आर.बी.एल.निगम, फिल्म समीक्षक
श्रुति हरिहरन कन्नड़ फिल्मों की जानी मानी एक्ट्रेस हैं. उन्होंने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2018 के सत्र ‘सेक्सिज्म इन सिनेमा: टाइम टू एंड पेट्रीआर्की’ के दौरान कास्टिंग काउच से जुड़े अपने अनुभव शेयर किए.
श्रुति हरिहरन ने अपनी पहली फिल्म का वह डरा देने वाला अनुभव शेयर किए, जिसके बाद उन्हें फिल्म ही छोड़नी पड़ी.श्रुति हरिहरन ने अपनी पहली फिल्म का वह डरा देने वाला अनुभव शेयर किए, जिसके बाद उन्हें फिल्म ही छोड़नी पड़ी.
फिल्मी दुनिया में कास्टिंग काउच का मामला आए दिन हमारे सामने आता रहता है. इस बार साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री की मशहूर एक्ट्रेस श्रुति हरिहरन ने बताया कि उनके साथ भी ऐसा हो चुका है. उन्होंने कहा, 'मैंने कास्टिंग काउच की स्थिति का सामना किया है. एक कन्नड़ फिल्म के लिए कास्टिंग में गई थी और वहां मुझे ऐसी परिस्थिति में डाल दिया गया. एक प्रोड्यूसर ने फिल्म देने के लिए कहा कि फिल्म में 5 प्रोड्यूसर हैं और वह किसी भी तरह से मेरा इस्तेमाल कर सकते हैं’.
फ़िल्मी दुनिया में शिकार हुई कई अभिनेत्रियों के बाद एक और बड़ी अभिनेत्री का नाम जुड़ गया है. इस एक्ट्रेस ने अपनी बॉलीवुड लाइफ को लेकर बड़ा खुलासा किया है. बता दें ये अभिनेत्री कोई और नहीं बल्कि साउथ की मशहूर श्रुति हरिहरन हैं. कास्टिंग काउच को लेकर वैसे कई सारी अभिनेत्रियों ने आवाज उठाई है. श्रुति हरिहरन ने अपने साथ एक शो में घटी घटना से बड़ा राज उठाया है. जिसने सभी को हिला कर रख दिया है.
श्रुति हरिहरन ने बताया है कि एक प्रोड्यूसर ने 4 अन्य प्रोड्यूसर के साथ ‘सोने’ के लिए कहा था. इस बदसूरत बेरंगी दुनिया के राज को खोलते हुए श्रुति ने बताया कि जब उन्होंने इस काम को करने से मना किया तो उसके बाद उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में अच्छी फिल्में मिलना बंद हो गई. बता दें जब उनके साथ ये घटना घटी थी उस समय वो मात्र 18 वर्ष की थी. इसी के साथ उन्होंने कई खुलासे करते हुए सभी को हिला कर रख दिया है. जब वह कोरियोग्राफर के पास गई और कहा कि वे वह सब नहीं कर सकतीं, जो उनसे कहा जा रहा है, इसके बाद कोरियोग्राफर ने कहा कि यदि ये सब हैंडल नहीं कर सकतीं तो तत्काल दफा हो आओ. ये सुनकर श्रुति की आंखों में आंसू आ गए. वे डर गई और आखिरकार उन्हें फिल्म छोड़ना पड़ा.
श्रुति ने काउस्टिंग काउच का एक अनुभव सुनाते हुए कहा, एक तमिल फिल्मकार मेरी ही कन्नड़ फिल्म का रीमेक बनाना चाहते थे. उन्होंने मुझे ही इसके लिए साइन किया. टेलीफोन पर उन्होंने मेरे सामने अजीब शर्त रखी.
प्रोड्यूसर ने फिल्म देने के लिए कहा कि फिल्म में 5 प्रोड्यूसर हैं और वह किसी भी तरह से मेरा इस्तेमाल कर सकते हैं. ये सुनकर मैं हैरान रह गई.
कास्टिंग काउच पर खुलकर बोलीं श्रुति
श्रुति ने इन बातों का खुलासा इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2018 में किया. कॉन्क्लेव में ‘सेक्सिज्म इन सिनेमा: टाइम टू एंड पेट्रीआर्की’ के मुद्दे पर बहस हो रही थी. श्रुति ने यहां कास्टिंग काउच पर खुलकर बोलीं. उन्होंने कहा, 'फिल्मों में लड़कियों के किरदार को हमेशा समाज में उसके लिए प्रचलित भावनाओं के आधार पर उतारा जाता है. अधिकतर फिल्मों में लड़कियों को बतौर कमोडिटी शूट किया जाता है, जिससे वह देखने में सुन्दर, सेक्सी लगें और फिल्म चलने की संभावना बढ़ जाए'.
