सिपाही का कहना है कि ‘हम भी अपने घर पर रहकर और घर के पास ही नौकरी करके अपना और अपने परिवार का पालन पोषण कर सकते हैं, हम भी अपनी आजीविका अच्छे से चला सकते हैं लेकिन हम ऐसा नहीं करते हैं और देश की सेवा में लगे रहते हैं।
सिपाही ने बताया कि ‘वह 10 वर्ष से पैरामिलिट्री फोर्स में कार्यरत है और पिछले 4 साल से कश्मीर में तैनात है, इसी, उसे सैलरी के तौर पर करीब 28,000 रुपये मिलते हैं, अधिक छुट्टी करने पर सैलरी भी कट जाती है जिसके बाद उसे केवल 22,500 रुपये मिलते हैं।
उसका परिवार किराये के मकान में रहता है, जिसके लिये वह हर महीने उन्हें 5000 रुपये देता है, दो बच्चे हैं, जिनकी स्कूल फीस, ट्यूशन और बाकी चीजों में करीब 6 हजार रुपये खर्च हो जाते है, घर में राशन और गैस वगैरह पर हर महीने करीब 7 हजार रुपये खर्च होते है। यानि कुल मिलाकर उसके घर का मोटा-मोटा खर्च 18 हजार रुपये है।
इस खर्चे के अलावा उसके पूरे परिवार का मोबाइल खर्च करीब 1500 रुपये है।
सिपाही जब तीन महीने बाद छुट्टी पर घर लौटता है तो दोनों तरफ का किराया और बाकी खर्च जोड़कर करीब 10 हजार रुपये खर्च हो जाते है।
सिपाही ने बताया कि अगर उसके घर के सभी सदस्य स्वस्थ रहते हैं यानी कि डॉक्टर की फीस और दवाई पर कोई खर्चा नहीं होता है तब जाकर उसकी सैलरी में से 3 हजार रुपये प्रति महीना बचते हैं।
परिवार हमेशा रहता है असुरक्षित
सिपाही ने बताया कि कहने को तो वह देश का रक्षक है लेकिन उसका परिवार हमेशा असुरक्षित रहता है, वह परिवार से कभी कभी ही बात कर पाता है।
सिपाही ने बताया कि उसके घर में ऐसा कोई रोल मॉडल नहीं है कि उसके बच्चे उनसे प्रेरणा ले सकें हाँ अगर अगर के पास कोई पियक्कड़ है तो बच्चे जरूर उसकी आदत पकड़ सकते हैं।
उसके परिवार के सदस्यों को कोई भी बाजार में भद्दे कमेन्ट कर देता है, पत्नी का अपमान कर सकता है।
परिवार कहीं शिकायत करते जाए तो कोई सुनने को तैयार नहीं है, हर जगह दबंगों की चलती है, नेताओं की शिफारिश चलती है।
सिपाही ने बताया कि उनकी जान का भी कुछ पता नहीं होता है, पता नहीं कब वे गोली का शिकार हो जाएं।
सिपाही ने अंत में कहा कि ‘हम भी पढ़े लिखे हैं, अपने परिवार का पालन पोषण कर सकते हैं, घर रहकर रोजी रोटी कमा सकते हैं, बच्चों को अच्छी शिक्षा दे सकते हैं, उन्हें स्कूल छोड़ने जा सकते हैं, अपनी संपत्ति का रख रखाव कर सकते हैं, अपनी बीवी, बहन, माँ की सुरक्षा कर सकते हैं लेकिन हम ऐसा नहीं कर पाते, हमारा पूरा साल देश की सुरक्षा में बीतता है, अब हमें इस घिनौनी दुनिया से इतना डर लगने लगा है कि दो-दो दिनों तक नींद ही नहीं आती है।
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