Skip to main content

किसके इशारे पर चर्चों को धन दिया जा रहा है?

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार क्या राज्य में ईसाई धर्म को बढ़ावा दे रही है? यह सवाल खड़ा हुआ है एक आरटीआई से पता चला है कि कांग्रेस में सिद्धारमैया की सरकार बीते कुछ समय में ईसाई संस्थाओं को करोड़ों रुपये दिए हैं। ये पैसे राज्य में बने चर्च की मरम्मत और सुंदरीकरण के नाम पर दिए गए हैं। इसके अलावा बड़ी रकम नए चर्च और क्रिश्चियन कम्युनिटी हॉल बनाने के लिए दी गई है।
अवलोकन करिये:--

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार औरंगजेब, अन्य मुगलों तथा मुस्लिम हमलावरों ने भारत में हिन्दुओं का नरसंहार किया, हिन्दू महिलाओं के साथ बल...
NIGAMRAJENDRA28.BLOGSPOT.COM
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार मोदी सरकार ने 2004 से 2014 के बीच सरकार के फैसलों से जुड़ी पीएमओ की 710 फाइलें सार्वजनिक करने का एलान कि...
NIGAMRAJENDRA28.BLOGSPOT.COM
अब तक सुना जाता था कि तमिलनाडु की राजनीति का संचालन चर्च से होता है, जो जितना अधिक धन देगा, उसी पार्टी की सरकार बनेगी। हालाँकि इस समाचार की अधिकारित स्तर पर पुष्टि नहीं हो पायी कि चर्चों को किस रूप में धन दिया जाता है। यदि यह चर्चा सत्य है, तो देखना है, कि अब केन्द्र में हुआ सत्ता परिवर्तन तमिलनाडु में चर्चों से होती संचालित राजनीति में भी क्या परिवर्तन लाएगी?  
ऐसा करना संविधान की मूल भावना का उल्लंघन है, क्योंकि धर्म-निरपेक्ष देश होने की वजह से कोई सरकार धार्मिक संस्थाओं को पैसा नहीं दे सकती। जाहिर है यह सवाल उठता है कि खुद को धर्म-निरपेक्ष पार्टी बताने वाली कांग्रेस और उसकी अध्यक्ष सोनिया गांधी को क्या कर्नाटक सरकार को रोकना नहीं चाहिए? या फिर कहीं ऐसा तो नहीं कि ईसाई संस्थाओं की जेब भरने का काम आलाकमान के इशारे पर ही हो रहा है? जबकि हिन्दुओं के जितने मुख्य मन्दिर हैं, लगभग सभी पर सरकार ने बोर्ड की स्थापना कर किसी न किसी रूप सरकारी तिजोरी से उनको जोड़ दिया गया, परन्तु सरकार ने आज तक न किसी मस्जिद और चर्च में आने वाले धन का रिकॉर्ड रखने किसी बोर्ड की स्थापना की? जबकि मस्जिदों, दरगाहों और चर्चों में हिन्दू मन्दिरों से अधिक धन आ रहा है। दूसरे मन्दिरों में धन भक्तों द्वारा चढ़ावे का आ रहा है, लेकिन मस्जिद, दरगाह और चर्च में दूसरों साधनों धन आता रहता है। उसका हिसाब कौन लेगा? इस सब के अतिरिक्त क्या मन्दिरों से प्राप्त धन को मदरसों, मस्जिद, दरगाह और चर्चों को दिया जा रहा है? हिन्दू का लुटने के लिए है?

ईसाई धर्म को बढ़ावा देने का एजेंडा

26 मार्च 2016 को आरटीआई के तहत कर्नाटक सरकार से कुल 4 सवाल पूछे गए। ये सवाल सरकारी आदेश नंबर- MWD 318MDS2011 (दिनांक 16/01/2012) के हवाले से राज्य अल्पसंख्यक विभाग की तरफ से चर्च को दिए जा रहे फंड के बारे में थे।

पहला सवाल– चर्च की मरम्मत के लिए सरकार की तरफ से साल दर साल कितना फंड दिया गया?
दूसरा सवाल– उन ईसाई संस्थाओं/चर्च के नाम और पते बताएं जिन्हें मरम्मत के नाम पर सरकार से पैसे मिले हैं?
तीसरा सवाल– नए चर्च बनाने पर साल दर साल राज्य सरकार ने कितने पैसे जारी किए?
चौथा सवाल– उन ईसाई संस्थाओं/चर्च के नाम और पते बताएं जिन्हें नए चर्च बनाने के लिए पैसे दिए गए?

