
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
किसी भी चुनाव से पहले सर्वे का काफी महत्व होता है और ऐसे में एक बार फिर कर्नाटक चुनाव से पहले आये एक सर्वे ने सबको चौंका दिया है। इस सर्वे के अनुसार जिस पार्टी की जीत होने वाली है उसका नाम जानकर आप दंग रह जाएँगे।सीएचएस नाम की एक एजेंसी ने सर्वे जारी करते हुए बड़ा खुलासा किया है जिससे सब हैरान हैं और यह नहीं समझ पा रहे हैं कि आखिर ऐसा कैसे ?
दरअसल बताया जा रहा है कि यह सर्वे एक गलती की वजह से मीडिया के हाथ लगा है और इस सर्वे में काफी चौंकाने वाले आकड़ें सामने आये है। इस सर्वे के अनुसार ना तो बीजेपी ना ही कांग्रेस बल्कि कर्नाटक की पार्टी जनता दल (सेक्युलर) टक्कर दे रही है। जिस कारण खिचड़ी सरकार बनने के आसार दिख रहे हैं। सर्वे के मुताबिक कांग्रेस को 77-81 सीटें, बीजेपी को 73-76 सीटें और जनता दल (सेक्युलर) को 64-66 मिलेंगी। कर्नाटक विधानसभा में 224 सीटें हैं.
यह सर्वे पिछले कुछ दिनों से whatsapp ग्रुप पर वायरल हो रहा है,सर्वे करने वाली एजेंसी के अनुसार उन्होंने इस सर्वे के लिए 200 लोगों से बात की थी जिसके बाद उन्होंने यह आकड़ा जारी किया है. आपको बता दें सर्वे के अनुसार जनता दल ने वहां पहले से खराब प्रदर्शन किया है जिसके कारण उन्हें कम सीट मिलने की उम्मीद है। इसके कारण भी अनेक है, जनता आज भ्रष्टाचार से जरुरत से अधिक परेशान हो रही है। राज्य में लगभग हर पार्टी राज कर चुकी है, और सभी पार्टियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। कोई पार्टी इस दोष से मुक्त नहीं। फिर भाजपा ने जिसे मुख्यमंत्री घोषित किया है, वह भी दूध का धुला नहीं।
कुछ वर्ष पूर्व अपने बैंगलोर प्रवास के दौरान वहाँ की सडकों की हालत बहुत ही दयनीय थी। इतने गड्डे कि "सावधानी हटी, दुर्घटना घटी।" और आरोप पीड़ित पर। उस समय गड्डों पर सरकार का यह कहना था कि "एक गड्डे को भरने में 5000 रूपए खर्च आएगा।" और यह बयान तत्कालीन भाजपा सरकार का था।
यदि इस सर्वे को ठीक माना जाए तो यह सब पार्टियों के लिए चिन्ता का विषय है। प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी का यह कहना कि "न खाऊँगा और न ही खाने दूंगा।" पर विश्वास किया जा सकता है, जब भाजपा उसे मुख्यमंत्री को मनोनीत करे, जिस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने के कारण पदमुक्त होना पड़ा था। यानि लिंगायत जाति को लुभाने, उसे ही प्रथम पायदान पर खड़ा करना ही प्रमाण है। हालाँकि उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और स्वयं प्रधानमंत्री मोदी कर्नाटक में भाजपा सरकार बनाने के लिए संघर्षरत है। योगी के प्रचार ने जनता को बहुत प्रभावित किया है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता।
जाति धर्म के तर्ज पर ही गुजरात की तरह लड़ा जाएगा विधानसभा चुनाव
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने खुद को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बेहतर हिंदू बताते हुए कहा है कि मैं खुद एक हिंदू हूं. क्या है मेरा नाम ? सिद्धारमैया, मेरे नाम में सिद्ध भी है और राम भी, मैं 100 फीसदी हिंदू हूं. दरअसल, योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि कांग्रेस वाले हनुमान की पूजा नहीं करते हैं, वह टीपू सुल्तान की पूजा करते हैं. यही मानसिकता का अंतर है. गुजरात और हिमाचल प्रदेश ने इन्हें खारिज कर दिया है, कर्नाटक कांग्रेस को खारिज कर देगी तो टीपू सुल्तान की पूजा करने वाला कोई नहीं रहेगा. बहरहाल, जिस तरह से योगी आदित्यनाथ ने बयान दिया है, माना जा रहा है कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव को देखते हुए दिया गया है. ऐसे में पूरी संभावना है कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव भी जाति धर्म के तर्ज पर ही गुजरात की तरह लड़ा जाएगा.
भाजपा की पहली पसंद धर्म आधारित राजनीति
योगी आदित्यनाथ भाजपा के हिंदुत्व का मुख्य चेहरा बनते जा रहे हैं. शायद इसी खूबी के कारण भाजपा ने उन्हें राजनीतिक रूप से सबसे अहम उत्तर प्रदेश की कमान सौंप रखी है. तीन सप्ताह के भीतर दूसरी बार योगी आदित्यनाथ कर्नाटक गए. पार्टी की परिवर्तन यात्रा के तहत बेंगलुरू में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर सीधा निशाना साधा. वह भी इसलिए कि ये दोनों नेता भी अब ख़ुद को बढ़-चढ़कर हिंदू बता रहे हैं. योगी आदित्यनाथ ने विकास की तमाम बातें कीं. केंद्र और राज्य के विकास के लिए एक ही पार्टी की सरकार की जरूरत बताई. और फिर घूम-फिर कर असल मुद्दे पर आ गए. कहने लगे, हिंदू कोई धर्म नहीं है. इसका किसी जाति या समुदाय से भी कोई लेना-देना नहीं है. हिंदुत्व तो जीवन शैली है. इस जीवन शैली में, इस संस्कृति में गाय का मांस खाना वर्जित है. मैं उनसे (सिद्धारमैया) पूछना चाहता हूं कि अगर वे भी हिंदू हैं तो क्या उनके लिए यह उचित है कि वे गौ-मांस खाने को प्रोत्साहन दें. फिर योगी ने लोगों को याद दिलाया कि प्रदेश में भाजपा की सरकार ने गौ-वध और गौ-मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की थी, लेकिन कांग्रेस ने उसका यह प्रयास नाकाम कर दिया.
