग की गई थी कि उसे पूर्ण राज्य जैसे अधिकार मिलें।
अटार्नी जनरल का कहना था कि एक तो दिल्ली सरकार हाईकोर्ट के फैसले को भी चुनौती दे रही है दूसरी ओर संविधान के आर्टिकल 131 के तहत याचिका भी दायर की है। ये दोनों ही चीजें एक साथ नहीं चल सकती हैं। जबकि दिल्ली सरकार का कहना था कि वो एक हफ्ते के भीतर सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देगी और कोर्ट में इन दोनों मामलों को एक साथ ही सुना जाना चाहिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि इस पर फैसला चीफ जस्टिस करेंगे।
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दरअसल, संविधान के आर्टिकल 131 के तहत अगर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो जाए तो उसका निपटारा करने का अधिकार सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के पास ही है। हाईकोर्ट ऐसे मामलों पर सुनवाई नहीं कर सकता है। लेकिन, अब सवाल ये उठ रहे हैं कि जब दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला ही नहीं है तो फिर वो संविधान के आर्टिकल 131 के तहत कैसे याचिका दायर कर सकती है। बहरहाल सुप्रीम कोर्ट में अब इस मामले की सुनवाई 29 अगस्त को होगी।
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