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हम भ्रष्टन के, भ्रष्ट हमारे


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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
नीरव को लोन दिया 2008 में घोटाला हुआ, 2011 में रघूराम राजन RBI प्रमुख थे, वित्त मंत्री चिदंबरम और प्रणब मुखर्जी थे,
प्रधानमंत्री  मनमोहन सिंह। और बैंक की Audit हर साल होनी चाहिए थी.!!
अब सोचों :
2008  - कोई समस्या नही
2009  - कोई समस्या नही
Image result for 2 जी घोटाला मामले के फैसले2010  - कोई NPA की चेतावनी नही
2011  - घोटाला - कोई चेतावनी नही
2012  - कोई ख़बर नही बनी
2013  - कोई ख़बर नही बनी
2014  - कोई ख़बर नही बनी - RBI गवर्नर बदल दिए गए
2016  - नोटबंदी
2017  - RBI और बाक़ी बैंक स्पष्ट तस्वीर देने को मजबूर अब सब कुछ सामने आ गया।
अपराधी कौन..? एक लाख 76 हजार करोड़ रुपए का यह टू जी स्पैक्ट्रम घोटाला हुआ तो कांग्रेस की सरकार में और इसके अपराधी बरी किए गए हैं भाजपा सरकार के शासन में। यही वह घोटाला था, जिस पर सवार होकर भाजपा सरकार सत्ता में आई थी और नरेंद्र मोदी पूरे देश में छाती ठोककर दहाड़ते फिरे कि मेरे कार्यकाल में कोई घोटाला हुआ तो बताओ।
लेकिन यह क्या छोटी बात है कि आप जिसे एक लाख 76 हजार करोड़ रुपए का घोटाला बता रहे थे, उसका हर जिम्मेदार व्यक्ति आज आपके शासन में बरी हो गया है। आपकी सरकार ने अदालत में इतनी लचर पैरवी क्यों की कि घोटालेबाज छूट गए? क्या आप इसका जवाब देश की जनता को नहीं देंगे?
इस देश में अगर अदालतें और सीबीआई है तो वह कमज़ोर लोगों के लिए है। धनबल, व्यापार बल, सरकार बल, विपक्ष बल, राजनीतिक बल या चालू पुर्जा बल या दलाल बल वाले लोगों को क्या कोई इस देश में सज़ा दे सकता है? अगर कांग्रेस सरकार में बोफोर्स घोटाले के लोगों को बाकी सभी दल बचा सकते हैं तो गुजरात दंगों और दिल्ली दंगों के दोषियों को कोई कैसे जेल भेज देगा?
दरअसल भारत के महालेखाकार और नियंत्रक (कैग) ने अपनी एक रिपोर्ट में साल 2008 में किए गए स्पेक्ट्रम आवंटन पर जो सवाल खड़े किए गए थे, वे आज भी जवाब मांग रहे हैं। इस देश का बच्चा-बच्चा जानता है कि स्पेक्ट्रम घोटाले के इन्हीं सवालों पर सवार होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार असाधारण बहुमत से सत्ता में आई थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 17 आरोपियों में 14 व्यक्ति और तीन कंपनियां (रिलायंस टेलिकॉम, स्वान टेलिकॉम, यूनिटेक) शामिल थीं।
                                                                                              साभार 
उस समय सरकार इस घोटाले में घिरी तो उसने सफाई दी कि उन्होंने कंपनियों को नीलामी के बजाय “पहले आओ और पहले पाओ” की नीति पर लाइसेंस दिए गए थे, जिसमें भारत के महालेखाकार और नियंत्रक के अनुसार सरकारी खजाने को अनुमानित एक लाख 76 हजार करोड़ रुपयों का नुक़सान हुआ था।
यह मामला सीबीआई में गया तो इस घोटाले के एक लाख 46 हजार करोड़ रुपए उड़ा दिए गए और लिहाजा सीबीआई ने 30 हज़ार करोड़ के नुकसान की बात कही। यह मामला जिस राजनीतिक धरातल पर उठा तो साफ़ माना गया कि लाइसेंस नीलामी के आधार पर दिए जाते तो ख़जाने को कम से कम एक लाख 76 हज़ार करोड़ रुपए और हासिल हो सकते थे।
