स्टम्प ने कहा कि अफगानिस्तान में तालिबान
और हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ पाकिस्तानी धरती पर चल रहे मौजूदा सैन्य
अभियान के आधार पर पाकिस्तान को दी जाने वाली 30 करोड़ डॉलर की सैन्य मदद
रोकने का निर्णय लिया गया।
पाकिस्तान में सैन्य अभियानों के लिए इस
अमेरिकी मदद को काफी अहम माना जा रहा था, जिस पर विराम लग गया है। इसके साथ
ही यह फैसला वाशिंगटन और पाकिस्तान के बीच संबंधों में रूखेपन को उजागर
करता है, क्योंकि पाकिस्तान के कई अधिकारियों पर आतंकवादी संगठनों के साथ
दोहरा संबंध बनाए रखने का आरोप है।
गौरतलब है कि पेंटागन का यह निर्णय ऐसे
समय में आया है जब अफगानिस्तान में तालिबान फिर से सक्रिय हो उठा है और
अमेरिकी सेना की पूर्ण वापसी रोकनी पड़ी है।
अमेरिका गठबंधन सहायता कोष (सीएसएफ)
कार्यक्रम के तहत अफगानिस्तान में अमेरिकी सैन्य अभियान में मदद करने के
लिए पाकिस्तान को आर्थिक मदद मुहैया कराता रहा है। इसके अलावा पाकिस्तानी
धरती पर सक्रिय आतंकवाद के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियानों के लिए भी
अमेरिका मदद करता रहा है।
अमेरिका स्थित पाकिस्तानी दूतावास के
प्रवक्ता नदीम होतियाना ने कहा कि सीएसएफ कार्यक्रम के तहत अमेरिका,
पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई का समर्थन करता रहा है, खासकर पाकिस्तान के
अशांत कबायली इलाकों में, जिससे दोनों देशों को लाभ मिला है।
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