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"काश्मीरियों का दर्द, हो सके तो पढ़कर महसूस किजिये"
आप कल्पना नहीं कर सकते हैं ये तस्वीरें इतनी दर्दनाक हैं कि देखते ही आखें नम हो जाए, सुबह से सोच में हुँ क्या ऐसा लिख दुँ के उनको भी महसुस हो जो ऐसी हैवानियत के समर्थक हैं, फिर सोचा उन माहान शांतिदूतो को कैसे महसूस होगा जो जलते हुए कश्मीर के बेक़सूर मरहुमों पर भी अभद्र टिप्पणींयाँ की हो, उनको कैसे महसूस होगा जिन्होंने किसी के आंसु नहीं देखे बल्कि विकेट गिन रहे हो,
फिर सोचा हमारी कौम समझेगी लेकिन तब ख्याल आया मुसलमान मरते रहें हैं आए दिन हमारे देश में या फिर किसी न किसी मुस्लिम देश में खून की नदिया बह गयी किस किस को लिखूं...?
कल सीरिया जल रहा था, सूडान, कश्मीर, यमन, लीबिया, हर तरफ बेगुनाह मुसलमानों की तबाही का मंजर था..!
लेकिन फिर भी हम सो रहें थे, मसलेहत और फिरको की चादर ओढ कर. ये कैसे कहें कि मुसलमानो एक हो जाओ, बचा लो देश को साजिशों से ......
फिर सोचा हमारी कौम समझेगी लेकिन तब ख्याल आया मुसलमान मरते रहें हैं आए दिन हमारे देश में या फिर किसी न किसी मुस्लिम देश में खून की नदिया बह गयी किस किस को लिखूं...?
कल सीरिया जल रहा था, सूडान, कश्मीर, यमन, लीबिया, हर तरफ बेगुनाह मुसलमानों की तबाही का मंजर था..!
लेकिन फिर भी हम सो रहें थे, मसलेहत और फिरको की चादर ओढ कर. ये कैसे कहें कि मुसलमानो एक हो जाओ, बचा लो देश को साजिशों से ......
पेरिस मे चार्ली आब्दो पर अटैक हुआ था 11 लोग मारे गए थे , पूरी दुनिया फेसबुक पर अपनी डीपी फ़्रांस के झंडे के रंग में रंग ली थी। फिर फ्रांस में ट्रक द्वारा हमला हुआ सारे शांती दूतो ने अपने-अपने टाइमलाइन पर 5-5 किलोमीटर लमबी पोस्ट चेंप दी।
याद किजिये सीरिया के अलेप्पो शहर में 28 अप्रैल को हमला हुआ हॉस्पिटल समेत सेकड़ों इमारतों को खंडहर बना दिया गया, डॉक्टर और मरीजों समेत 4000 लोग मार दिये गये, किसी की शकल भी नहीं बदली थी , सारी दुनिया चुप थी।
याद किजिये सीरिया के अलेप्पो शहर में 28 अप्रैल को हमला हुआ हॉस्पिटल समेत सेकड़ों इमारतों को खंडहर बना दिया गया, डॉक्टर और मरीजों समेत 4000 लोग मार दिये गये, किसी की शकल भी नहीं बदली थी , सारी दुनिया चुप थी।
अरे हम दुनिया क्यों घुम रहे ? लौट आइऐ और चलिए अपने देश की जन्नत कश्मीर की ओर और देखिए अब तक लगभग 40 की मौत और हजारों घायल पङे हैं और रोजाना तादाद में वृद्धि हो रही, और लोग इसका जायका नमक की तरह स्वादानुसार ले रहे हैं, जैसा कि आप वाकिफ हैं ।
अब जरा कल्पना किजिये वहाँ का मंजर, एक माँ अपने बचचे की लाश को गोद में लेकर कह रही है के उठ जा बेटा तेरे बाबा धर आते ही होंगे खिलौने लेकर, एक बाप अपनी बच्ची की लाश को गोद में लेकर कहता होगा उठो बेटी बहुत अरमान है तुझे पालने से डोली तक का सफर तय करता देखुं, एक बच्चा अपनी छोटी बहन को समझा रहा है की चुप हो जा बाबु अम्मी अब्बू आएगे, एक बच्ची अपने बाप के लाश से कह रही होगी उठो अब्बा जान हमें डर लग रहा है, एक बेटा अपने मां बाप की लाश से कह रहा होगा उठो अम्मी अब्बा अभी तो मैं आप के लिए कुछ किया भी नहीं आपका ख्याल रखुगा आपको हज पर भेजना है, एक बीवी अपने शौहर के लाश से कह रही होगी उठो हमारा कया होगा ? एक शौहर अपनी बीवी से कह रहा होगा उठो हमारे बच्चों का क्या होगा उनका ख्याल कौन रखेगा ? देखो इन तस्वीरों को जहां शब्द किसी की भावनाओं को व्यक्त नहीं कर सकता।
धरती पर इंसान को मारकर मंगल पे जिंदगी तलाश करने वालों आप ऊपर वाले के सामने किस मुहं से बोलोगे ? और क्या बोलेगे ?
कूछ पल को आँखें बन्द करके चिन्तन करो ! उन बच्चों की जगह आपका बच्चा और इन लोगों की जगह आप या आप की माँ, बहन, बीवी, बेटी हों तो क्या करोगे ? यह लोग आत्महत्या भी नहीं कर सकते क्योंकि इस्लाम में आत्महत्या महापाप है !
किन्तु वे प्रतिदिन अपने मासूमों की लाश से लिपट कर रोने को बाध्य हैं ! क्या इसी का नाम न्याय है ?
धरती पर इंसान को मारकर मंगल पे जिंदगी तलाश करने वालों आप ऊपर वाले के सामने किस मुहं से बोलोगे ? और क्या बोलेगे ?
कूछ पल को आँखें बन्द करके चिन्तन करो ! उन बच्चों की जगह आपका बच्चा और इन लोगों की जगह आप या आप की माँ, बहन, बीवी, बेटी हों तो क्या करोगे ? यह लोग आत्महत्या भी नहीं कर सकते क्योंकि इस्लाम में आत्महत्या महापाप है !
किन्तु वे प्रतिदिन अपने मासूमों की लाश से लिपट कर रोने को बाध्य हैं ! क्या इसी का नाम न्याय है ?
आखिर में एक सवाल अब जब कश्मीर में ISIS या कोई आतंकवादी नहीं उन की जगह बेगुनाह लोग मारे जा रहे हैं तो कितने ऐसे अमनपरस्त लोग हैं, जिन्होंने उनके लिए अपनी संवेदना तक प्रकट की हो ? है कोई जवाब ?






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