दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार एक नई मुसीबत में घिर गयी है। आरोप है कि केजरीवाल के आवास पर फरवरी 19 की देर रात आम आदमी पार्टी के विधायकों ने दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ मारपीट की और उनके लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि केजरीवाल के आवास पर हुई बैठक के दौरान आप के दो विधायकों ने मुख्य सचिव के साथ बदसलूकी की। इस बीच, मुख्य सचिव ने उप-राज्यपाल अनिल बैजल को इस घटना से अवगत कराया है।
फरवरी 19 रात जब आप सब नींद में थे उस वक्त दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर पर जबरदस्त ड्रामे की स्क्रिप्ट लिखी जा रही थी। बहस और उसके बाद वो हुआ जो आज तक देश में कभी भी, कहीं भी नहीं हुआ। केजरीवाल के विधायकों ने गुंडागर्दी की हदें पार करते हुए मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ हाथापाई की और उन्हें थप्पड़ मारे। इस ‘थप्पड़ कांड’ पर आप बहुत कुछ पढ़ और देख चुके हैं। इस पर भी बात करेंगे, पहले जाने लेते हैं कि दिल्ली सरकार और आम आदमी पार्टी की तरफ से कहा जा रहा है कि यह बैठक दिल्ली में राशन के मुद्दे पर बुलाई गई थी।आप का कहना है कि उक्त बैठक सरकारी योजना के गलत क्रियान्यवन पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी। आप का दावा है कि आधार कार्ड का वितरण सही ढंग से नहीं हुआ है जिसके चलते करीब 2.5 लाख परिवारों को राशन से वंचित होना पड़ा है। जबकि प्रकाश का दावा है कि चर्चा का केंद्र में टेलीविजन विज्ञापन थे। लेकिन इसमें भी एक जबरदस्त ट्विस्ट है।
जिला अध्यक्ष अरविन्द गर्ग और सुश्री गीता चौहान के नेतृत्व में इस प्रदर्शन चावड़ी बाजार मेट्रो के निकट हौज़ काज़ी चौक पर फरवरी 22 को किया गया।
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दिल्ली सरकार और मुख्यमंत्री कार्यालय का भी दावा है कि देर रात 11 बजे मुख्यमंत्री आवास पर बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में जनता को घर-घर राशन पहुंचाने के मुद्दे को लेकर चर्चा हुई और इसी संबंध में यह बैठक देर रात बुलाई गई थी। जनता के मुद्दे पर दिल्ली सरकार देर रात को भी काम कर रही है यह सोचकर आप खुश हो सकते हैं। लेकिन यहां ट्विस्ट ये है कि जिस व्यक्ति की जिम्मेदारी जनता तक राशन पहुंचाने की है, वह इस मीटिंग में मौजूद ही नहीं था। जी हां, यहां हम दिल्ली के खाद्य मंत्री इमरान हुसैन की बात कर रहे हैं। जब खाद्य मंत्री ही मीटिंग में मौजूद नहीं था तो देर रात केजरीवाल के घर मीटिंग किस बात को लेकर थी। ऐसे में यह शक और ज्यादा गहरा जाता है कि साजिश के तहत ही मुख्य सचिव को बुलाया गया और फिर उनके साथ बदसलूकी की गई।
अवलोकन करें :--
वर्तमान आम आदमी पार्टी को नहीं मालूम कि मुख्य सचिव का किसी राज्य में कितना महत्व होता है। और जो आदमी मीटिंग में मौजूद नहीं था, वह किस आधार पर पुलिस में शिकायत दर्ज करवा रहा है? फिर पहले तो अमानुल्ला छिपा-छिपा फिर रहा था, और जब पुलिस गिरफ़्तारी से बचने आत्मसमर्पण करने आया तो अपनी मुस्लिम टोपी पहनकर। यानि चाल बहुत गहरी थी, अर्थात अगर पुलिस धक्का-मुक्की होने की स्थिति में सिर से टोपी गिरते ही मामले को साम्प्रदायिक रंग देने की साज़िश।
यह घटना सामने आने पर भाजपा और कांग्रेस केजरीवाल पर निशाना साधा है। दोनों पार्टियों ने मुख्यमंत्री केजरीवाल से माफी मांगने के लिए कहा है। जबकि केजरीवाल के कार्यालय की ओर से कहा गया है कि आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है और आरोप निराधार हैं।
