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पत्थरबाज़ी के लिए 500 रूपए कौन दे रहा है? कश्मीर को नर्क किसने बनाया?

आज "संघ संस्कार और आप" पर निम्न लेख पढ़ दिल भर आया। ऐसा आभास होता है कि वास्तव में कश्मीरियों पर बहुत ज़ुल्म हो रहे हैं। लेकिन आज इस तरह के भावात्मक लेखों से यह सज्जन या इनके अन्य साथी क्या सिद्ध करना चाहते हैं। कल जो ज़ुल्म कश्मीरी मुसलमानों ने कश्मीर में प्रदर्शनकारी पुलिस और सेना को निशाना बना रहे हैं। (फाइल फोटो)कश्मीरी पंडितों एवं सुरक्षा कर्मियों पर बरपाए थे उस समय किसी ने ऐसे भावात्मक लेख लिखे। शायद नहीं। होंगे तो शून्य के बराबर। अब राष्ट्र ऐसे लेख लिखने वालों से जानना चाहता है :--

*जिस देश में रहो उस देश के विरुद्ध नारेबाजी करना क्या उचित है?*दूसरे देशों से मुठी भर चंद सिक्के लेकर भारत के सुरक्षाकर्मियों पर पत्थर फेंकना क्या उचित है?*कश्मीरी पंडितों को मार-मार कर भगाना क्या उचित था?*जब तक कश्मीरी पंडित घाटी से निकले नहीं उन पर हो रहे अत्याचारों पर क्यों चुप्पी साधे रहे?*जब कश्मीरी पंडितों की महिलायों पर अत्याचार हो रहे थे, तब क्यों मौन धारण किये हुए थे?*भारत में रहकर भारतीय सैनिकों पर पत्थर फेंकना क्या उचित है?*भारत में रहकर “भारत मुर्दाबाद, पाकिस्तान ज़िन्दाबाद” नारे क्या उचित हैं?*शुकवार को नमाज़ पढ़ने के लिए जमा होते हो या कि पाकिस्तान और आईएसआईएस के झंडे फहराने?*भारत में रहकर “India Go Back” लिखने पर क्यों मौन रहे?*ये पत्थरबाज़ी किसके कहने पर और किस लिए हो रही है?*आतंकवादी के मारे जाने पर इतना सियापा क्यों?*घरों में आतंकवादियों को कौन छिपा रखता है और क्यों?*इतने वर्षों से बेगुनाहों से खून की होली कौन खेल रहा है?

सोशल मीडिया पर एक तर्क यह भी :-

आज भारत की आर्मी ने वह काम कर दिखाया, जिसके आगे इजराइल की मोसाद फ़ोर्स भी बौनी साबित हो गई. भारत की सेना ने मात्र तीन दिन के भीतर कश्मीर को घुटनों पर लाकर रख दिया. तीन दिन पैलेट की फायरिंग में मात्र ४३ पत्थरबाज मारे गए, और ७०० पत्थरबाजों ने अपनी आँखें हमेशा के लिए खो दी. मात्र ५०० रुपये के पत्थरबाज़ी के लिए इन जाहिलों ने लाखों कीमत की आँखों की रौशनी खो दी. अच्छा ही है जिन आँखों में भारत की नफरत का खून दौड़ता था, अब वो हमेशा के लिए बुझ गईं.