और अगर टू जी स्पैक्ट्रम में रिलायंस टेलीकॉम, स्वैन टेलीकॉम, यूनिटेक वायरलैस, लूप टेलिकॉम, लूप माेबाइल, एस्सार टेलीकॉम, एस्सार ग्रुप जैसी ताक़तवर कंपनियां हों आैर सिद्धार्थ बेहुड़ा तथा आरके चंदेलिया जैसे ब्यूरोक्रैट और संजय चंद्रा, उमाशंकर, गौतम दोषी, हरि नायर, सुरेंद्र पिपाड़ा, विनोद गोयनका, शाहिद बलवा, आसिफ बलवा, राजीव अग्रवाल, शरतकुमार, रवि रुइया, अंशुमान रुइया, विकास सराफ, करीम मोरानी आदि जैसे लोग हों तो किसका बाल बांका हो सकता है?
क्या यह बात सब लोग साल 2010 में ही लोग नहीं जानते थे, जब दूरसंचार मंत्री ए. राजा और कनिमोझी समेत सभी 17 लोगों को 2 जी घोटाले में आरोपी बनाया गया था। अाज अगर दिल्ली की अदालत ने इन्हें बरी कर दिया तो इससे भारतीय न्यायपालिका की छवि ख़राब नहीं हुई, बल्कि हमारी जांच एजेंसियों, हमारी सरकारों, हमारे लोकतंत्र के पहरुओं का अपराधियों ओर भ्रष्टाचारियों से प्रेम ही पुन: प्रकट हुआ है।
कुछ लोग इतने चालाक होते हैं कि वे रात के अंधेरे में अपराध करते हैं तो वे अंधेरे की तरफ लगी निगाहों पर अधिक रौशनी फेंककर अपने अपराध को सरअंजाम देते हैं।
झीने अंधेरे में अपराध करने वाले चालाक कुटिल लोग जानते हैं कि अपराध को छुपाने से बेहतर है कि देखने वाले की आंख की पुतलियों पर तेज रौशनी की धार फेंक दो।
2 जी मामले में अदालत ने जिन आरोपियों को बरी किया है
उनमें डीएमके पार्टी के तत्कालीन मंत्री ए राजा और तमिलनाडु के भूतपूर्व मुख्यमंत्री करूणानिधि की बेटी कनिमोझी मुख्य हैं
इसके अलावा बचने वालों में पूंजीपति अनिल अम्बानी, रूईया वगैरह भी शामिल हैं
ये लोग जो बरी हुए हैं वे मोदी सरकार की मदद से बरी हुए हैं
मोदी सरकार को इन लोगों को सज़ा दिलाने में कोई भी फायदा नहीं था
बल्कि मोदी सरकार को इन लोगों के जेल जाने से बड़ा नुकसान हो सकता था
इन्हीं पूंजीपतियों के पैसे से चुनाव जीता जाता है और सत्ता मिलती है
इसलिए भाजपा द्वारा पूंजीपतियों को तो बचाना ही था क्योंकि वह तो सरकार के माई बाप हैं
दूसरी तरफ इस मामले का जितना भी फायदा भाजपा उठा सकती थी
वह भाजपा पहले ही शोर मचा कर सत्ता पाकर उठा चुकी थी
अब अगर डीएमके पार्टी ये दो नेता जेल चले भी जाते तो भाजपा को उससे कोई भी फायदा अब मिलने वाला नहीं था
इसलिए सीबीआई जो प्रधानमंत्री के मातहत काम करती है
उसने इस केस में आरोपियों के खिलाफ अदालत को सबूत देने बंद कर दिए
इस तरह अदालत को मजबूरन आरोपियों को बरी करना पड़ा
अदालत ने सीबीआई को इस बात के लिए डांट भी लगाई है
साफ़ तौर पर मोदी सरकार ने इन सभी को जान बूझ कर बचाया है
अब आप ध्यान से देखते रहिएगा कि तामिलनाडू में अगले विधान सभा चुनाव भाजपा डीएमके पार्टी के साथ मिल कर लडेगी
इसी डील के साथ मोदी सरकार ने डीएमके के दोनों नेताओं को इस मामले में बचाया है
हम सब जानते हैं कि तामिलनाडू में बारी बारी डीएमके और एआइडीएमके की सरकार बनती है
अभी वहाँ एआइडीएमके की सरकार है
यानी अबकी बार सरकार बनाने की बारी डीएमके की है
इसलिए मोदी सरकार ने डीएमके के साथ यह डील करी है
भाजपा दक्षिण भारत में हमेशा कमजोर ही रही है
दक्षिण भारत में अपनी सरकार बनाने के लिए भाजपा केरल में बम बनाना और विरोधी कार्यकर्ताओं की हत्या करने में लगी रहती है
लेकिन भाजपा की दाल दक्षिण भारत में कभी नहीं गली
डीएमके पार्टी के साथ इस डील के बाद भाजपा की डीएमके के साथ सरकार में शामिल होने की संभावना बन गई है
जो लोग यह समझ रहे हैं कि भाजपा भ्रष्टाचार दूर करेगी
उन्हें बड़ी निराशा होगी क्योंकि भाजपा की लड़ाई सिर्फ सत्ता के लिए है
भाजपा भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने लगी तो उसे कभी सत्ता नहीं मिलेगी