फरवरी 19 रात जब आप सब नींद में थे उस वक्त दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर पर जबरदस्त ड्रामे की स्क्रिप्ट लिखी जा रही थी। बहस और उसके बाद वो हुआ जो आज तक देश में कभी भी, कहीं भी नहीं हुआ। केजरीवाल के विधायकों ने गुंडागर्दी की हदें पार करते हुए मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ हाथापाई की और उन्हें थप्पड़ मारे। इस ‘थप्पड़ कांड’ पर आप बहुत कुछ पढ़ और देख चुके हैं। इस पर भी बात करेंगे, पहले जाने लेते हैं कि दिल्ली सरकार और आम आदमी पार्टी की तरफ से कहा जा रहा है कि यह बैठक दिल्ली में राशन के मुद्दे पर बुलाई गई थी।आप का कहना है कि उक्त बैठक सरकारी योजना के गलत क्रियान्यवन पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी। आप का दावा है कि आधार कार्ड का वितरण सही ढंग से नहीं हुआ है जिसके चलते करीब 2.5 लाख परिवारों को राशन से वंचित होना पड़ा है। जबकि प्रकाश का दावा है कि चर्चा का केंद्र में टेलीविजन विज्ञापन थे। लेकिन इसमें भी एक जबरदस्त ट्विस्ट है।
ट्विस्ट
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भारतीय जनता पार्टी ज़िला चांदनी चौक के मटिया महल और बल्लीमारन विधानसभा के कार्यकर्ताओं द्वारा अरविंद केजरीवाल की सरकार में विधायकों कि गुंडागर्दी के खिलाफ प्रदर्शन।
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| मुख्य सचिव के साथ हुई मारपीट के विरुद्ध हौज़ काज़ी चौक पर प्रदर्शन करते सीताराम बाजार, बल्लीमारान और मिंटो रोड मंडल के कार्यकर्ता |
जिला अध्यक्ष अरविन्द गर्ग और सुश्री गीता चौहान के नेतृत्व में इस प्रदर्शन चावड़ी बाजार मेट्रो के निकट हौज़ काज़ी चौक पर फरवरी 22 को किया गया। -----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
दिल्ली सरकार और मुख्यमंत्री कार्यालय का भी दावा है कि देर रात 11 बजे मुख्यमंत्री आवास पर बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में जनता को घर-घर राशन पहुंचाने के मुद्दे को लेकर चर्चा हुई और इसी संबंध में यह बैठक देर रात बुलाई गई थी। जनता के मुद्दे पर दिल्ली सरकार देर रात को भी काम कर रही है यह सोचकर आप खुश हो सकते हैं। लेकिन यहां ट्विस्ट ये है कि जिस व्यक्ति की जिम्मेदारी जनता तक राशन पहुंचाने की है, वह इस मीटिंग में मौजूद ही नहीं था। जी हां, यहां हम दिल्ली के खाद्य मंत्री इमरान हुसैन की बात कर रहे हैं। जब खाद्य मंत्री ही मीटिंग में मौजूद नहीं था तो देर रात केजरीवाल के घर मीटिंग किस बात को लेकर थी। ऐसे में यह शक और ज्यादा गहरा जाता है कि साजिश के तहत ही मुख्य सचिव को बुलाया गया और फिर उनके साथ बदसलूकी की गई।
अवलोकन करें :--
वर्तमान आम आदमी पार्टी को नहीं मालूम कि मुख्य सचिव का किसी राज्य में कितना महत्व होता है। और जो आदमी मीटिंग में मौजूद नहीं था, वह किस आधार पर पुलिस में शिकायत दर्ज करवा रहा है? फिर पहले तो अमानुल्ला छिपा-छिपा फिर रहा था, और जब पुलिस गिरफ़्तारी से बचने आत्मसमर्पण करने आया तो अपनी मुस्लिम टोपी पहनकर। यानि चाल बहुत गहरी थी, अर्थात अगर पुलिस धक्का-मुक्की होने की स्थिति में सिर से टोपी गिरते ही मामले को साम्प्रदायिक रंग देने की साज़िश।
इस मीटिंग में कौन-कौन था मौजूद?
यह बात तो साफ हो गई कि जिस कथित राशन के मुद्दे पर बुलाई गई बैठक में मुख्य सचिव को थप्पड़ मारा गया उसमें खाद्य मंत्री इमरान हुसैन मौजूद नहीं थे। सवाल यह है कि फिर उस बैठक में कौन-कौन था और इस बैठक का असल मुद्दा क्या था? चलिए बता दें कि इस बैठक में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, मुख्यमंत्री के सलाहकार वीके जैन के आलावा 11 अन्य विधायक भी थे। जिनमें ओखला के विधायक अमानतुल्ला, अंबेडकर नगर के विधायक अजय दत्त, देवली से विधायक प्रकाश जारवाल और लक्ष्मी नगर के विधायक नितिन त्यागी भी थे। इन सभी 11 विधायकों के खिलाफ मामले दर्ज है।
क्या था बैठक का असली मुद्दा
विधायकों की बदसलूकी के बाद मंगलवार को मुख्य सचिव ने दिल्ली सरकार और केजरीवाल पर कई आरोप लगाए। उनके अनुसार राशन के मुद्दे पर जिस बैठक की बात की जा रही है वह झूठ है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बैठक में विधायकों ने टीवी विज्ञापनों को लेकर चर्चा की और उनके साथ मारपीट की। इस तरह से देखा जाए तो मुख्य सचिव के अनुसार बैठक का मुख्य मुद्दा राशन नहीं, दिल्ली सरकार के विज्ञापन थे। इस पर आम आदमी पार्टी ने सफाई दी है। आप की प्रवक्ता आतिशी मार्लेना का कहना है- सरकार की तीसरी सालगिरह एक हफ्ते पहले निकल चुकी है, हम अब विज्ञापन पर चर्चा क्यों करेंगे, जबकि अब हम विज्ञापन दे ही नहीं सकते।
