दिल्ली-कानपुर हाईवे पर हूए सामूहिक दुष्कर्म मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। डिस्ट्रिक कोर्ट में आज तीनों आरोपियों को पेश किया गया। इस मामले में तब बड़ा खुलासा हुआ जब एक ढाबा संचालक ने इस गिरोह (बाबरिया) के बारे में बताया। ढाबा संचालक सोनू का कहना है कि कई दिनों से ये गिरोह लुटपाट और डकैती कर रहे थे लेकिन पुलिस ने उन बदमाशों से रिश्वत ली थी जिसकी वजह से वो पूरे इलाके में वारदातों को अंजाम देते थे।
ई टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने इस मामले के जिस मुख्य आरोपी रईस को जेल भेजा है। ये उसी गिरोह का हैड था। आरोपी रईस ने महीने भर पहले एक ढाबे पर डकैती डालकर दर्जन भर ट्रक ड्राइवर और ढाबा मालिक से लाखों रूपये की लूट की थी, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में क्राइम कंट्रोल के चक्कर में यह केस दर्ज नही किया गया। पुलिस ने इस मामले में अपनी जेब गर्म करके रईस को छोड़ दिया था।
ढाबा संचालक ने किया खुलासा
नेशनल हाईवे के नये बाईपास के पास एमएस इंस्टीट्यूट के बाहर ढाबा संचालक सोनू और उनकी पत्नी राजकुमारी चाय और रोटी का ढाबा चलाते हैं। पास के गांव सुतारी का रईस अक्सर इस ढाबे पर गांजे की सिगरेट पीने आता था। 30 जून 2016 की रात को करीब 11 बजे रईस सिगरेट पीकर चला गया और फिर उसने अगले एक घंटे में ढाबे के 2 चक्कर लगाये। रात करीब 2 बजे 9 बदमाशों ने हथियारों समेत ढाबे पर धावा बोला।
नेशनल हाईवे के नये बाईपास के पास एमएस इंस्टीट्यूट के बाहर ढाबा संचालक सोनू और उनकी पत्नी राजकुमारी चाय और रोटी का ढाबा चलाते हैं। पास के गांव सुतारी का रईस अक्सर इस ढाबे पर गांजे की सिगरेट पीने आता था। 30 जून 2016 की रात को करीब 11 बजे रईस सिगरेट पीकर चला गया और फिर उसने अगले एक घंटे में ढाबे के 2 चक्कर लगाये। रात करीब 2 बजे 9 बदमाशों ने हथियारों समेत ढाबे पर धावा बोला।
गैंग पहले भी अंजाम दे चुका है वारदातों को
ढाबा संचालक सोनू बताते है कि इन बदमाशों में रईस को उन्होंने पहचान लिया। उसने अपने चेहरे पर कपड़ा बांध रखा था। वह ढाबे में रखे कीमती सामान को बिना तलाश के निकाल लेता था। उसने गुल्लक में रखे करीब 18 हजार रूपये निकाल लिये। इसके बाद बदमाशों ने ट्रक ड्राइवरों समेत सभी के हाथ पैर बांध दिये। सबकी जेबों से नकदी और मोबाइल फोन लूट लिये गये। यह सब करीब डेढ़ घंटे तक चलता रहा।
ढाबा संचालक सोनू बताते है कि इन बदमाशों में रईस को उन्होंने पहचान लिया। उसने अपने चेहरे पर कपड़ा बांध रखा था। वह ढाबे में रखे कीमती सामान को बिना तलाश के निकाल लेता था। उसने गुल्लक में रखे करीब 18 हजार रूपये निकाल लिये। इसके बाद बदमाशों ने ट्रक ड्राइवरों समेत सभी के हाथ पैर बांध दिये। सबकी जेबों से नकदी और मोबाइल फोन लूट लिये गये। यह सब करीब डेढ़ घंटे तक चलता रहा।
पुलिस ने नहीं लिया था कोई एक्शन
तीन दिन बाद यह वारदात एक स्थानीय अखबार में छपी तो देहात कोतवाल रामसेन ने सोनू और राजकुमारी को थाने में बुलाकर धमकाया। उन्हें धमकी दी गयी कि अगर केस दर्ज कराओगे तो ढाबा बंद करा देंगे। सोनू ने पुलिस को वारदात में रईस के शामिल होने की बात भी बताई थी, लेकिन बाद में पता चला कि चौकी इंचार्ज प्रदीप यादव और दारोगा सतपाल गौड़ ने रईस को रिश्वत लेकर छोड़ दिया।
तीन दिन बाद यह वारदात एक स्थानीय अखबार में छपी तो देहात कोतवाल रामसेन ने सोनू और राजकुमारी को थाने में बुलाकर धमकाया। उन्हें धमकी दी गयी कि अगर केस दर्ज कराओगे तो ढाबा बंद करा देंगे। सोनू ने पुलिस को वारदात में रईस के शामिल होने की बात भी बताई थी, लेकिन बाद में पता चला कि चौकी इंचार्ज प्रदीप यादव और दारोगा सतपाल गौड़ ने रईस को रिश्वत लेकर छोड़ दिया।
यूपी पुलिस पर आरोप
पुलिस पर आरोप है कि वारदात के बाद पुलिस ने पीड़ित परिवारों को वहां से पलायन के लिए भी मजबूर किया। इसके अलावा कोतवाली देहात में 15 दिन पहले हुए लूट और रेप के मामले पर भी इलाका पुलिस ने परदा डाला था। इस वारदात का शक भी रईस के गैंग पर है। एसएसपी अनीस अहमद अंसारी से जब इन वारदातों में पुलिस की कार्यशैली पर जबाब मांगा गया तो उन्होंने बताया कि सारे मामलों की जांच कराई जा रही है। किसी भी दोषी पुलिसकर्मी को बचाया नहीं जाएगा। कड़ी कार्रवाई होगी।
पुलिस पर आरोप है कि वारदात के बाद पुलिस ने पीड़ित परिवारों को वहां से पलायन के लिए भी मजबूर किया। इसके अलावा कोतवाली देहात में 15 दिन पहले हुए लूट और रेप के मामले पर भी इलाका पुलिस ने परदा डाला था। इस वारदात का शक भी रईस के गैंग पर है। एसएसपी अनीस अहमद अंसारी से जब इन वारदातों में पुलिस की कार्यशैली पर जबाब मांगा गया तो उन्होंने बताया कि सारे मामलों की जांच कराई जा रही है। किसी भी दोषी पुलिसकर्मी को बचाया नहीं जाएगा। कड़ी कार्रवाई होगी।
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