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कैसे साधना गुप्ता बन गईं 'कैकेयी' और मुलायम कुनबे में ला दिया 'भूचाल'

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 मुलायम सिंह की दूसरी पत्नी साधना यादव अपनी बहु अपर्णा के साथ 
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मुलायम कुनबे में पिछले 72 घंटे के बीच कलह क्लाइमेक्स पर पहुंच गई है। मंत्रियों की बर्खास्तगी और फिर अखिलेश यादव को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने के मामले मे एक नाम चर्चा-ए-खास हो गया है। यह नाम है साधना गुप्ता। मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी। राजनीतिक परिदृश्य से अब तक गायब रहने वालीं साधना गुप्ता की नाराजगी ने मुलायम कुनबे की रार को महाभारत में बदल दिया है। सपा में ही कहा जा रहा कि पुत्र मोह में साधना अब कैकेयी बन चुकी हैं। त्रेतायुग की कैकेयी बेटे भरत को गद्दी सौंपने के लिए चाल चलीं थीं तो मुलायम कुनबे की इस कैकेयी को बेटे के लिए सीएम की गद्दी तो नहीं चाहिए, क्योंकि बेटा अभी इस लायक नहीं है, मगर अपने और बेटे के रसूख और कमाई के स्त्रोत पर अखिलेश का हथौड़ा चलाना बहुत बुरा लगा है। जिससे नाराज साधना गुप्ता ने ऐसी लीला रची कि मुलायम को प्रदेश अध्यक्ष पद से अखिलेश को हटाकर उनके पर कतरने पड़े। उधर अखिलेश भी कहां चूकने वाले थे उन्होंने चाचा शिवपाल के अहम महकमे छीनकर संदेश दे दिया कि संगठन भले ही चाचा चलाएंगे मगर सरकार तो वही चलाएंगे। 
साधना गुप्ता के कैकेयी बनने की दो वजह
प्रतीक के करीबी गायत्री को बर्खास्त करना
Image result for sadhna yadav mulayam wife1- सपा सरकार बनने पर पहली बार विधायक बने बीपीएल कार्डधारी गायत्री प्रसाद प्रजापति को राज्यमंत्री बनाया गया। उस वक्त खनन जैसा मालदार महकमा मुख्यमंत्री के अधीन था। मगर गायत्री ने इस बीच साधना यादव और पुत्र प्रतीक यादव से नजदीकियां बढ़ा लीं। साधना गुप्ता से मुलायम तक सिफारिश कराकर खनन जैसा मालदार महकमा हासिल कर लिया। फिर शुरू करा दिया पूरे यूपी में अवैध रूप से खनन का खेल। हर महीने दो सौ करोड़ की इस काली कमाई का खेल फलने-फूलने लगा। सूत्र बताते हैं कि गायत्री ने अपने बेटे और साधना के बेटे प्रतीक यादव को लेकर कई फर्जी कंपनियां बनाकर काली कमाई का निवेश करने लगा। जब गायत्री के दम पर बड़ा बिजनेस एंपायर प्रतीक खड़ा करने में सफल रहे तो मुलायम और पत्नी साधना फूले नहीं समाए। यही वजह रही कि पूरे चार साल तक गायत्री ने लूटपाट मचा कर रख दी। जब पानी सिर से ऊपर हो गया तो अखिलेश ने गायत्री को बर्खास्त कर दिया। इससे साधना को लगा कि अखिलेश उन्हें और उनके बेटे को नीचा दिखाना चाहते हैं। 
दीपक सिंघल को हटाकर दोहरा झटका देना
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2-आमतौर पर लोग मानते हैं कि  भ्रष्टाचार के मामलों से घिरने के बाद भी दीपक सिंघल इसलिए मुख्य सचिव बनें क्योंकि वे शिवपाल के करीबी रहे। यह सही है कि उनके करीबी रहे मगर उनके दम पर मुख्य सचिव बनने की बात में आधी सच्चाई है। क्योंकि जिस सरकार में शिवपाल एक छोटा से काम खुद से न हो पाने की बात सार्वजनिक रूप से कहते फिरें, वे मुख्य सचिव कैसे बनवा सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि दीपक सिंघल की भी नियुक्ति साधना की सिफारिश से हुई। जुगाड़ू दीपक सिंघल जानते थे कि इस समय अमर-शिवपाल की नहीं चल रही, सो उन्होंने साधना गुप्ता की कृपा हासिल की। गायत्री को बर्खास्त करने के बाद अखिलेश यादव ने करीबी दीपक सिंघल को भी हटा दिया। एक तो गायत्री को हटाना दूसरे मुख्य सचिव को भी हटा देना। इससे आय के स्त्रोतों के कनेक्शन पर अखिलेश ने हथौड़ा चला दिया। इससे नाराज साधना गुप्ता पूरी तरह कैकेयी बन गईं और मुलायम के आगे हठयोग शुरू कर दिया। करीबियों को कहना है कि उन्होंने साफ कह दिया क्या उन्हें एक मंत्री और बड़ा अफसर भी सरकार में रखने का हक नहीं है। 
Image result for sadhna yadav mulayam wifeरहस्य से भरी है मुलायम-साधना की नजदीकियां
अखिलेश यादव मुलायम की पहली पत्नी की संतान रहे। वर्ष 1973 मे रहे। जबकि दूसरी पत्नी साधना यादव की संतान मुलायम के दूसरे बेटे प्रतीक यादव की पैदाइश वर्ष 1988 की है। 2003 में पहली पत्नी की मौत हो गई। मगर तब तक मुलायम करीबियों के अलावा किसी को नहीं मालुम था कि उनकी साधना गुप्ता नाम की दूसरी पत्नी भी हैं। कहा जाता है कि साधना की शादी अमर सिंह ने मुलायम से कराई थी। यूपी की जनता को मुलायम की दूसरी पत्नी के बारे में तब अधिकृत रूप से पता चला जब वर्ष 2007 में मुलायम ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिए। जिसमें उन्होंने साधना गुप्ता को अपनी पत्नी बताया। हालांकि सपा का कोई सीनियर नेता अब भी नहीं बताने की स्थिति में है मुलायम-साधना की शादी किस वर्ष में हुई।
मुलायम कुनबे में जानिए कौन किसके साथ
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प्रतीक यादव और पिता मुलायम सिंह यादव 
मुलायम घराने में दो गुट हैं। शिवपाल यादव, साधना गुप्ता, प्रतीक यादव एक गुट में हैं तो दूसरे गुट में अखिलेश यादव और उनके चचेरे चाचा रामगोपाल यादव हैं। रामगोपाल और शिवपाल एक दूसरे को अपना राजनीतिक प्रतिद्वंदी मानते हैं। सूत्र बताते हैं कि रामगोपाल नहीं चाहते कि संगठन या सरकार की ग्रिप शिवपाल के हाथ में आए। अगर ऐसा हुआ तो उनके पर कतर दिए जाएंगे। अखिलेश को सीएम पद पर बैठाने का सुझाव रामगोपाल की ओर से ही मुलायम को पहले दिया गया था। ताकि शिवपाल का पत्ता कट जाए। ऐसा पार्टी सूत्र बताते हैं। 

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)

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