दयाशंकर सिंह की पत्नी स्वाति सिंह ने बीएसपी अध्यक्ष मायावती और तमाम दूसरे नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। जुलाई 22 को मायावती, नसीमुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ दयाशंकर के परिवार ने हजरतगंज थाने में एफआईआर भी करवाई। हालांकि बीएसपी नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने माफी मांगने से इनकार करते हुए अपशब्दों को सही ठहराया। वाराणसी में बीजेपी महिला मोर्चा ने प्रदर्शन कर रैली भी निकाली। महिला कार्यकर्ताओं ने मायावती का पुतला जलाया। बीजेपी की महिला विंग की कार्यकर्ताओं के साथ स्कूल की बच्चियां भी प्रदर्शन में उतरीं।
दयाशंकर सिंह की पत्नी स्वाति सिंह से जब पूछा गया कि क्या वह बीजेपी के प्रदर्शन में शामिल होंगी तो उनका जवाब था, मैं BJP के प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लूंगी क्योंकि मैं किसी पार्टी का हिस्सा नहीं हूं। मैं सभी से अपील करती हूं कि इस मुद्दे पर मेरा साथ दें, सभी दलों से गुहार है कि बेटी के मुद्दे पर साथ दें। उन्होंने मांग की कि पॉस्को एक्ट के तहत मामला दर्ज कर नसीमुद्दीन को गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने नसीमुद्दीन के उस बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें नहीं पता था कि दयाशंकर सिंह की बेटी माइनर है। स्वाति ने कहा कि इसका मतलब अगर मेरी बेटी बालिग होती तो वो कुछ भी बोलते।
बीजेपी सांसद हरीश द्विवेदी ने कहा कि दयाशंकर सिंह के बयान देने के तुरंत बाद अरुण जेटली ने सदन में बयान दिया और पार्टी ने कार्रवाई भी की लेकिन लखनऊ में अंबेडकर मूर्ति के सामने नसीमुद्दीन और बीएसपी कार्यकर्ताओं ने जो टिप्पणी की वह स्वीकार्य नहीं है। भद्दी गालियां दी गई। इसमें चुनाव कोई मुद्दा नहीं है, अगर किसी की भी बहू बेटी को गाली दी जाएगी तो बीजेपी विरोध करेगी। पार्टी हमेशा नारी के सम्मान में काम करती है इसीलिए प्रदर्शन कर रही है।
बीजेपी के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने कहा कि यूपी की सड़कों पर जिस तरह से नसीमुद्दीन सिद्दिकी और चंडीगढ़ की नेता ने दयाशंकर की बेटी और बहन के बारे में अपशब्द कहे हैं। नसीमुद्दीन को पार्टी से निष्कासित किया जाए। माफी मांगी जाए। बीएसपी ने देश की बेटियों को अपमानित किया है। सत्ता की हवस के लिए जातीय संघर्ष में मत बदलिये। प्रदेश की बहनों से मायावती माफी मांगे।
वहीं उप्र सरकार दयाशंकर की पत्नी को सुरक्षा मुहैया कराएगी। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि वर्तमान में जो माहौल है उसे देखते हुए दयाशंकर की पत्नी को सुरक्षा दी जाएगी।केशव मौर्य ने मांग की यदि मायावती के मन में थोड़ा भी स्त्री की गरिमा के प्रति सम्मान हो तो नसीमुद्दीन सिद्की को नेता विधान परिषद से बर्खास्त और पार्टी के महासचिव पद से निष्कासित करें।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यदि नसीमुद्दीन सिद्दीकी समेत उन सभी बसपाइयों को, जिन्होंने दयाशंकर सिंह की बेटी के लिए अपशब्द का प्रयोग किया है उनकी गिरफ्तारी नहीं की जाती है तो भारतीय जनता पार्टी 'बेटी के सम्मान' में संघर्षों के मैदान में उतरेगी। मौर्य ने घोषणा की नसीमुद्दीन सिद्दीकी की गिरफ्तारी के लिए सभी जिला मुख्यालयों पर भाजपा कार्यकर्ता प्रदर्शन करेंगे और प्रदेश इकाई माननीय राज्यपाल राम नाइक से मिलकर ज्ञापन सौंपेगी
.दयाशंकर की मां तेतरा देवी की तहरीर पर लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती, राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी, राष्ट्रीय सचिव मेवालाल गौतम, प्रदेश अध्यक्ष राम अचल राजभर व अन्य के खिलाफ आईपीसी की धारा 504, 505, 509, 120,153- के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
एएसपी पूर्वी शिवराम यादव के मुताबिक तहरीर के आधार पर आरोपियों के विरुद्ध षड्यंत्र, ऐसा कृत्य जिससे दो संप्रदाय अथवा जाति के लोगों के बीच विद्वेष पैदा हो, ऐसा कृत्य जिससे किसी महिला के मान-सम्मान को हानि हो,
गाली-गलौज व जान से मारने की धमकी देने की धाराओं में रिपोर्ट पंजीकृत की गई है। ध्यान रहे, मायावती पर अशोभनीय टिप्पणी के मामले में बुधवार रात हजरतगंज कोतवाली में मेवालाल गौतम की तहरीर पर भाजपा नेता दयाशंकर सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
एससी/एसटी एक्ट हटाने की मांग : दयाशंकर के परिवारीजन ने उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे से एससी/एसटी एक्ट हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि दया शंकर ने कोई जाति सूचक शब्द का इस्तेमाल नहीं किया लिहाजा एससी/एसटी का कोई आधार नहीं हैं।
जीभ पर 50 लाख: चंडीगढ़ बीएसपी की चीफ जन्नत जहां ने दयाशंकर की जीभ काटने वाले को 50 लाख रुपए इनाम देने का एलान किया था। इसके अलावा मेरठ में एक संगठन ने जीभ काटने पर 5 लाख रूपए के इनाम ऐलान किया है।
सिर्फ दलितों के लिये झुठी लड़ाई लड़ती है इनके लिये लड़ने वाली मायावती लखपति से आज करोड़पति है और दलित आज भी दलित ही है।
मायावती दलितों को मूर्ख बनकर अपना उल्लू सीधा कर रही हैक्या कोई भी दलित ये बता सकता है कि मायावती ने अभी तक कितने दलितों को उधार भी दिया है ? कितनो को रोजगार दिया है ?
