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पाकिस्तान में सिखों की पगड़ी उछलने पर सिल लेते हैं मुँह, ‘धुरंधर-2’ की कामयाबी से पेट में उठ रहीं मरोड़


फिल्म ‘धुरंधर-2: द रिवेंज’ ने पर्दे पर आते ही कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और ₹1000 करोड़ का जादुई आँकड़ा पार कर लिया है। एक तरफ दुनिया भर के लोग इस फिल्म को सिर आँखों पर बैठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ वामपंथी और कट्टरपंथी लोग इस कामयाबी को हजम नहीं कर पा रहे हैं। इस फिल्म को नीचा दिखाने और बदनाम करने के लिए अब गंदी चालें चली जा रही हैं।

फिल्म के खिलाफ माहौल बनाने के लिए AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का सहारा लेकर झूठे वीडियो और फोटो फैलाए जा रहे हैं। साजिश यह है कि किसी तरह सिखों की धार्मिक भावनाओं को भड़काया जाए और भाईचारे में जहर घोला जाए। यह सिर्फ एक फिल्म का विरोध नहीं है, बल्कि सच्चाई को दबाने की एक बड़ी कोशिश है, ताकि लोग फिल्म के जरिए दिखाए गए असल मुद्दों से भटक जाएँ। वहीं, असल में जो जुल्म और हमले सिखों पर होते है उन पर चुप्पी साध लेते है और उन खबरों को दबा दिया जाता है।

‘फेक’ सिगरेट वाली तस्वीर और ईशनिंदा के नाम पर उत्पीड़न

फिल्म में रणवीर सिंह ने ‘हमजा’ उर्फ ‘जसकिरत सिंह’ का किरदार निभाया है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो और तस्वीरें वायरल हुईं, जिसमें रणवीर सिंह को पगड़ी पहने हुए सिगरेट पीते दिखाया गया है। हालाँकि, फिल्म के डायरेक्टर आदित्य धर ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से AI द्वारा निर्मित फेक कंटेंट है।
आदित्य धर ने चेतावनी देते हुए कहा, “एक झूठी तस्वीर में गलत तरीके से दिखाया गया है कि जसकिरत पगड़ी पहनकर सिगरेट पी रहा है। यह हमारे फिल्म या किसी आधिकारिक प्रचार सामग्री का हिस्सा नहीं है। यह जानबूझकर बनाया गया झूठ है, जिसे फसाद फैलाने के लिए फैलाया जा रहा है।”
आदित्य धर ने साफ किया कि फिल्म में सिख समुदाय का सर्वोच्च सम्मान किया गया है और प्रोपेगेंडा फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिल्म ‘धुरंधर-2’ ने उस सच पर से पर्दा उठाया है जिस पर अक्सर वामपंथी और कट्टरपंथी चुप्पी साधे रहते हैं। फिल्म के एक सीन में दिखाया गया है कि कैसे एक सिख व्यक्ति पर कुरान जलाने का झूठा आरोप लगाकर उसे ‘ईशनिंदा’ (Blasphemy) के जाल में फँसा दिया जाता है। यह कोई फिल्मी कल्पना नहीं, बल्कि पाकिस्तान की कड़वी सच्चाई है। पाकिस्तान में ईशनिंदा कानूनों का इस्तेमाल अक्सर हिंदू और सिख अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने, उनकी जमीनें हड़पने या उन्हें मौत के घाट उतारने के लिए किया जाता है।

पगड़ी उछालना और जबरन धर्मांतरण: गायब है ‘लिबरल’ गिरोह

फिल्म ‘धुरंधर’ को बदनाम करने के वाले यह तत्व पाकिस्तान में सिखों पर हो रहे असली जुल्मों पर एक शब्द नहीं बोलते हैं। पाकिस्तान के फैसलाबाद में एक सिख छात्रा के साथ स्कूल में मारपीट की गई और उसकी पगड़ी जबरन उतार दी गई। छात्रा को पेट में लात मारी गई, जबकि वह अस्थमा की मरीज थी।

इसी तरह, खैबर पख्तूनख्वा और नानकाना साहिब में सिख लड़कियों और महिलाओं का अपहरण कर जबरन इस्लाम में धर्मांतरण कराना एक धंधा बन गया है। आँकड़े बताते हैं कि बँटवारे के वक्त पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की आबादी 14-15 प्रतिशत थी, जो आज घटकर महज 2-3 प्रतिशत रह गई है।

हर साल लगभग 1000 हिंदू, सिख और ईसाई लड़कियों का अपहरण कर जबरन निकाह कराया जाता है। अमेरिका तक ने पाकिस्तान को ‘विशेष चिंता वाला देश’ घोषित किया है, लेकिन ‘धुरंधर’ फिल्म को बदनाम करने वाले लोग इन असली ‘नरसंहारों’ पर मौन साधे रहते हैं।

FAKE न्यूज के पीछे का असली एजेंडा

‘धुरंधर-2’ जैसी फिल्में जब सच को बड़े पर्दे पर लाती हैं, तो फेक क्लिप और फेक न्यूज का बाजार गर्म होना तय है। जो लोग फिल्म में एक काल्पनिक सीन को ‘मजहबी अपमान’ बताने के लिए फेक AI वीडियो बना रहे हैं, क्या उनके पास उन सिख लड़कियों के आंसू पोंछने के लिए वक्त है जिनकी पगड़ी पाकिस्तान के फैसलाबाद में उछाली जा रही है?
वामपंथी और कट्टरपंथी संगठनों का यह गठबंधन असल में ‘विचारधारा’ की लड़ाई नहीं, बल्कि ‘सच को दबाने’ की साजिश है। उन्हें रणवीर सिंह के पगड़ी पहनने से दिक्कत नहीं है, उन्हें दिक्कत इस बात से है कि फिल्म ने पाकिस्तान के उस खौफनाक चेहरे को बेनकाब कर दिया है, जिसे वे सालों से ‘भाईचारे’ की चादर में लपेटकर छिपाते आए हैं।
सिखों की धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल कर फिल्म को बैन कराने की कोशिश करना इन कट्टरपंथियों का नया हथियार है। लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि सिख धर्म और उसके प्रतीकों का सम्मान जितना भारतीय सिनेमा और समाज करता है, उतना पाकिस्तान जैसे मुल्कों में कभी नहीं हुआ। फिल्म ‘धुरंधर-2’ ने केवल मनोरंजन नहीं किया, बल्कि उन हजारों मूक चीखों को आवाज दी है जिन्हें पाकिस्तान की बंद कोठरियों में जबरन धर्मांतरण और ईशनिंदा के नाम पर दबा दिया गया।
हमें समझना होगा कि जब भी कोई फिल्म ‘असुविधाजनक सच’ दिखाएगी, तो उसे बदनाम करने के लिए ‘फेक नैरेटिव’ का सहारा लिया जाएगा। दर्शक अब जागरूक हैं, वे जानते हैं कि असली अपमान पगड़ी पहनने वाले किरदार का नहीं, बल्कि उन लोगों का है जो सिखों के अधिकारों पर पाकिस्तान में खामोश रहकर भारत में हिंसा भड़काने की साजिश रचते हैं।


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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)

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