Skip to main content

कभी ‘खराब आवाज’ के लिए स्टूडियो से निकाली गईं, आशा भोसले ने दशकों किया म्यूजिक इंडस्ट्री पर राज; बहन लता मंगेशकर से रही राइवलरी; राइवलरी ने कई मधुर स्वर भी दफ़न किए


पद्मविभूषण से सम्मानित, सुरों की मल्लिका और सबसे ज्यादा गाना रिकॉर्ड करने के लिए ग्रिनीज बुक ऑफ द वर्ल्ड में अपना नाम दर्ज कराने वाली मशहूर गायिका आशा भोसले अब इस दुनिया में नहीं हैं। 10 साल की उम्र से पार्श्व गायन के क्षेत्र में आ चुकी आशा भोसले ने 92 साल की उम्र तक अपनी गायकी को खुद से अलग नहीं होने दिया। 80 साल की सिंगिग करियर में उन्होंने 12000 से ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए। ये 20 से ज्यादा भाषाओं में थे।

उनकी मौत संगीत के कद्रदानों के लिए बड़े सदमे से कम नहीं है। 12 अप्रैल 2026 को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अंतिम साँस ली। एक दिन पहले उन्हें हार्ट अटैक आया था, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

कुछ समय पहले यूके बेस्ड ‘गोरिलाज’ के साथ जुड़ीं, जो वर्चुअल बैंड हैं। इस बैंड की थीम है कि कला को किसी रंग या रूप में नहीं पहचाना जा सकता, इसलिए इनका कोई चेहरा नहीं है यानी इसमें एनिमेटेड कैरेक्टर है। इसके एलबम द माउंटेन के लिए आशा भोसले ने गाना गाया। इसे सुनकर कोई भी रो देगा।

91 साल में लाइव परफॉर्म किया

2025 में 91 साल की उम्र में आशा भोसले ने लाइव परफोर्म करके दर्शकों का मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके गाने के अंदाज की कॉपी करने की कई कलाकारों ने कोशिश की, लेकिन असली तो फिर असली होता है। वह सबसे अलग और अनोखा होता है।

हर दौर में नए तेवर और नए अंदाज में वह आईं और अपनी आवाज का जादू बिखेरा। कव्वाली से लेकर शास्त्रीय संगीत तक हर गाना खुद में आइकॉनिक है। उनके करियर की शुरुआत 1943 में हुई थी। पिता दीनानाथ मंगेशकर के निधन के बाद जब परिवार संभालने की जिम्मेदारी दीदी लता मंगेशकर पर आई तो उन्होंने बड़ी बहन का पूरा साथ दिया। उन्होंने पहला गाना मराठी फिल्म के लिए गाया।

उस रिकॉर्डिंग को याद करते हुए उन्होंने अपने इंटरव्यू में बताया था कि उनके पैर हाथ काँप रहे थे। उन्हें पता नहीं था कि माइक क्या होता है और इस पर कैसे गाया जाता है। लेकिन जब गाना गा लिया, तो उन्हें एहसास हुआ कि वह भी गा सकती हैं, सिर्फ दीदी ही नहीं। वहाँ से नई जिंदगी शुरू हुई।

बॉलीवुड में उन्होंने फिल्म ‘चुनरिया’ के लिए 1948 में गीता दत्त और शमशाद बेगम के साथ पहला गाना रिकॉर्ड किया था। उस गाने के बोल थे- सावन आया रे। 1949 में उन्होंने फिल्म रात की रानी में अपना पहला सोलो गाना रिकॉर्ड किया। बहन लता मंगेशकर के लिए यह साल वरदान साबित हुआ। फिल्म महल में गाने से वह रातोरात कामयाबी के शिखर पर चढ़ गईं। 1950 आते आते लता मंगेशकर दिग्गज संगीतकारों की पहली पसंद बन चुकी थीं। बहन के साए में आशा भोसले को मात्र बी ग्रेड की फिल्में ही ऑफर की जाती। बड़े संगीतकार उनसे दूर थे।

