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आधार कार्ड ने पकडे 80,000 अवैध शिक्षक

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आज हर तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का घोर विरोध किया जा रहा है, तो कहीं जातिगत दंगों से सरकार का घोटालों से ध्यान हटाने का भरसक प्रयास किया जा रहा है। समस्त मोदी विरोधी किसी न किसी मोड़ पर एकजुट हो रहे हैं। लेकिन मोदी सरकार एक मस्त हाथी समान अपने लक्ष्य की ओर चल रही है। 
पिछली मनमोहन सिंह ने मुस्लिम समाज के लिए कितना योजनाओं के लिए धन दिया, केवल एक मंत्री खुर्शीद ने कुछ धन अपनी पत्नी के एनजीओ के माध्यम से खर्च किया और उसमे भी आधा जेबों में गया , बरहाल लगभग हर मंत्रालय ने चुनाव घोषित होने पर समस्त धन वापस कर दिया और मुस्लिम समाज मुंगेरी लाल सपनों से खुश हो गया कि सरकार मुसलमानों का कितना ध्यान रखती है। दूसरे, मदरसों में फ़र्ज़ी छात्र संख्या दिखाना, फ़र्ज़ी मदरसे खोल अपनी जेबें भरना आदि घोटाले जिनसे आम मुस्लिम जनमानस पूर्णरूप से अज्ञान है। उत्तराखंड में भाजपा सरकार बनने पर शोर मचा की मदरसों से दो लाख बच्चे गायब हो गए। और अब उत्तर प्रदेश में लगभग 2300 मदरसे बंद होने के कगार पर, से योगी सरकार के विरुद्ध जहर फैलाया जा रहा है। जबकि आधार कार्ड से लिंक करने पर मुस्लिम समाज के साथ हो रहे अन्याय का भांडा फूटना शुरू हो चुका है। जो धन जनता के विकास और देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में प्रयोग होना था, तुष्टिकरण की आड़ में भ्रष्टाचार की परवान चढ़ रहा था।
और अब जो इसी आधार कार्ड के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 80,000 शिक्षकों के फर्ज़ीवाड़े का पर्दाफाश किया है। यानि 80,000 शिक्षकों का वेतन भ्रष्टाचारियों की तिजोरियों में जा रहा था और जब इन भ्रष्टाचारियों पर कार्यवाही होगी, देश में प्रोपगंडा चलेगा, कि "मोदी सरकार शिक्षकों को बेरोजगार कर रही है" और किराये के टट्टुओं का जमावड़ा सड़क पर तोड़फोड़ करने आ जाएगा। इनके समर्थक संसद को सिर पर उठा लेंगे। इस तरह रोजगार देने का फर्जीवाड़ा चल रहा था, और अब इस फर्जीवाड़े से जनता का ध्यान हटाने के लिए शोर मचेगा, इतने शिक्षक बेरोजगार घूम रहे है, मोदी सरकार कुछ नहीं कर रही है।
ये जो जातिवाद के नाम पर गुजरात से लेकर महाराष्ट्र और महाराष्ट्र से लेकर देश के अन्य भागों में आग फ़ैलाने का मुख्य उद्देश्य इन भ्रष्टाचारियों पर हो रही कार्यवाही से सरकार का ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है। जो विरोध जातियों के नाम पर बनी इतनी सारी पार्टियाँ के नेताओं और इनके कार्यालयों पर होना चाहिए, मोदी सरकार के विरुद्ध हो रहा है। जो सिद्ध करता है जाति के नाम पर लूटपाट करते रहो, अपनी तिजोरियाँ भरते रहो, और जो कहीं कुछ काम करने योग्य न हो पार्टी बना लो। मायावती, लालू यादव, शरद यादव, मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव, रामविलास पासवान आदि नेताओं से किसी का पूछने का साहस नहीं, कि जाति के नाम पर तुम लोगों ने पार्टी बनाकर अपनी तिजोरियों पर ही ध्यान दिया, जबकि तुम्हारी जाति वहीँ की वहीँ है।   
मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने आधार के जरिए देश के विभिन्न कालेजों और विश्वविद्यालयों में करीब 80 हजार ऐसे शिक्षकों की पहचान की है जिनका दरअसल कोई वजूद ही नहीं है. मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने हालांकि स्पष्ट किया कि इनमें से कोई भी शिक्षक किसी केंद्रीय विश्वविद्यालय से नहीं है. जावडेकर ने एक कार्यक्रम में कहा कि कुछ ऐसे ‘फर्जी’ शिक्षक हैं जो छद्म उपस्थिति का तरीका अपनाते हैं और कई जगहों पर पूर्णकालिक पढ़ा रहे हैं. आधार शुरू होने के बाद, ऐसे 80 हजार शिक्षकों की पहचान हुई है और उनके खिलाफ कार्रवाई पर विचार किया जाएगा.
उन्होंने कहा, ‘‘किसी केन्द्रीय विश्विवद्यालय में फर्जी शिक्षकों की पहचान नहीं हुई है. लेकिन कुछ राज्य एवं निजी विश्वविद्यालयों में ऐसे शिक्षक हैं.’’ मंत्रालय ने सभी विश्वविद्यालयों से सभी कर्मचारियों और छात्रों से आधार संख्या मांगने के लिए कहा है ताकि डुप्लीकेशन नहीं हो. हालांकि डेटा लीक होने के बारे में चिंता जताई गई है.
विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने आधार को बताया सुरक्षित
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने अज्ञात लोगों द्वारा 500 रुपये में आधार की पूरी जानकारी मुहैया कराने की रिपोर्ट को खारिज करते हुए गुरुवार (04 जनवरी) को कहा कि उसकी प्रणाली सुरक्षित है और इसके किसी भी दुरुपयोग का पता लगाया जा सकता है. उसने कहा कि उसके पास हर गतिविधि की पूरी जानकारी होती है. प्राधिकरण ने जारी बयान में कहा कि आधार की कोई जानकारी लीक नहीं हुई है. उसने दावा किया, ‘‘जैविक जानकारियों समेत आधार के डेटा पूरी तरह सुरक्षित हैं.’’ प्राधिकरण का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मीडिया रिपोर्टों में व्हाट्सऐप के जरिये महज 500 रुपये में आधार की जानकारी मुहैया कराने का खुलासा किया गया था.
उसने कहा कि लोगों की मदद तथा उनके दिक्कतों को दूर करने के लिए चुनिंदा कर्मचारियों व राज्यों के अधिकारियों को ही आधार नं की मदद से जानकारी खोजने की सुविधा दी गयी है. उसने दावा किया, ‘‘प्राधिकरण हर गतिविधि की जानकारी रखता है और छेड़छाड़ की पहचान करने की क्षमता भी रखता है. हर दुरुपयोग का पता लगाकर उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. रिपोर्ट किया गया मामला दिक्कतों की निवारण सुविधा के दुरुपयोग का मामला है.’’ उसने कहा कि उसके पास चूंकि इसका पता लगाने की सुविधा है, उसने संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी की प्रक्रिया शुरू कर दी है.  प्राधिकरण ने कहा कि दिक्कतों की निवारण सुविधा के तहत भी सीमित अधिकार ही दिया जाता है. उसने आगे कहा कि जैविक सूचनाओं के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं हुआ है.

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