चर्च के लिए खोला सरकारी खजाना

ron_130516_cm4
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया खुद को नास्तिक बताते हैं। लेकिन
ईसाई संस्थाओं पर पैसे लुटाने की उनकी नीति का ही
नतीजा है कि सरकार के 3 साल होने पर 13 मई को
क्रिश्चियन संस्थाओं ने बाकायदा उनका अभिनंदन किया।
2013-14 में कर्नाटक सरकार ने राज्य के 134 गिरिजाघरों को 12.30 करोड़ रुपये दिए। इसके अलावा 6.72 करोड़ रुपये क्रिश्चियन कम्युनिटी सेंटर बनाने के लिए दिए गए। इन कम्युनिटी सेंटरों में ही धर्मांतरण का ज्यादातर काम होता है।2014-15 में यह फंडिंग और बढ़ गई। इस दौरान 125 चर्चों को 16.56 करोड़ रुपये सरकारी खजाने से दिए गए। इसी तरह 55 ईसाई समुदाय भवन बनाने के लिए करीब 15 करोड़ रुपये बांटे गए। 2015-16 में चर्च की मरम्मत पर 15 करोड़ रुपये बांटे गए। इस दौरान कम्युनिटी सेंटर बनाने के खर्च का ब्योरा नहीं दिया गया।

साल दर साल बढ़ा चर्च का फंड

तीन साल के अंदर चर्च को बांटे जा रहे पैसे में भारी बढ़ोतरी देखी जा सकती है। 2013-14 में कुल मिलाकर 19 करोड़ रुपये दिए गए थे, जोकि 2014-15 में बढ़कर 31.55 करोड़ रुपये हो गए। 2015-16 में रकम कुछ कम हुई, लेकिन इस साल भी 23 करोड़ रुपये ईसाई संस्थाओं की जेब में डाल दिए गए।

कांग्रेस सरकार कर रही है ईसाई धर्म का प्रचार!

अमेरिका जैसे दुनिया के बड़े-बड़े ईसाई देशों में भी सरकारें चर्च बनाने या मरम्मत करने के नाम पर एक भी पैसा नहीं देतीं। कई देशों में ऐसा करना गैर-कानूनी है। सेकुलर देश होने के नाते भारत में भी कोई सरकार किसी धर्म के पूजास्थल बनाने या मरम्मत के लिए पैसे नहीं दे सकती। जहां तक कर्नाटक सरकार का सवाल है उसने राज्य कई कई हिंदू मंदिरों की करोड़ों की संपत्ति सील कर रखी है। इन मंदिरों के रख-रखाव पर इसी में से थोड़ी-बहुत रकम खर्च की जाती है। नतीजा राज्य के सैकड़ों साल पुराने मंदिरों की हालत बेहद जर्जर होती जा रही है।

सिद्धरमैया की सांप्रदायिक राजनीति पुरानी है

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ईसाइयों के अलावा मुस्लिम धर्म के प्रचार पर भी खर्च करती रही है। पिछले साल खबर आई थी कि सिद्धरमैया ने ईसाई और मुस्लिम छात्रों को विदेशों में पढ़ने के लिए पैसे देने का एलान किया था। इसके अलावा मुफ्त जमीन, शादी में 50 हजार रुपये के तोहफे जैसी योजनाएं लाई जा चुकी हैं।

Comments

AUTHOR

My photo
shannomagan
To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)