16 साल की उम्र में घर से भाग कर शादी की

ऐसे समय में 16 साल की उम्र में आशा भोसले ने 31 साल के लता मंगेशकर के सेक्रेटरी गणपतराव भोसले संग घर से भाग कर शादी रचा ली। परिवार ने बहुत विरोध किया और इसके बाद दोनों बहनों के रिश्तों में दरार आ गई, जो लंबे वक्त तक चली।

एक इंटरव्यू में आशा भोसले ने खुद माना था कि लता दीदी उनकी शादी के खिलाफ थीं। उनके रिश्ते इसके बाद कड़वे हो गए और सालों तक दोनों बहनों में बातचीत भी नहीं हुई। दूसरी तरफ ये शादी सचमुच आशा भोसले के लिए किसी त्रासदी से कम नहीं थी। रूढिवादी परिवार को ‘सिंगर बहू’ से काफी एतराज था। पति से भी वह काफी परेशान रहीं। उनकी निजी जिंदगी में उथल-पुथल मचा था और करियर का भी बुरा हाल था।

संगीतकार ओपी नय्यर ने  दी आशा को नई आशा  

आशा भोसले की करियर में बदलाव फिल्म परिणीता (1953) से आई। 1954 में राजकपूर ने उन्हें फिल्म बूट पॉलिश में गाने का मौका दिया। संगीतकार ओपी नय्यर का मानना था कि वह लता मंगेशकर के बगैर भी सुपरहिट गाने दे सकते हैं। उन्होंने आशा भोसले को अपनी फिल्मों में गाने का मौका दिया। फिल्म सीआईडी के गानों के हिट होते ही आशा भोसले उनकी पसंदीदा गायिका बन गईं।

नय्यर का साथ आशा भोसले के लिए बेहतरीन दौर साबित हुआ। इस जोड़ी ने एक के बाद एक कई हिट गाने दिए। इन गानों ने आशा को वह मुकाम दिया, जिससे वह अपनी बहन लता मंगेशकर की परछाई से बाहर निकल गईं। ओपी नय्यर के साथ उन्होने 60 फिल्मों के करीब 324 गीत गाए।

फिल्म नया दौर (1957) के हिट गानों के बाद हर एक की जुबान पर उनका नाम था। इसी वक्त एसडी बर्मन और लता मंगेशकर में मनमुटाव हुआ और आशा के जीवन में नया मोड़ आया।

लता से राइवलरी और सालों तक बातचीत बंद

आशा भोसले, किशोर कुमार,एसडी बर्मन और मजरूह सुल्तानपुरी की चौकड़ी ने चुलबुले गीतों का नया ट्रेंड विकसित किया, जो आसानी से हर दिलों तक पहुँच जाता था।

आज भी ‘चलती का नाम गाड़ी’, ‘पेइंग गेस्ट’, ‘बंबई का बाबू’ जैसी फिल्मों के गीत लोग गुनगुनाते हैं। फिल्म ‘काला पानी’ में ‘अच्छा जी मैं हारी’ रोमांटिक गीत का शोखभरा अंदाज से लेकर ‘सुजाता’ और ‘लाजवंती’ के बेहद गंभीर गानों में आशा की आवाज हर रंग में माहिर दिखी।

इसके बावजूद लता मंगेशकर की तुलना में आशा भोसले को काफी कम मेहनताना मिलता था। 1960 में जब लता एक गाने के लिए 500 रुपए लेती थीं, तो आशा को मात्र 100-150 रुपए मिलते थे। मशहूर डायरेक्टर सई परांजपे ने फिल्म साज में ऐसी ही दो बहनों की कहानी दिखाई है जो संगीत की दुनिया की बादशाह थीं।