हाँ ! अपने परिवार का अवश्य कल्याण कर लिया है I ..
अगर इतनी सम्पति से बेटियो के लिए स्कूल , कालेज , अस्पताल और रोजगार के अवसर बना देती तो दलित समाज अपने आप ' देवी ' मान लेता खुद घोषित न करना पड़ता,,
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जो अपने आप को स्वयं ही ' देवी ' कह कर पेश कर रही है क्या उसमे देवियों का एक भी गुण है ? दयाशंकर द्वारा कि गई गलत टिपण्णी पर तो देवी भड़क गई ! परन्तु अब जब इस देवी के गुंडे और किराए के आदमी
दयाशंकर कि पत्नी और बेटी के लिए जो अपशब्द प्रयोग कर रहे हैं, क्या यह देवी उनका समर्थन कर रही है ?
यदि नहीं , तो उसे इस बात का भी विरोध करना चाहिए, अन्यथा यह सब मायावती का ड्रामा ही है I
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जो अपने आप को स्वयं ही ' देवी ' कह कर पेश कर रही है क्या उसमे देवियों का एक भी गुण है ? दयाशंकर द्वारा कि गई गलत टिपण्णी पर तो देवी भड़क गई ! परन्तु अब जब इस देवी के गुंडे और किराए के आदमी
दयाशंकर कि पत्नी और बेटी के लिए जो अपशब्द प्रयोग कर रहे हैं, क्या यह देवी उनका समर्थन कर रही है ?
यदि नहीं , तो उसे इस बात का भी विरोध करना चाहिए, अन्यथा यह सब मायावती का ड्रामा ही है I
लेकिन इस मुद्दे पर एक खास पाकेट के लोग न सिर्फ़ खामोशी अख्तियार करते हैं बल्कि इस का भरपूर मज़ा भी लेते हैं. इस मानसिकता की भी पड़ताल ज़रूरी है. क्यों कि दोनों ही सूरत शर्मनाक है. हालां कि यह तथ्य किसी से छुपा नहीं है कि चुनाव कोई भी हो मायावती पैसे ले कर ही अपनी पार्टी का टिकट किसी को देती हैं.
यह बात इतनी बार, इतने सारे लोग, कितने सारे तरीके से कह चुके हैं कि वह बेहिसाब है. दयाशंकर सिंह ने भी उसी बात को दुहराया है. लेकिन उन का बात करने का तरीका निहायत ही गंदा और शर्मनाक है. देखिए क्या है कि महाभारत में दुर्योधन की मांग कहीं से भी नाज़ायज़ नहीं थी कि अगर मेरा बाप अंधा था तो इस में मेरा क्या कसूर? लेकिन दुर्योधन के लाक्षागृह जैसे तरीके गलत थे. इसी लिए वह खलनायक हो गया.
दयाशंकर सिंह यहीं दुर्योधन हो गए. नहीं अभी-अभी कुछ दिन पहले ही यही आरोप स्वामी प्रसाद मौर्य और आर के चौधरी भी बसपा छोड़ते समय लगा गए हैं मायावती पर. लेकिन तब इस बात पर हंगामा नहीं हुआ. क्यों कि यह तथ्य था और रूटीन भी. लेकिन दयाशंकर सिंह मां को बाप की बीवी कह गए. सच कहा लेकिन सच कहने की मर्यादा भूल गए.
लेकिन भारतीय राजनीति में यह गाली गलौज कोई नई बात नहीं है. राजनीति में इस गाली गलौज की शुरुआत भी बसपा ने ही की है. बसपा के संस्थापक कांशीराम और आज की उस की मुखिया मायावती ने ही की है. तो जो बोया है, वह काटना भी पड़ेगा. याद कीजिए वह अस्सी-नब्बे का दशक. जब तिलक, तराजू और तलवार, इन को मारो जूते चार! जैसे जहरीले और नीचता भरे नारों के दिन थे.
पिछले दिनों कांग्रेस नेता सेलजा कुमार ने खुद को दलित बताते हुए अपने साथ मंदिर में अपमान होने की बात कही थी| आज मायावती पर की गयी एक शब्द की अभद्र टिप्पणी को समस्त दलित समुदाय से जोड़ दिया गया| लेकिन जब देश के एक राज्य केरल के अन्दर एक दलित गरीब लड़की के साथ रेप कर उसके अंगभंग कर उसकी हत्या कर दी गयी तो राजनीति से कोई एक आवाज़ उसके लिए बाहर नहीं आई? क्या ये एक दलित की हत्या नहीं थी? या एक दलित महिला का अपमान नहीं था? उसका राजनेतिक कद नहीं था या उस राज्य में के चुनाव में दलित मुद्दा नहीं थे, या वो गरीब दलित की बेटी मायावती की तरह देवी नहीं थी?
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