Popular posts from this blog

बिस्तर पर इंदिरा किसी मर्द से कम न थी:--M.O MATHAI

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  जब हम पूर्व प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी की बात करते हैं, तो कई कांग्रेसी कहते हैं कि वह भारत की आयरन लेडी हैं; उसने पाकिस्तान को दो भागों में विभाजित किया और कई और अधिक लेकिन क्या वे उनके अंधेरे रहस्यों के बारे में बात करेंगे? देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के जीवन से जुड़े कुछ रहस्‍यों का खुलासा एक नई किताब में किया गया है। वरिष्‍ठ टीवी पत्रकार सागरिका घोष की लिखी किताब Indira: India’s Most Powerful Prime Minister में इंदिरा और फीरोज गांधी के रिश्‍तों पर नई रोशनी डाली गई है। किताब के अनुसार, ‘फीरोज ने 1955 में जब जीवन बीमा का राष्‍ट्रीयकरण किया, प्रेस का संसदीय कार्यवाही की रिपोर्ट‍िंग की आजादी दिलाई, हालांकि बाद में इस कानून को इंदिरा ने ही इमरजेंसी के दौरान कुचल दिया। सागरिका की किताब के अनुसार, दिल्‍ली में फीरोज को नेहरू की मौजूदगी से घुटन होती थी और तीन मूर्ति भवन में रहना उनके लिए असहनीय हो गया था। फीरोज की आशिक-मिजाजी के किस्‍से दिल्‍ली के गलियारों में सुनाई देने लगे थे। वह अक्‍सर तारकेश्‍वरी सिन्‍हा, महमूना सुल्‍तान और सुभद...

कायस्थ कौन हैं ?

सर्वप्रथम तो ये जान लें आप सब कि ना तो मै जातिवादी हुँ और ना ही मुझे जातिवादी बनने का शौक है और ना ही कायस्थ समाज को जागृत करने मे मेरा कोई स्वार्थ छिपा है। मै कल भी एक कट्टर सनातनी था आज भी एक कट्टर सनातनी हुँ और विश्वास दिलाता हुँ सनातन धर्म के प्रति मेरी ये कट्टरता भविष्य मे भी बनी रहेगी। इन शब्दों के बावजूद भी हमे कोई जातिवादी कहे तो मै बस इतना ही कहुँगा कि कुत्तो के भौकने से हाथी रास्ता नही बदला करते। मै ‘कायस्थ समाज’ से संबंध रखता हूँ । जो मेरे मित्र इस से सर्वथा अपरिचित हैं, उनकी जानकारी के लिए बता दुँ कि उत्तर भारत के बहुलांश क्षेत्रों मे कायस्थों की जबर उपस्थिति मौजूद है, हालांकि यह समाज देश के अन्य हिस्सों मे भी विद्यमान है । इनकी जनसंख्या काफी सीमित है परंतु इस वर्ग से संबन्धित सम्मानित महापुरुषों , विद्वानो, राजनेताओ , समाज सेवियों की एक लंबी फेहरिस्त मिलेगी जिन्होंने अपनी विद्वता, कर्मठता और प्रतिभा का लोहा पूरे विश्व मे मनवाया है । सम्राट अकबर के नवरत्न बीरबल से लेकर आधुनिक समय मे स्वामी विवेकानंद , राजा राम मोहन रॉय , महर्षि अरविंद ,श्रीमंत शंकर देव ,महर्षि महेश...

नेहरु थे भारत में पहली बूथ केप्चरिंग का मास्टर माइंड

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  जवाहर लाल नेहरू देश में हुए प्रथम आम चुनाव में उत्तर प्रदेश की रामपुर सीट से पराजित घोषित हो चुके कांग्रेसी प्रत्याशी मौलाना अबुल कलाम आजाद को किसी भी कीमत पर जबरजस्ती जिताने के आदेश दिये थे | उनके आदेश पर उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री पं गोविन्द वल्लभ पन्त ने रामपुर के जिलाधिकारी पर घोषित हो चुके परिणाम बदलने का दबाव डाला और इस दबाव के कारण प्रशासन ने जीते हुए हिन्दू महासभा के प्रत्याशी विशन चन्द्र सेठ की मतपेटी के वोट मौलाना अबुल के पेटी के डलवाकर दुबारा मतगणना करवाकर मौलाना अबुल को जीता दिया।  ये रहस्योदघाटन उत्तर प्रदेश के तत्कालीन सुचना निदेशक शम्भुनाथ टंडन ने अपने एक लेख मे किया है।  उन्होंने अपने लेख "जब विशन सेठ ने मौलाना आजाद को धुल चटाई थी भारतीय इतिहास की एक अनजान घटना " में लिखा है की भारत मे नेहरु ही बूथ कैप्चरिंग के पहले मास्टर माइंड थे। उस ज़माने में भी बूथ पर कब्जा करके परिणाम बदल दिये जाते थे और देश के प्रथम आम चुनाव मे सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही कांग्रेस के 12 हारे हुए प्रत्याशियों को जिताया गया। ...