राइवलरी ने अनेक गायिकाओं को नहीं उभरने दिया 

इन बहनों का इतने सालों तक फिल्म जगत में एकाधिकार इस लिए रहा कि इन्होने कभी किसी अन्य गायिका को अपने से ऊपर उठने नहीं दिया। राइवलरी ने कई गायिकाओं का जीवन भी चौपट किया। कभी किसी गायिका को उभरने नहीं दिया। राजकपूर, शैलेन्द्र, हसरत जयपुरी, मुकेश और शंकर-जयकिशन की जोड़ी को फिल्म जगत भुला नहीं सकता। फिल्म 'सूरज' में संगीतकार शंकर ने नयी गायिका शारदा को प्रस्तुत करने के बाद फिल्म 'अराउंड द वर्ल्ड' में प्रस्तुत करना शंकर को बहुत भारी पड़ गया। जयकिशन की मृत्यु उपरांत लता ने शंकर के संगीत निर्देशन में गायिकी से मना कर दिया। शंकर अल्लाह भरोसे आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। क्योकि कोई लता को छोड़ना नहीं चाहता था। निर्माता-निर्देशक सोहन लाल कंवर अपनी फिल्म 'सन्यासी' में संगीत शंकर और गायिका लता को लेने की जिद किये हुए थे तब शंकर के लिए संकटमोचन मुकेश बने और लता को भाई-बहन का वास्ता देकर बड़ी मुश्किल से राजी किया।            

आशा भोसले को स्टूडियों से निकाला गया

आशा भोसले को एक बार रिकॉर्डिंग रुकवा कर स्टूडियो से बाहर निकाला गया था। ये घटना 1947 की है। आशा भोसले और किशोर कुमार फेमस स्टूडियों में फिल्म ‘जान पहचान’ के लिए एक गाना रिकॉर्ड कर रहे थे। इस फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर खेमचंद प्रकाश थे। उन्होंने खराब आवाज बोल कर रात 2 बजे दोनों की रिकॉर्डिंग बंद करवा दी और बाहर जाने को कह दिया।

करीब 10 साल बाद किशोर कुमार ने इस अपमान का बदला लिया। उन्हें फेमस स्टूडियो में रिकॉर्ड के लिए बुलाया गया। उस दिन आशा भोसले भी गाने के लिए पहुँची थीं। जब डायरेक्टर ने उन्हें गाने के लिए कहा तो उन्होंने कहा कि आप ने तो हमारी आवाज को खराब बता कर रिकॉडिंग रुकवा दी थी। आज देखिए हम कहाँ हैं।

पंचम दा का साथ और आशा की दूसरी शादी

1960 में आशा भोसले अपने तीन बच्चों के साथ पति से अलग हो गईं। 1966 में तीसरी कसम में उन्होंने पहली बार आर डी बर्मन के साथ काम किया। हालाँकि उनके पिता एसडी बर्मन के साथ काम करते वक्त उनकी मुलाकात आर डी बर्मन से होती रहती थी। इस जोड़ी ने सुरों को नया आयाम दिया।

आर डी बर्मन यानी पंचम दा ने पश्चिमी मिजाज को भारतीय संगीत के रंग में रंगा और आशा की आवाज उसमें कशिश डाल देती। इससे दुनिया ने आशा की आवाज की उस ऊँचाई से वाकिफ हुई, जो अब तक अनसुना था। कैबरे हो या गजल, शास्त्रीय हो या पाश्चात्य, हर जटिलता को आसान बना कर गीतों में पिरोया। 1980 की शुरुआत में दोनों ने शादी की लेकिन दशक के अंत तक अलग भी हो गए। इसकी वजह संगीतकार के नशे की आदत बताई गई। हालाँकि अलग होने के बाद भी दोनों की दोस्ती कायम रही।

Comments

AUTHOR

My photo
shannomagan
To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)

Popular posts from this blog

बिस्तर पर इंदिरा किसी मर्द से कम न थी:--M.O MATHAI

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  जब हम पूर्व प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी की बात करते हैं, तो कई कांग्रेसी कहते हैं कि वह भारत की आयरन लेडी हैं; उसने पाकिस्तान को दो भागों में विभाजित किया और कई और अधिक लेकिन क्या वे उनके अंधेरे रहस्यों के बारे में बात करेंगे? देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के जीवन से जुड़े कुछ रहस्‍यों का खुलासा एक नई किताब में किया गया है। वरिष्‍ठ टीवी पत्रकार सागरिका घोष की लिखी किताब Indira: India’s Most Powerful Prime Minister में इंदिरा और फीरोज गांधी के रिश्‍तों पर नई रोशनी डाली गई है। किताब के अनुसार, ‘फीरोज ने 1955 में जब जीवन बीमा का राष्‍ट्रीयकरण किया, प्रेस का संसदीय कार्यवाही की रिपोर्ट‍िंग की आजादी दिलाई, हालांकि बाद में इस कानून को इंदिरा ने ही इमरजेंसी के दौरान कुचल दिया। सागरिका की किताब के अनुसार, दिल्‍ली में फीरोज को नेहरू की मौजूदगी से घुटन होती थी और तीन मूर्ति भवन में रहना उनके लिए असहनीय हो गया था। फीरोज की आशिक-मिजाजी के किस्‍से दिल्‍ली के गलियारों में सुनाई देने लगे थे। वह अक्‍सर तारकेश्‍वरी सिन्‍हा, महमूना सुल्‍तान और सुभद...

