धुरंधर-2 से समाजवादी पार्टी और कांग्रेस बेनकाब; ‘अतीक अहमद’ का पाकिस्तानी कनेक्शन दिखाए जाने पर छाती पीट रहे प्रोपेगेंडाबाज, माफिया के लिए उमड़ा प्रेम
धुरंधर द रिवेंज, अतीफ और माफिया अतीक अहमद ( फोटो साभार- x@dhurandharfc)
फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ में करीब 7-9 मिनट का उत्तर प्रदेश के माफिया डॉन का किरदार है। उसका नाम है अतीफ अहमद। फिल्म में उसके आईएसआई कनेक्शन, हथियारों की तस्करी और जाली नोट का धंधा करने वाला दिखाया गया है। इसको लेकर एसपी-कांग्रेस और तमाम वामपंथियों की भौहें चढ़ गई हैं।
इनका कहना है कि ये पूर्व एसपी सांसद और माफिया अतीक अहमद को दिखाया गया है। लेकिन उसकी हत्या के बाद उसे इस तरह से पाकिस्तान से कनेक्शन दिखाना गलत है। जबकि सच यह है कि अतीक अहमद का पाकिस्तान से न सिर्फ संबंध था बल्कि उसके सारे काले कारनामे पाकिस्तान की मदद से चलते थे। अपना खौफ पैदा करने के लिए वह जिन हथियारों का इस्तेमाल करता था, वह पाकिस्तान से आते थे।
ISI और आतंकियों से कनेक्शन
फिल्म में इलाहाबाद और उत्तर प्रदेश का जिक्र करते हुए अतीफ का आईएसआई से कनेक्शन दिखाया गया है। आईएसआई से हथियारों की तस्करी, नकली नोट नेपाल के रास्ते भारत में लाकर खपाना और उत्तर प्रदेश में किसकी सरकार बनेगी, इसमें हस्तक्षेप करना। फिल्म में उसका मर्डर भी लगभग उसी तरह दिखाया गया है, जैसा रियल में हुआ था।
हालाँकि, फिल्म में ये दिखाया गया है कि उसकी हत्या की योजना भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजय सान्याल ने की थी। जबकि असल मे अतीक और उसके भाई अशरफ की हत्या 15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज में पुलिस कस्टडी में गोली मारने से हुई थी। मुख्यमंत्री योगी के कानून व्यवस्था सख्त किए जाने के बाद उत्तर प्रदेश में माफिया राज का खात्मा हुआ।
इसको लेकर फिल्म में दिखाया गया है कि जेल में अतीफ की आईएसआई के हेड से बात होती है, वह 60,000 करोड़ जाली नोट लाने के लिए तैयार हो जाता है। उत्तर प्रदेश चुनाव को प्रभावित करने के लिए इन जाली नोटों का इस्तेमाल करने का प्लान था। इस बीच उसकी हत्या हो जाती है। इस वजह से कांग्रेस और समाजवादी पार्टी फिल्म को प्रोपेगेंडा बता रही है।
समाजवादी पार्टी के नेता पूर्व सांसद एसटी हसन का कहना है कि अतीक के मामले में किसी भारतीय जाँच एजेंसी ने आईएसआई कनेक्शन का खुलासा नहीं किया था। लेकिन फिल्म में अतीफ अहमद के नाम के किरदार का कनेक्शन दिखाया गया है। जबकि हकीकत ये है कि अतीक अहमद का कनेक्शन आईएसआई के साथ साथ जम्मू कश्मीर के आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा से था। अतीक अहमद के ISI से सीधे जुड़ाव को दिखाए जाने पर अगर समाजवादी पार्टी के नेता अतीक अहमद की पैरवी कर रहे हैं, तो ये काफी शर्म की बात है।
उसकी हत्या से कुछ दिनों पहले प्रयागराज पुलिस ने अप्रैल 2023 में उमेश पाल हत्याकांड का चार्जशीट दाखिल किया था। इसमें अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद को हथियार तस्करी का भी आरोपी बनाया गया था। चार्जशीट के मुताबिक, उसके आईएसआई और लश्कर ए तैयबा से सीधे संबंध थे। आईएसआई के एजेंट से फोन पर बात होती थी। पंजाब में पाकिस्तान से हथियार ड्रोन के माध्यम से गिराए जाते थे। कोई लोकल एजेंट इसे उठाता था और अतीक अहमद गैंग तक पहुँचाता था। लश्कर ए तैयबा और दूसरे आतंकियों को भी ये हथियार सप्लाई किए जाते थे।
