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ईसाई मिशनरी का मोहरा है बाबा वीरेंद्र

दिल्ली में बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित के आध्यात्मिक विश्वविद्यालय पर छापेमारी और आश्रमों से सैकड़ों की संख्या में लड़कियों की बरामदगी की खबरें मीडिया में गर्म हैं। माना जा रहा था कि बाबा हिंदू धर्म के नाम पर लोगों को बेवकूफ बना रहा था और लड़कियों का शोषण कर रहा था, लेकिन जांच में कई ऐसी बातें सामने आई हैं जो कई सवाल खड़े करती हैं। बाबा और उसके सहयोगियों की गतिविधियों के बारे में न्यूज़लूज़ को कुछ ऐसी बातें पता चली हैं जिन्हें जानकर आप हैरान रह जाएंगे। इनके मुताबिक बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित हिंदू धर्मगुरु के आवरण में दरअसल ईसाई मिशनरियों के लिए कठपुतली के तौर पर काम कर रहा था। इस मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई में भी इस बात के संकेत सामने आए हैं। एक साधक का दावा है कि “हिंदू परिवारों की लड़कियों को आश्रम में रखा जाता था और धीरे-धीरे उन्हें हिंदू धर्म से दूर करके एक ऐसी अवस्था में पहुंचा दिया जाता था, जिसमें उनके हिंदू होने का कोई मतलब नहीं रह जाता था।” यह बात भी सामने आई है कि बाबा के आश्रमों में अक्सर कुछ विदेशी लोग भी आया-जाया करते थे।

ईसाई मिशनरीज़ से लिंक कैसे?

दिल्ली पुलिस की जांच में बाबा के दो सबसे करीबियों दीपक डीसिल्वा और दीपक थॉमस के नाम सामने आए हैं। जैसा कि नाम से ही जाहिर है ये दोनों ईसाई हैं। अब तक की पूछताछ के मुताबिक आश्रम की गतिविधियों पर पूरी तरह से इन्हीं दोनों का नियंत्रण था। मुंबई के रहने वाले दीपक थॉमस की पत्नी भी उसका कामकाज देखती थी। हाई कोर्ट ने बाबा वीरेंद्र के अलावा जिन दो लोगों को गिरफ्तार करके पेश करने का आदेश दिल्ली पुलिस को दिया है वो यही दोनों हैं। दीपक थॉमस, उसकी पत्नी और दीपक डीसिल्वा कौन हैं और क्या करते हैं इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। लेकिन बाबा के आश्रमों में रहने वाले उन्हें अच्छी तरह पहचानते हैं। आश्रमों में उनका बराबर आना-जाना लगा रहता था। यह बात भी सामने आई है कि बाबा के देशभर में फैले अड्डों के हिसाब-किताब और बैंक खातों की जिम्मेदारी दीपक थॉमस पर ही है। वो बाबा वीरेंद्र का दाहिना हाथ माना जाता है। दीपक की पत्नी अलग-अलग आश्रमों में रह रही लड़कियों का हिसाब रखती है। किसी लड़की को कहां भेजना है और कहां रखना है इसका फैसला उसी का होता था।

वीरेंद्र देव का रहस्यमय इतिहास

कम लोगों को पता होगा कि बाबा वीरेंद्र देव पहले प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय से जुड़ा हुआ था। ये संस्था देश भर में फैली हुई है और लाखों की संख्या में इसके भक्त हैं। कुछ साल पहले ब्रह्माकुमारी आश्रम से कुछ लोग टूटकर अलग हुए थे, उन्हें सतीश ग्रुप के नाम से जाना जाता था। ये जानकारी ब्रह्माकुमारी आश्रम के फोरम पर उपलब्ध है। वीरेंद्र देव उसी का हिस्सा था। इसके मुताबिक 1969 में वीरेंद्र देव दीक्षित अहमदाबाद में पीएचडी कर रहा था। तब वो अहमदाबाद के पालडी इलाके में ब्रह्माकुमारी के आश्रम में आया-जाया करता था। वहां से वो माउंड आबू आश्रम गया। वहां पर उसने खुद को शंकर का अवतार घोषित कर दिया। जिससे नाराज ब्रह्माकुमारियों ने वीरेंद्र देव की पिटाई कर दी, 

जिसके बाद उसे माउंट आबू छोड़कर वापस अहमदाबाद लौटना पड़ा। यहां पर भी ब्रह्माकुमारी के साधकों से उसका विवाद जारी रहा और इस दौरान उसकी एक बार फिर से पिटाई हुई। फिर वो अहमदाबाद से दिल्ली चला आया और साधिका पुष्पा माता के घर में रहने लगा। वो खुद को भगवान शंकर का अवतार बताता था। दिल्ली में जिन पुष्पा माता के घर पर वीरेंद्र देव रहता था उनके पति म्युनिसिपल कॉरपोरेशन में चपरासी की नौकरी करते थे। उनके घर में वीरेंद्र देव 1973 से 77 तक रहा। तब वीरेंद्र देव ने उनकी 9 साल की बेटी कमला से बलात्कार किया और कहा कि मैं तुम्हें माता जगदंबा बना दूंगा। वीरेंद्र ने पुष्पा के साथ मिलकर विजय विहार आश्रम शुरू किया था। बाद में पुष्पा की मौत हो गई थी और बेटी कमला और बाबा के बीच संपत्ति को लेकर विवाद हो गया। इसके बाद वीरेंद्र ने अपने लाेगों के साथ मिलकर कमला को आश्रम से निकाल दिया। वो उत्तराखंड के किसी शहर में रह रही है।मिशनरीज़ का मोहरा बना बाबा

आश्रम के कुछ करीबियों के मुताबिक बाबा वीरेंद्र ब्रह्माकुमारी आश्रम से विवाद के दिनों में ही कुछ ईसाई धर्म प्रचारकों के संपर्क में आया था। ईसाई मिशनरी अपने धर्मांतरण के काम में ब्रह्माकुमारी आश्रम की गतिविधियों को बड़ा रोड़ा मानती हैं। जब ब्रह्माकुमारी आश्रम में टूट हुई तो उनके लिए ये किसी अवसर से कम नहीं था। मिशनरी के कुछ लोगों ने बाबा से संपर्क किया और मुश्किल दिनों में उसकी भरपूर मदद की। यहां तक कि बलात्कार के केस से बच निकलने में भी उन्हीं का हाथ था। इसके बाद बाबा वीरेंद्र ने अपना समानांतर आश्रम शुरू किया। उसका नाम भी ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय से मिलता जुलता ‘आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय’ रखा। गरीब हिंदू परिवार अपनी लड़कियों को धर्म की शिक्षा के लिए बाबा के आश्रम में छोड़ते और वहां पर उन्हें बंधक बनाकर उनका ब्रेन वॉश शुरू कर दिया जाता। नतीजा ये होता कि लड़कियां कभी लौटकर अपने घर परिवार में नहीं जातीं। शक है कि इन लड़कियों के यौन शोषण के अलावा उन्हें तरह-तरह के अनैतिक कामों में लगा दिया जाता था। कुल मिलाकर यह कि धर्म के नाम पर आश्रम भेजी गई ये लड़कियां उस अवस्था में पहुंच चुकी होती थीं कि जहां पर उनके लिए अपने परिवार, धर्म और देवी-देवताओं का कोई महत्व नहीं होता था। सैकड़ों की संख्या में लड़कियों का कुछ अता-पता नहीं है वो कहां और किसके पास गईं यह भी एक रहस्य है, जिसका जवाब मिलने पर बाबा वीरेंद्र का असली चेहरा सामने आ जाएगा।

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shannomagan
To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)