कायस्थ कौन हैं ?

सर्वप्रथम तो ये जान लें आप सब कि ना तो मै जातिवादी हुँ और ना ही मुझे जातिवादी बनने का शौक है और ना ही कायस्थ समाज को जागृत करने मे मेरा कोई स्वार्थ छिपा है। मै कल भी एक कट्टर सनातनी था आज भी एक कट्टर सनातनी हुँ और विश्वास दिलाता हुँ सनातन धर्म के प्रति मेरी ये कट्टरता भविष्य मे भी बनी रहेगी। इन शब्दों के बावजूद भी हमे कोई जातिवादी कहे तो मै बस इतना ही कहुँगा कि कुत्तो के भौकने से हाथी रास्ता नही बदला करते। मै ‘कायस्थ समाज’ से संबंध रखता हूँ । जो मेरे मित्र इस से सर्वथा अपरिचित हैं, उनकी जानकारी के लिए बता दुँ कि उत्तर भारत के बहुलांश क्षेत्रों मे कायस्थों की जबर उपस्थिति मौजूद है, हालांकि यह समाज देश के अन्य हिस्सों मे भी विद्यमान है । इनकी जनसंख्या काफी सीमित है परंतु इस वर्ग से संबन्धित सम्मानित महापुरुषों , विद्वानो, राजनेताओ , समाज सेवियों की एक लंबी फेहरिस्त मिलेगी जिन्होंने अपनी विद्वता, कर्मठता और प्रतिभा का लोहा पूरे विश्व मे मनवाया है । सम्राट अकबर के नवरत्न बीरबल से लेकर आधुनिक समय मे स्वामी विवेकानंद , राजा राम मोहन रॉय , महर्षि अरविंद ,श्रीमंत शंकर देव ,महर्षि महेश...

भोजपुरी एक्ट्रेस त्रिशा कर मधु का MMS…सोशल मीडिया पर हुआ लीक

सोशल मीडिया पर भोजपुरी एक्ट्रेस और सिंगर त्रिशा कर मधु का MMS लीक हो गया है, जिससे वो बहुत आहत हैं, एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां किया है, त्रिशा मधु ने इस बात को कबूल किया है कि वीडियो उन्होंने ही बनाया है लेकिन इस बात पर यकीन नहीं था कि उन्हें धोखा मिलेगा। गौरतलब है कि हाल ही में त्रिशा का सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा था जिसमें वह एक शख्स के साथ आपत्तिजनक स्थिति में नजर आ रही थीं। इस वीडियो के वायरल होने के बाद अभिनेत्री ने इसे डिलीट करने की गुहार लगाई साथ ही भोजपुरी इंडस्ट्री के लोगों पर उन्हें बदनाम करने की साजिश का आरोप लगाया। त्रिशा मधु कर ने अपने फेसबुक पेज पर एक वीडियो के साथ पोस्ट लिखा है जिसमें कहा, आप लोग बोल रहे हैं कि खुद वीडियो बनाई है। हां, हम दोनों ने वीडियो बनाया थ। पर मुझे ये नहीं मालूम था कि कल को मेरे साथ धोखा होने वाला है। कोई किसी को गिराने के लिए इतना नीचे तक गिर जाएगा, यह नहीं पता था। इससे पहले त्रिशा ने वायरल हो रहे वीडियो पर अपना गुस्सा जाहिर किया था और कहा था कि उनको बदनाम करने को साजिश की जा रही है। त्रिशा मधु कर ने सोशल मीडिया पर ए...