Sayyed Ali Saad shared Ashraf Hussain's post to the group:Rss.संघ संस्कार और आप।
3 hrs
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"काश्मीरियों का दर्द, हो सके तो पढ़कर महसूस किजिये"
आप कल्पना नहीं कर सकते हैं ये तस्वीरें इतनी दर्दनाक हैं कि देखते ही आखें नम हो जाए, सुबह से सोच में हुँ क्या ऐसा लिख दुँ के उनको भी महसुस हो जो ऐसी हैवानियत के समर्थक हैं, फिर सोचा उन माहान शांतिदूतो को कैसे महसूस होगा जो जलते हुए कश्मीर के बेक़सूर मरहुमों पर भी अभद्र टिप्पणींयाँ की हो, उनको कैसे महसूस होगा जिन्होंने किसी के आंसु नहीं देखे बल्कि विकेट गिन रहे हो,
फिर सोचा हमारी कौम समझेगी लेकिन तब ख्याल आया मुसलमान मरते रहें हैं आए दिन हमारे देश में या फिर किसी न किसी मुस्लिम देश में खून की नदिया बह गयी किस किस को लिखूं...?
कल सीरिया जल रहा था, सूडान, कश्मीर, यमन, लीबिया, हर तरफ बेगुनाह मुसलमानों की तबाही का मंजर था..!
लेकिन फिर भी हम सो रहें थे, मसलेहत और फिरको की चादर ओढ कर. ये कैसे कहें कि मुसलमानो एक हो जाओ, बचा लो देश को साजिशों से ......
पेरिस मे चार्ली आब्दो पर अटैक हुआ था 11 लोग मारे गए थे , पूरी दुनिया फेसबुक पर अपनी डीपी फ़्रांस के झंडे के रंग में रंग ली थी। फिर फ्रांस में ट्रक द्वारा हमला हुआ सारे शांती दूतो ने अपने-अपने टाइमलाइन पर 5-5 किलोमीटर लमबी पोस्ट चेंप दी।
याद किजिये सीरिया के अलेप्पो शहर में 28 अप्रैल को हमला हुआ हॉस्पिटल समेत सेकड़ों इमारतों को खंडहर बना दिया गया, डॉक्टर और मरीजों समेत 4000 लोग मार दिये गये, किसी की शकल भी नहीं बदली थी , सारी दुनिया चुप थी।
अरे हम दुनिया क्यों घुम रहे ? लौट आइऐ और चलिए अपने देश की जन्नत कश्मीर की ओर और देखिए अब तक लगभग 40 की मौत और हजारों घायल पङे हैं और रोजाना तादाद में वृद्धि हो रही, और लोग इसका जायका नमक की तरह स्वादानुसार ले रहे हैं, जैसा कि आप वाकिफ हैं ।
अब जरा कल्पना किजिये वहाँ का मंजर, एक माँ अपने बचचे की लाश को गोद में लेकर कह रही है के उठ जा बेटा तेरे बाबा धर आते ही होंगे खिलौने लेकर, एक बाप अपनी बच्ची की लाश को गोद में लेकर कहता होगा उठो बेटी बहुत अरमान है तुझे पालने से डोली तक का सफर तय करता देखुं, एक बच्चा अपनी छोटी बहन को समझा रहा है की चुप हो जा बाबु अम्मी अब्बू आएगे, एक बच्ची अपने बाप के लाश से कह रही होगी उठो अब्बा जान हमें डर लग रहा है, एक बेटा अपने मां बाप की लाश से कह रहा होगा उठो अम्मी अब्बा अभी तो मैं आप के लिए कुछ किया भी नहीं आपका ख्याल रखुगा आपको हज पर भेजना है, एक बीवी अपने शौहर के लाश से कह रही होगी उठो हमारा कया होगा ? एक शौहर अपनी बीवी से कह रहा होगा उठो हमारे बच्चों का क्या होगा उनका ख्याल कौन रखेगा ? देखो इन तस्वीरों को जहां शब्द किसी की भावनाओं को व्यक्त नहीं कर सकता।
धरती पर इंसान को मारकर मंगल पे जिंदगी तलाश करने वालों आप ऊपर वाले के सामने किस मुहं से बोलोगे ? और क्या बोलेगे ?
कूछ पल को आँखें बन्द करके चिन्तन करो ! उन बच्चों की जगह आपका बच्चा और इन लोगों की जगह आप या आप की माँ, बहन, बीवी, बेटी हों तो क्या करोगे ? यह लोग आत्महत्या भी नहीं कर सकते क्योंकि इस्लाम में आत्महत्या महापाप है !
किन्तु वे प्रतिदिन अपने मासूमों की लाश से लिपट कर रोने को बाध्य हैं ! क्या इसी का नाम न्याय है ?
आखिर में एक सवाल अब जब कश्मीर में ISIS या कोई आतंकवादी नहीं उन की जगह बेगुनाह लोग मारे जा रहे हैं तो कितने ऐसे अमनपरस्त लोग हैं, जिन्होंने उनके लिए अपनी संवेदना तक प्रकट की हो ? है कोई जवाब ?

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)

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