एक ड्रामा ये भी
मुख्य सचिव से साथ मारपीट के बाद यह ड्रामा इतनी आसानी से कैसे खत्म हो सकता। इस ड्रामे के कई किरदार और अध्याय अभी बाकी हैं। विधायक जारवाल को तो गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन बाकी विधायकों तक पुलिस अभी पहुंच नहीं पायी है। इससे पहले मंगलवार दोपहर दिल्ली सचिवालय में ड्रामे का दूसरा अध्याय भी लिखा गया। इस ड्रामे के मुख्य किरदार दिल्ली के खाद्य मंत्री इमरान हुसैन थे। जी हां ये वही मंत्री हैं, जिनके बिना सोमवार देर रात राशन के मुद्दे पर कथित बैठक हो रही थी। इमरान ने आईपी इस्टेट थाने में शिकायत दर्ज कराई है। इस शिकायत के अनुसार मंगलवार दोपहर सचिवालय परिसर में उनके साथ मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के समर्थकों ने मारपीट की। उन्होंने कर्मचारियों पर धक्कामुक्की, मारपीट और गाली गलौच का आरोप लगाया है।
इमरान हुसैन की शिकायत के अनुसार मारपीट करने वाले कह रहे थे कि उन्हें मुख्य सचिव अंशु प्रकाश ने आप विधायकों और मंत्रियों को सबक सिखाने की बात कही है। यही नहीं उन्होंने आरोप लगाया है कि उनका मोबाइल छीनकर तोड़ दिया गया, उन्हें बंदी बनाया गया और अपशब्द कहते हुए मारपीट की गई। गौरतलब है कि ऐसे ही आरोप मुख्य सचिव अंशु प्रकाश ने भी आप विधायकों पर लगाए हैं।
आशीष खेतान ने मंगलवार को सचिवालय में मारपीट का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों के हुजूम ने मारो-मारो की नारेबाजी की. उन्होंने बताया, '150 लोगों का हुजूम था जो अपने आप में ही चौंकाने वाली बात है. मैं लिफ्ट का वेट कर रहा था तभी 30 से 35 लोग मारो-मारो के नारे लगाते हुए आए.
भले ही इस ड्रामे के जितने भी अध्याय लिखे जाएं और जितने भी किरदार सामने आ जाएं। एक बात तो स्पष्ट है कि देर रात बैठक को लेकर शक की गुंजाइश बनी हुई है, जबकि बैठक में खाद्य मंत्री मौजूद भी नहीं थे। ऐसा ही शक भाजपा और कांग्रेस जैसे विपक्षी दल भी जाहिर कर रहे हैं और नौकरशाही को भी बैठक के समय को लेकर दिल्ली सरकार पर शक है।
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि दिल्ली में आप सरकार के तीन साल का कार्यकाल अराजकता से भरा है। पात्रा ने कहा, 'बीजेपी दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ हुए बर्ताव की निंदा करती है। राष्ट्रीय राजधानी में संवैधानिक संकट की स्थिति पैदा हो गई है। AAP आज अराजकता का पर्याय बन गई है। पार्टी अपनी सत्ता का दुरुपयोग कर रही है, यह अराजक पार्टी बन गई है।' पात्रा के अनुसार, 'AAP की चिंता दरअसल 20 सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर है, जहां इसके विधायकों को अयोग्य घोषित करार दिए जाने के बाद चुनाव होना है। मुख्य सचिव पर हमले का यही एक कारण है। क्या केजरीवाल अब भी अपने पद पर बने रहेंगे?'
दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा, 'मुझे यह लगता है मुख्य सचिव के साथ हुई मारपीट पूर्व नियोजित थी। मुख्य सचिव को 12 बजे रात में बुलाने की क्या जरूरत थी। इस हिंसक घटना की शीर्ष स्तर पर जांच होनी चाहिए। केजरीवाल सरकार को बैठक से जुड़ी सीसीटीवी की रिकॉर्डिंग सार्वजनिक करनी चाहिए। ये एक तरह का आतंक है।' भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, 'दिल्ली के इतिहास में यह काला दिन है और यहां संवैधानिक संकट पैदा हो गया है।'
दिल्ली पुलिस को नहीं मिली AAP नेताओं की कस्टडी
दिल्ली के मुख्य सचिव से मारपीट और बदसलूकी के मामले में गिरफ्तार किए गए आम आदमी पार्टी के एमएलए अमानतुल्ला और प्रकाश जरवाल को तीस हजारी कोर्ट में पेश किया गया, जहां पुलिस ने दोनों की दो दिन की पुलिस रिमांड मांगी थी, लेकिन जज ने उसे कैंसिल कर दिया. सरकारी वकील ने कोर्ट में कहा कि दोनों की दो दिन की पुलिस रिमांड जरूरत है. पुलिस को दोनों लोगों को आमने सामने बिठा कर पूछताछ करनी है. जांच में पूछताछ कर ये जानना है कि मुख्य सचिव से मारपीट और बदसलूकी करने के पीछे इनका क्या उद्देश्य था.



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