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कश्मीर में महिला पत्थरबाजों सबक सिखाएंगी 500 महिला कमांडोज


आर.बी.एल निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
राष्ट्रपति शासन लगने के बाद से लगता है, केन्द्र सरकार कश्मीर में बहुत सख्ती करने के लिए कमर कस चुकी है।
जम्मू और कश्मीर में पत्थरबाजी एक बड़ी समस्या है, जिसका सुरक्षाबलों को आए दिन सामना करना पड़ता है. इन पत्थरबाजों में बड़ी संख्या में स्कूली लड़कियां और महिलाएं भी शामिल होती हैं, जिससे निपटने में भारतीय सेना को कई तरह की समस्याअों का सामना करना पड़ता है।  लेकिन अब इस समस्या से निपटने के लिए खास रणनीति बनाई गई है। 
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क्या कश्मीर के स्कूलों और कॉलेजों में
पत्थरबाज़ी की भी पढ़ाई होती है?
महिला पत्‍थरबाजों से निबटने के लिए सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स यानी सीआरपीएफ ने अब लेडी कमांडोज की एक टीम तैयार की है। अलगाववादी और आतंकवादी इन पत्थरबाज महिलाओं को अपनी ढाल बना कर इस्तेमाल कर रहे हैं कि जहाँ सुरक्षाकर्मियों ने इनमे से किसी को भी मारा या पकड़ा, तुरन्त मानवाधिकार और महिला संगठनों को आगे लगाकर महिलाओं की सुरक्षा और बलात्कार आदि से अपमानित करने का शोर मचाकर इनकी सुरक्षा करते रहे हैं, अब जब यही पत्थरबाज लड़कियाँ इन महिला सुरक्षाकर्मियों के हाथ आएंगी, कोई नहीं कह पाएगा, कि सुरक्षाकर्मी ने लड़कियों को गलत जगह से पकड़ा या बलात्कार करने का प्रयास किया। क्योंकि एक महिला दूसरी महिला को किसी भी तरह से पकड़ सकती है और पिटाई भी कर सकती हैं। 
https://www.facebook.com/fansofyouthbjp/videos/655501098153869/
बल्कि सरकार को चाहिए कि पत्थरबाजों के साथ उसी तरह सलूक करे, जिस तरह किसी आतंकवादी के साथ किया जाता है। इन पत्थरबाजों के साथ भी किसी भी तरह की नरमी न बरती जाए। मजे की बात यह है कि पत्थरबाज महिला हो या पुरुष, सभी मुँह ढककर पत्थर फेंकते हैं। शंका होती है कि कहीं आतंकवादी महिला ड्रेस में तो ऐसा नहीं कर रहे? इसका पर्दाफाश महिला कमाण्डो के मैंदान में आने पर ही हो पाएगा  
अब खैर नहीं इनकी भी 
इस कमांडो दस्ते के लिए सेना और विभिन्न अर्द्धसैनिक बलों से 500 जांबाज महिलाओं को चुना गया है।इन कमांडोज को कड़ी ट्रेनिंग दी गई है। चर्चा है कि केवल 500 ही नहीं, कम से कम दो/तीन बटेलियन बनानी चाहिए। महिलाओं को रोजगार भी मिलेगा और कश्मीर में इन महिला पत्थरबाजों से मुक्ति।इस दस्ते को पत्थरबाजों से बचने के लिए खासतौर पर हर चीज समझाई और सिखाई जा रही है। इन सभी को पुरुषों की तरह कड़ी ट्रेनिंग दी जा रही है। मुख्यत: इन कमांडो को तीन स्टेप बताए जा रहे हैं। पहला, हालात को भांपना, फिर भीड़ पर काबू पाना और अंत में बल का प्रयोग करना। इन सभी को बताया जा रहा है कि अचानक आने वाली ऐसी परिस्थितियों से वे कैसे निपटें।
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सीआरपीएफ की महिला कमांडो टीम को आंखों पर पट्टी बांधकर आने वाले खतरों से आगाह करने और उनसे मुकाबले के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है| ये महिला कमांडों रात को भी जम्मू कश्मीर में तैनात रहेंगी| इसके अलावा इन महिलाओं को एक मिनट में हथियारों की मरम्मत करना भी सिखाया गया है ताकि कोई हथियार खराब हो तो उससे तुरंत ठीक किया जा सके। 
अवलोकन करें:--


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गृह और रक्षा मंत्रालय को भेजी अपनी तमाम रपटों में सैन्य बलों ने पत्थरबाजों की बात उठाई और कई सुझाव भेजे। सैन्य बलों का मानना है कि पत्थरबाजों की भीड़ में शामिल महिलाओं एवं बच्चों से पुरुष सैन्यकर्मी नहीं निपट पाते। ऐसे में कई दफा आतंकवादी फायदा उठा लेते हैं। इस कारण ही खास रणनीति के तहत महिला कमांडो तैयार करने की योजना बनाई गई।

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