उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस के सीएम पद का चेहरा और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सीबीआई ने शीला दीक्षित के जल बोर्ड में अध्यक्ष रहने के दौरान हुई अनियमितताओं की जांच रिपोर्ट तैयार कर ली है। मामला 2009 से 2012 के दौरान जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में कलपुर्जों की आपूर्ति में हुई अनियमितताओं का है। 15 साल तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित उस दौरान दिल्ली जल बोर्ड की अध्यक्ष भी थीं।
सीबीआई ने अनियमितताओं की हर एंगल से जांच की है और सभी तथ्यों को खंगालने की कोशिश की है। उसने इस सिलसिले में संबंधित 5 मामलों में 7 आरोप पत्र तैयार किए हैं। इनमें जल बोर्ड के तत्कालीन 8 एग्जिक्यूटिव इंजीनियर, 6 जेई और कीर्तिनगर स्थित मेट्रो प्रोजेक्ट्स सेल्स एंड सर्विसेज के मालिक रमन गुप्ता को आरोपी बनाया गया है। जांच के दौरान सीबीआई ने पाया कि आपराधिक साजिश के तहत मुंबई स्थित एक कंपनी से गलत अथॉरिटी लेटर बनवाया गया था, ऐसे करीब 100 लेटर बरामद भी किए गए हैं।
सीबीआई ने अनियमितताओं की हर एंगल से जांच की है और सभी तथ्यों को खंगालने की कोशिश की है। उसने इस सिलसिले में संबंधित 5 मामलों में 7 आरोप पत्र तैयार किए हैं। इनमें जल बोर्ड के तत्कालीन 8 एग्जिक्यूटिव इंजीनियर, 6 जेई और कीर्तिनगर स्थित मेट्रो प्रोजेक्ट्स सेल्स एंड सर्विसेज के मालिक रमन गुप्ता को आरोपी बनाया गया है। जांच के दौरान सीबीआई ने पाया कि आपराधिक साजिश के तहत मुंबई स्थित एक कंपनी से गलत अथॉरिटी लेटर बनवाया गया था, ऐसे करीब 100 लेटर बरामद भी किए गए हैं।
बताया जाता है कि सीबीआई के आरोप पत्र में आरोपी के रूप में सीधे तौर पर शीला दीक्षित या फिर टॉप लेवल के अधिकारियों का का नाम तो नहीं है, लेकिन शक की सुई उनकी ओर भी है। बताया जाता है कि जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में कलपुर्जों की आपूर्ति में भारी अनियमितताएं हुई हैं। करोड़ों का माल, ज्यादा से ज्यादा कीमत पर कीर्तिनगर स्थित कंपनी से खरीदा गया और फिर इन सारे कलपुर्जों की आपूर्ति जल बोर्ड के कोंडली, केशवपुरम, कोरोनेशन पार्क, महारानी बाग, वजीराबाद और दिल्ली के कुछ इलाकों में स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों में कर दी गई।
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