प्रदेश की राजधानी लखनऊ में महिलाओं के सम्मान को बचाने एवं बसपा नेता नसीमुद्दीन सिदकी को बर्खास्त करने के लिए आज भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकताओं का जोरदार प्रदर्शन
आज भारत की राजनीति ने उस भाषा को जिस स्तर तक गिरा दिया है वह वाकई निंदनीय है। उत्तर प्रदेश बीजेपी के वाइस प्रेसीडेन्ट दयाशंकर सिंह ने 20 जुलाई को अभद्र भाषा का प्रयोग किया । जवाब में बसपा कार्यकर्ताओं ने जगह जगह रैलियां निकाल कर हिंसात्मक प्रदर्शन किए बेहद आपत्तिजनक नारे लगाए दयाशंकर की बेटी व बहन का अभद्रता के साथ जिक्र किया। इतना ही नहीं सड़कों पर प्रदर्शन के दौरान लड़कियों एवं महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया। उनके साथ भी अभद्रता की गई।
इस सबको मायावती सही मानती हैं, यानी खून के बदले खून और गाली के बदले गाली उनकी नीति है। मायावती के एक वरिष्ठ मुस्लिम नेता ने यहाँ तक कहा कि दयाशंकर अपनी बेटी को पेश करो। मायावती के नेता नसीमुद्दीन के शब्द किसी को भी झकझोर सकते हैं। भाषा ही वह माध्यम है, जिससे हम अपने हम अपने व्यक्तित्व को दर्शाते हैं। । भाषा की मर्यादा की सीमा रेखा कभी नहीं तोड़नी चाहिए। भाषा के अन्यथा प्रयोग से आपकी फूहड़ता झलक जाएगी और आप पब्लिक में नंगे हो जाओगे।![]() |
| राजभवन में बसपा नेता नसीमुद्दीन की गिरफ़्तारी की मांग को लेकर राज्यपाल महामहिम श्री रामनाईक जी को ज्ञापन देने पहुंची महिला मोर्चा की पदाधिकारी बहनें। |
एक महिला होने के नाते कम से कम मायावती को महिलाओं के इस मुद्दे को अलग ही रखना चाहिए था। महिलाओं का सम्मान जब एक महिला ही नहीं करेंगी तो वह इस सम्मान की अपेक्षा पुरुषों से कैसे कर सकती है? शायद वह भी नहीं जान पाईं कि जिस बात को उन्होंने महिला सम्मान से न जोड़ कर दलित रंग में रंग कर वोट बटोरने चाहे, वह उन्हीं की अति उग्र प्रतिक्रिया के फलस्वरूप एक बेटी द्वारा पूछे गए प्रश्न से 'बेटी के सम्मान ' का मुद्दा बन जाएगा।
एक सवर्ण पुरुष से एक दलित महिला तो शायद जीत भी जाती, लेकिन मैदान में सामना एक महिला और एक बेटी से होगा यह तो शायद मायावती ने भी नहीं सोचा होगा। उनका सामना अब एक मां से है
महिलाओं के सम्मान के खातिर आज बीजेपी लखनऊ में एक बहुत बड़ा प्रदर्शन करने जा रही है।
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