कश्मीर में पहली बार हिंसा और आन्दोलन नहीं हो रहे हैं, कश्मीर में पहली बार कर्फ्यू भी नहीं लगा है, कश्मीर में पहली बार पैलेट गन का इस्तेमाल भी नहीं हुआ है, जिस पैलेट गन का नाम लेकर आज की कांग्रेस पार्टी रोना रो रही है और केंद्र सरकार का विरोध कर रही है, इस पैलेट गन को कांग्रेस पार्टी ने ही इजराइल से खरीदा था और पत्थरबाजों की ऑंखें फोड़ने के लिए मंगाया था, यही नहीं 2010 में इसी तरह की पत्थरबाजी के दौरान कांग्रेस ने इस पैलेट गन का जमकर इस्तेमाल किया था और सैकड़ों पत्थरबाजों की ऑंखें फोड़ी थीं, यही नहीं केवल एक हफ्ते के आन्दोलन और कर्फ्यू में कांग्रेस से करीब 100 पत्थरबाजों को गोली मार दी थी जबकि हजारों पत्थरबाजों का सीना पैलेट गन से छलनी कर दिया गया था।
कांग्रेस पार्टी की आक्रामक कार्यवाही का इस देश को पता ही नहीं चलता था क्योंकि मीडिया को पैसे देकर मैनेज कर दिया जाता था, बरखा दत्त जैसी पत्रकार शांत बैठी रहती थी, बीजेपी भी पत्थरबाजों के खिलाफ कार्यवाही में कांग्रेस का पूरा साथ देती थी क्योंकि उसे भी पता था कि ये पत्थरबाज एक तरह से आतंकवादी हैं जो पाकिस्तान के इशारे पर हिंसा फैलाना चाहते हैं, लिहाजा संसद में भी कश्मीर मसले पर कोई चर्चा नहीं होती थी।
राज्यसभा में कश्मीर पर चर्चा चल रही है, आज ही पहले क्यों नहीं हुई ? भड़के हुए है जनाब गुलाम नबी आजाद। याद करो सितम्बर 1989 का माह जब घाटी में जगह जगह पोस्टर लगे थे "हिन्दूओं कश्मीर छोड़ो वरना मार दिए जाओगे"
एक एक रात में कत्लेआम का खेल हुआ हिन्दू बहन बेटियों की इज्जत तार तार हुई। लोग जैसे तैसे रातों रात भागे। कितना खौफनाक मंजर होगा मस्जिदों से ऐलान होता था एक संप्रदाय के खिलाफ, सब शांत थे सेकुलर जुबान बंद थी।
सालों से यह सब चलता रहा केन्द्र सरकार भी चुप रही क्योंकि वोट का खतरा था।
सालों से यह सब चलता रहा केन्द्र सरकार भी चुप रही क्योंकि वोट का खतरा था।
बात हो रही है भारत का ताज जल रहा है, प्रधानमंत्री चुप है, एक खास बात गुलाम नबी कह गये कि प्रधानमंत्री 9बजे से 6 बजे तक दफ्तर में बैठते है संसद नहीं आते, हंसी आती है ऐसे बयानों पर क्या मोदी दफ्तर में सोते है कमाल है.. दर्द दिल से निकले.