श्रुति में कहा कि महिलाओं का चुप रहना अब कोई विकल्प नहीं है. पब्लिक स्पेस महिलाओं के लिए उपलब्ध नहीं है, क्योंकि समाज पूरी तरह से पुरुष प्रधान है, लेकिन फिल्मों में महिलाओं की मौजूदगी से उम्मीद की जा सकती है कि महिलाएं पब्लिक स्पेस में अपने लिए जगह बना रही हैं.
श्रुति ने इन बातों का खुलासा इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2018 में किया. कॉन्क्लेव में ‘सेक्सिज्म इन सिनेमा: टाइम टू एंड पेट्रीआर्की’ के मुद्दे पर बहस हो रही थी. श्रुति ने यहां कास्टिंग काउच पर खुलकर बोलीं. उन्होंने कहा, 'फिल्मों में लड़कियों के किरदार को हमेशा समाज में उसके लिए प्रचलित भावनाओं के आधार पर उतारा जाता है. अधिकतर फिल्मों में लड़कियों को बतौर कमोडिटी शूट किया जाता है, जिससे वह देखने में सुन्दर, सेक्सी लगें और फिल्म चलने की संभावना बढ़ जाए'.
श्रुति में कहा कि महिलाओं का चुप रहना अब कोई विकल्प नहीं है. पब्लिक स्पेस महिलाओं के लिए उपलब्ध नहीं है, क्योंकि समाज पूरी तरह से पुरुष प्रधान है, लेकिन फिल्मों में महिलाओं की मौजूदगी से उम्मीद की जा सकती है कि महिलाएं पब्लिक स्पेस में अपने लिए जगह बना रही हैं.
महिलाओं का चुप रहना अब कोई विकल्प नहीं है...
कास्टिंग काउच पर बात करते हुए श्रुति ने कहा, ‘महिलाओं का चुप रहना अब कोई विकल्प नहीं है. पब्लिक स्पेस महिलाओं के लिए उपलब्ध नहीं है, क्योंकि समाज पूरी तरह से पुरुष प्रधान है, लेकिन फिल्मों में महिलाओं की मौजूदगी से उम्मीद की जा सकती है कि महिलाएं पब्लिक स्पेस में अपने लिए जगह बना रही हैं. ज्यादातर लड़कियों को कास्टिंग काउच का सामना ‘न’ कहकर करने की जरूरत है. इसके लिए सिर्फ पुरुषों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है. कास्टिंग काउच से पहला मौका जरूर मिलता है लेकिन इसके सहारे करियर नहीं बनाया जा सकता है'.
कास्टिंग काउच पर बात करते हुए श्रुति ने कहा, ‘महिलाओं का चुप रहना अब कोई विकल्प नहीं है. पब्लिक स्पेस महिलाओं के लिए उपलब्ध नहीं है, क्योंकि समाज पूरी तरह से पुरुष प्रधान है, लेकिन फिल्मों में महिलाओं की मौजूदगी से उम्मीद की जा सकती है कि महिलाएं पब्लिक स्पेस में अपने लिए जगह बना रही हैं. ज्यादातर लड़कियों को कास्टिंग काउच का सामना ‘न’ कहकर करने की जरूरत है. इसके लिए सिर्फ पुरुषों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है. कास्टिंग काउच से पहला मौका जरूर मिलता है लेकिन इसके सहारे करियर नहीं बनाया जा सकता है'.
श्रुति हरीहरन ने आगे कहा कि फिल्मों में लड़कियों के किरदार को हमेशा समाज में उसके लिए प्रचलित भावनाओं के आधार पर उतारा जाता है. अधिकतर फिल्मों में लड़कियों को बतौर कमोडिटी शूट किया जाता है, जिससे वह देखने में सुन्दर, सेक्सी लगें और फिल्म चलने की संभावना बढ़ जाए.
श्रुति कहा, ज्यादातर लड़कियों को कास्टिंग काउच का सामना ‘ना’ कहकर करने की जरूरत है. इसके लिए सिर्फ पुरुषों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है. कास्टिंग काउच से पहला मौका जरूर मिलता है लेकिन इसके सहारे करियर नहीं बनाया जा सकता.

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