चार्जशीट में कहा गया है कि अगर पुलिस अतीक को उन जगहों पर ले जाए, तो वह हथियार और गोला बारूद तक बरामद करवा सकता है। पुलिस ने इसी बयान पर एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस ने जब उसके घर की तलाशी ली थी तो पाकिस्तानी कारतूस और हथियार भी बरामद हुई थी।
पूर्व DGP विक्रम सिंह के मुताबिक, “इस बारे में कोई शक नहीं होना चाहिए। जब अतीक अहमद जिंदा था, तो उसके गैंग को IS-277(इंटरस्टेट-277) के तौर पर लिस्ट किया गया था। अपने कबूलनामे में उसने माना था कि 0.45 कैलिबर की पिस्तौल, AK-47 और RDX आदि पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए पंजाब पहुँचते थे और वहाँ से उस तक पहुँचते थे। उसके संबंध लश्कर-ए-तैयबा और ISI से भी थे। जब अतीक के घर की तलाशी ली गई थी तो पाकिस्तानी कारतूस और हथियार बरामद हुए थे।“
Lucknow, Uttar Pradesh: On the portrayal of Mafia Don Atiq Ahmed’s direct connection to ISI in the movie Dhurandhar 2, former DGP Vikram Singh says, "There should be no doubt about this. When Atiq Ahmed was alive, his gang was listed as IS-277 (Interstate-277). In his… pic.twitter.com/goQywlimpx
— IANS (@ians_india) March 21, 2026
जेल से चलाता था अपना साम्राज्य
फिल्म में दिखाया गया है कि जेल में बंद अतीफ अहमद अपना काम जेल से आराम से चलाता था। उसे फोन मिल जाते थे और वह आईएसआई से बात करता था। सारी प्लानिंग हो जाती थी। हकीकत में भी अतीक अहमद जेल में रहे या बाहर। उसके काले कारनामें चलते रहते थे।
इसमें तो किसी को शक नहीं होना चाहिए कि जब समाजवादी पार्टी की सरकार उत्तर प्रदेश में थी, तो अतीक अहमद की तूती बोलती थी। इलाहाबाद और आसपास के इलाकों में वह खौफ का पर्याय हुआ करता था। यहाँ तक कि जब सरकार ने अवैध कब्जा की गई जमीन की नीलामी करने की कोशिश की, तो उसे लेने कोई सामने नहीं आया।
लोगों की जमीनों पर कब्जा करना, गुंडागर्दी, किसी को भी उठवा कर मार देना जैसी हरकतें आज भी लोगों की जुबान पर हैं। फिल्म में जिस तरह से अतीफ अहमद का आईएसआई कनेक्शन दिखाया गया है।
असल में वह भी उसकी मौत से पहले बाहर आ चुका था। खुद उसने इसे स्वीकार किया था। अब फिल्म में अतीफ के किरदार पर सवाल उठाने वालों का कहना है कि अगर उसका पाकिस्तान से कनेक्शन था तो फिर उसकी हत्या पर संसद में क्यों दुख जताया गया। अतीक अहमद पूर्व सांसद था और उसकी मौत पर संसद में श्रद्धांजलि एक सांसद को दिया गया था, न की पाकिस्तानी कनेक्शन वाले माफिया को।
उत्तर प्रदेश सरकार में दखल रखता था अतीक अहमद
फिल्म में दिखाया गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार में अतीफ का अच्छा खासा दखलंदाजी है। नोटबंदी के बाद आईएसआई के चीफ और आतिफ के बीच बातचीत होती है। अतीफ कहता है कि यूपी गया अपने हाथ से…हार जाएँगे चुनाव, आगे अल्लाह की मर्जी..। इसको देखकर बताया जा सकता है कि ये किस वक्त की बात है।
दरअसल माफिया अतीक अहमद ने 1989 में पहली बार इलाहाबाद पश्चिम सीट से विधानसभा चुनाव जीतकर राजनीतिक में सक्रिय हुआ था। उसके बाद वह लगातार चुनाव जीतता रहा। 2004 में वह समाजवादी पार्टी की टिकट पर फूलपुर से लोकसभा चुनाव जीता। उसकी समाजवादी पार्टी के सत्ता पर काबिज रहने के दौरान तूती बोलती थी।
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