. वाह जनाब आज पर अलगाववादी सुरक्षा बलों के बंकरों पर हमला करते हो, एक तरह सेना आतंकवादियों से मुकाबला कर रही हो पिछे से महिलाएं और जनता पत्थर बरसा रहीं हो तो गांधी गिरी की जायेगी? संसद में खड़े होकर आप सरकार और सेना का मनोबल गिराने की साजिश कर रहे हो दुश्मन देश और अलगाववादियों को क्या संदेश जा रहा है? जाहिर है जो राष्ट्र विरोधियों से हमदर्दी रखना अपराध है। देश का हर नागरिक संसद में बैठे सभी सदस्यों से उम्मीद रखता है कि अखण्ड भारत के विषय पर एक ही भाषा बोली जाय।
आज केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने खुद इस बात की जानकारी दी, उन्होंने बताया कि ऐसा नहीं है कि पहली बार पैलेट गन का इस्तेमाल हो रहा है, इससे पहले 2010 में भी कांग्रेस-NC की सरकार में पैलेट गन का इस्तेमाल हो चुका है। उन्होंने कहा कि मैंने वहां पहुँचते ही पैलेट गन के इस्तेमाल का विश्लेषण किया और यहाँ आते ही एक कमेटी बनाकर दूसरे विकल्पों पर विचार करने का रास्ता खोजने का प्रयास किया है, दो महीने में कमेटी हमें रिपोर्ट देगी।
उन्होने बताया कि सरकार की तरफ से सुरक्षाबलों को निर्देश दिए गए हैं कि आप अपने आप को जितना रोक सकते हैं रोकें, जब बहुत जरूरी हो तभी पैलेट गन का इस्तेमाल करें।
उन्होंने बताया कई 18 जुलाई से पहेल तक हिंसा की 567 घटनाएं हुईं थी, 33 नागरिक और एक सुरक्षाबल का जवान मारे गए थे, 1948 नागरिक तथा 1739 सुरक्षाबल के जवान घायल हुए थे लेकिन उसके बाद 18 जुलाई से लेकर 8 अगस्त तक हिंसा की 451 घटनाएं हो चुकी हैं जिनमें 10 नागरिक और 1 सुरक्षाबल का जवान मारा गया है, अगर कुल मिलाकर देखें तो अब तक 4515 सुरक्षाबल के जवान घायल हुए हैं जबकि 3356 नागरिक घायल हुए हैं, उन्होंने बताया कि यह निर्देश के कारण हुआ है कि हमारे जवान कम से कम जवाब दे रहे हैं और अपने शरीर पर पत्थर खा रहे हैं, इसी वजह से हमारे जवान अधिक घायल हो रहे हैं।
कांग्रेस और अन्य पार्टियों के विरोध के बाद केंद्र सरकार ढीली पड़ गयी और पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी, 18 जुलाई तक हमारे सैनिकों के घायल होने की संख्या पत्थरबाजों से कम थी, पत्थरबाजों से हमारे 209 जवान कम घायल हुए थे लेकिन 18 जुलाई के बाद यानी 8 अगस्त तक स्थिति बदल गयी और हमारे 1159 जवान अधिक घायल हो गए, केंद्र सरकार ने सुरक्षाबलों से बोल दिया कि आप जितना झेल सकते हो झेल लो, जितने पत्थर खा सकते हो खा लो, जब हद हो जाए तभी गोली चलाना, सुरक्षाबल भी केंद्र सरकार की बात मान लिए और पत्थर खाना शुरू कर दिए।
कहने का मतलब यह है कि ये अलगाववादी और पत्थरबाज कश्मीरी नागरिक नहीं हैं, कश्मीरी नागरिक तो वो हैं जो इस देश से प्यार करते हैं, भारत के साथ रहकर विकास करना चाहते हैं, लेकिन ये पत्थरबाज एक तरह से आतंकी हैं जो पाकिस्तान के इशारे पर हिंसा कर रहे हैं, सुरक्षाबलों पर पत्थर बरसा रहे हैं, केंद्र सरकार इन्हें दो दिन में ठीक कर सकती है लेकिन जो राजनीतिक पार्टियाँ कांग्रेस सरकार के समय तमाशा देखती थीं आज वही पार्टियाँ कांग्रेस के साथ केंद्र सरकार की कार्यवाही का विरोध कर रही हैं, मतलब दोगलेपन पर उतर आयी हैं, आज इन्हें पैलेट गन का इस्तेमाल गलत लग रहा है भले ही वे पत्थरबाज पाकिस्तान के इशारे पर हमारे सैनिकों की हत्या कर दें।
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