योगी आदित्यनाथ क्यों हैं निशाने पर
योगी आदित्यनाथ ने कर्नाटक में कहा था कि कांग्रेस वाले हनुमान की पूजा नहीं करते हैं, वह टीपू सुल्तान की पूजा करते हैं. यही मानसिकता का अंतर है, गुजरात और हिमाचल प्रदेश ने इन्हें खारिज कर दिया है, कर्नाटक कांग्रेस को खारिज कर देगी तो टीपू सुल्तान की पूजा करने वाला कोई नहीं रहेगा. योगी आदित्यनाथ के इस बयान पर कांग्रेस ने काफी तीखी प्रतिक्रिया दी थी और उनपर धर्म की राजनीति करने का आरोप लगाया था. सिद्धारमैया ने भाजपा पर पलटवार करते हुए यह भी कहा कि मैं हिंदू हूं, लेकिन भाजपा की तरह नहीं हैं. भाजपा धर्म के नाम पर देश को बांटने का काम करती है, लेकिन हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और यही हिंदुत्व का सही रुप है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का कहना है कि कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी हिंदुत्व के मुद्दे को आगे बढ़ाकर वोटों का ध्रुवीकरण करके चुनाव जीतना चाहती है, लेकिन मैं कर्नाटक में यह नहीं होने दूंगा.
हेगड़े ने खींचे बढ़े हुए कदम
केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने कहा कि अगर कोई कहे कि मैं मुस्लिम हूं, ईसाई हूं, लिंगायत हूं या हिंदू हूं तो मुझे खुशी होती है. क्योंकि उसे अपनी जड़ों का पता होता है. लेकिन जो खुद को धर्मनिरपेक्ष कहते हैं उन्हें क्या कहा जाए मुझे नहीं पता. क्योंकि ये वे लोग हैं जिन्हें अपने पुरखाें का पता नहीं. अपने माता-पिता के बारे में पता नहीं. हेगड़े ने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि धर्मनिरपेक्ष शब्द संविधान में है. आपको उनकी बात माननी होगी. क्योंकि यह संविधान में है. और हम संविधान का सम्मान भी करते हैं. मगर उसमें भी जल्द बदलाव होने वाला है. संविधान इसके पहले भी कई बार बदला गया है. हम (भाजपा) भी उसमें बदलाव के लिए यहां (सत्ता में) आए हैं. हम उसमें बदलाव करेंगे. हालांकि बाद में हेगड़े को अपने इस बयान के लिए संसद में माफ़ी मांगनी पड़ी.
धर्म ही नही जाति भी साध रहे हैं दोनों
कांग्रेस और भाजपा सिर्फ़ धर्म ही नहीं जातीय समीकरणों को भी योजनाबद्ध तरीके से साध रही हैं. कांग्रेस ने पार्टी की प्रदेश इकाई में परिवर्तन किए तो इसकी पहली साफ़ झलक मिली, कमान दलित नेता जी परमेश्वरा काे सौंपी. वहीं लिंगायत नेता एसआर पाटिल को उत्तर कर्नाटक का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया क्योंकि इस इलाके में लिंगायत समुदाय का असर है. इसी तरह वोक्कालिगा समुदाय के नेता डीके शिवकुमार को प्रचार अभियान समिति की कमान दी गई. दिनेश गुुंडूराव (ब्राह्मण) को कांग्रेस ने दक्षिण कर्नाटक का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया. पिछड़ी जातियों का प्रतिनिधित्व करने के लिए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया हैं ही. वे कुरुबा (पिछड़े) समुदाय से ताल्लुक़ रखते हैं. दूसरी तरफ भाजपा भी जात-पात की जमावड़े में जुटी है. राज्य में लिंगायत भाजपा का परंपरागत मतदाता माना जाता है. इसलिए उसे अपने साथ बनाए रखने के लिए लिंगायत नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येद्दियुरप्पा को उसने काफ़ी पहले ही अपना चेहरा घोषित कर दिया. वहीं पिछड़ों और दलितों को साधने के लिए पूर्व उप मुख्यमंत्री केएस ईश्वरप्पा को लगाया गया है. अन्य दलों के दूसरे जातीय दिग्गजों को भी पार्टी में शामिल करने की कवायद जारी है. इनमें एक बड़ा नाम वोक्कालिगा समुदाय के नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा का है. बहरहाल, कहा जा सकता है कि भूले-बिसरे बातें भले ही विकास की होती रही हों, हो जाती हों पर गुजरात की तरह कर्नाटक में क़रीब-क़रीब तय है कि चुनावी राजनीति धर्म-जाति की संकरी गलियों से गुजरते हुए सत्ता तक पहुंचने वाली है.
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