बुलंदशहर। गायों के संरक्षण को लेकर मोदी सरकार द्वारा चलाई गई मुहिम असर दिखाने लगी है। इसका प्रमाण उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले की एक गौशाला में देखने को मिला है। यहाँ पर गायों के सरक्षण के साथ-साथ गौमूत्र की एक-एक बूंद बचाने का कार्य चल रहा है। विशेषज्ञों की माने तो गाय के दूध से ज्यादा इन दिनों गोमूत्र महंगा हो गया है।
गोमूत्र को लेकर बढ़ते क्रेज का अंदाजा
इसी से लगा सकते हैं कि इन दिनों युवा वर्गों में बड़ी-बड़ी सैलरी वाली
नौकरियाँ छोड़कर गौशाला खोलने की होड़ लग गई है। गुजरात की जूनागढ़
ऐग्रिकल्चर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने गिर नस्ल की गायों के गोमूत्र
में सोना पाए जाने की बात कही थी। उनका कहना है कि करीब 400 नमूनों का
अध्ययन कर यह परिणाम हासिल किया है।
हालांकि गोमूत्र इकट्ठा करना बेहद मुश्किल
कार्य है। क्योंकि हर वक्त इन्हें इकट्ठा करने वालों को तत्पर रहना पड़ता
है, तब जाकर यह 15 से 20 लीटर तक गोमूत्र एकत्रित कर पाते हैं। देशभर में
गोमूत्र के प्रति जागरूकता के पीछे योगगुरु बाबा रामदेव का भी बहुत ज्यादा
योगदान है। उनके पतंजलि आयुर्वेद ने फिनाइल की तर्ज पर ही फ्लोर क्लीनर
गोनाइल को लॉन्च किया है। पतंजलि में हर रोज करीब 20 टन गोनाइल तैयार किया
जाता है। एक रिपोर्ट के मुताबित कुछ मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने यह भी अफवाह
फैलाया था कि पतंजलि के हर उत्पाद में गोमूत्र मिला होता है। इसीलिए ही यह
इस्लाम में हराम है। हालांकि यह आरोप बेबुनियाद निकला है। जाँच में अभी तक
गोमूत्र की पुष्टि नहीं हो पाया है।
ख़ैर केन्द्र की मोदी सरकार गौ संरक्षण को
लेकर लम्बी पारी खेलने की मूड में हैं। शायद इसीलिए गायों की संरक्षण की
पहल के साथ ही मोदी सरकार ने बीते दो सालों में 5.8 अरब रुपये की रकम
गोशालाओं पर खर्च की है। इतना ही नहीं बांग्लादेश को होने वाली गोवंश की
अवैध तस्करी पर रोक लगी है। यही वजह है कि अब लोगों को इसमें कारोबार की
संभावना दिखने लगी है। गोमूत्र को बहुउपयोगी भी बताया जाता है, क्योंकि एक
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गोमूत्र के जरिए घर में ही करीब 30 दवाएं तैयार
की जा सकती है।
Comments