भारत में भ्रष्टाचार बढ़ा, करप्शन इंडेक्स में देश 81वें स्थान पर

नीरव मोदी, मेहुल चोकसी या रोटोमैक जैसों की बात छोड़ दी जाये तो भी हमारे देश में भ्रष्टाचार बढ़ता ही नजर आ रहा है. इन घोटालों के उजागर होने के पहले ही वर्ष 2017 में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने रिपोर्ट जारी की जिसमें दुनियाभर के देशों का करप्शन इंडेक्स जारी किया गया है. पिछले वर्ष की तुलना में भ्रष्टाचार में भारत दो पायदान फिसलकर 183 देशों में 81वें स्थान पर जा पहुंचा है. 2016 में भारत 79वें नंबर पर था. रैंकिंग के लिए ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने 0 (सबसे ज्यादा भ्रष्ट) से 100 अंक (भ्रष्टाचार मुक्त) के पैमाने पर 183 देशों में सरकारी संगठनों और कंपनियों में भ्रष्टाचार का आकलन कर इसे जारी किया है.
ऐसे की जाती है रैंकिंग
भारत को इस बार भी 2016 के बराबर 40 अंक मिले हैं. जिस देश का जितना ज्यादा स्कोर होता है वह उतना कम भ्रष्ट माना जाता है. बर्लिन स्थित यह भ्रष्टाचार निरोधी संगठन विश्व बैंक, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम और अन्य संगठनों के आंकड़ों के आधार पर दुनिया भर के सरकारी प्रतिष्ठानों में भ्रष्टाचार का आकलन करता है.
न्यूजीलैंड कम भ्रष्टसोमालिया सबसे अधिक
सबसे कम भ्रष्ट 5 देशों में न्यूजीलैंड को 89, डेनमार्क को 88, फिनलैंड को 85, नॉर्वे को 85 और स्विट्जरलैंड को 85 अंक मिले हैं. सबसे अधिक भ्रष्ट 5 देशों में 183वें नंबर पर सोमालिया को 9, 182 वें नंबर पर द. सूडान को 12, 181वें नंबर पर सीरिया को 14, 180 वें नंबर पर अफगानिस्तान को 15 और 179 वें नंबर पर यमन को 16 अंक मिले हैं.
प्रेस की स्वतंत्रता के मामले में भारत कमजोर देशों में
ट्रांसपेरेंसी ने भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भ्रष्टाचार और प्रेस की स्वतंत्रता के लिहाज से सबसे कमजोर देशों में शामिल किया है. संगठन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि फिलीपींस, भारत और मालदीव जैसे देशों में न केवल भ्रष्टाचार, बल्कि पत्रकारों की हत्या के मामले भी ज्यादा हैं. रिपोर्ट के मुताबिक बीते छह साल में 10 पत्रकारों में से नौ उन देशों में मारे गए हैं, जिन्हें करप्शन इंडेक्स में 45 या इससे कम अंक मिले हैं. ऐसे देशों की संख्या दो तिहाई से ज्यादा है.
भारत और पड़ोसी देशों की स्थिति
भ्रष्टाचार के मामले में भारत और उसके पड़ोसी देशों की बात करें, तो सिर्फ चीन ही उससे कम भ्रष्ट है. हालांकि, उसका स्कोर भारत की तुलना में सिर्फ एक अंक ज्यादा है, लेकिन वह रैंकिंग में हमसे 4 स्थान ऊपर है. पाकिस्तान एशिया प्रशांत के शीर्ष 10 देशों में नौवें नंबर पर है. भूटान का 67वां, चीन का 77वां, श्रीलंका का 91वां, पाकिस्तान का 117वां, नेपाल का 122वां और बांग्लादेश का 143वां रैंक है.

देश में असमानता का आलम :

101 अरबपतियों की संपत्ति जीडीपी के 15 % के समान

भारत में असमानता तीन दशक से लगातार बढ़ रही है. पिछले साल 101 अरबपतियों की संपत्ति जीडीपी के 15% तक पहुंच गयी. 5 साल पहले उनके पास जीडीपी के 10% के बराबर संपत्ति थी. ऑक्सफैम इंडिया की रिपोर्ट में यह बात कही है. अमीरों की अमीरी और गरीबों की गरीबी बढ़ने के लिए इसने सरकारी नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है. भारत की जीडीपी 2.6 लाख करोड़ डॉलर यानी करीब 168 लाख करोड़ रुपए है. 2017 में यहां अरबपतियों की संख्या (6,500 करोड़ से ज्यादा नेटवर्थ वाले) 101 थी.
इंडिया इनइक्वलिटी रिपोर्ट 2018 के अनुसार भारत दुनिया के सबसे असमान देशों में है. यहां असमानता का पैमाना कमाई, खर्च और संपत्ति है. रिपोर्ट के लेखक प्रो. हिमांशु के अनुसार इसे रोकने के लिए ज्यादा कमाई वालों पर ज्यादा टैक्स लगाया जाना चाहिए. संपत्ति कर दोबारा लागू हो और विरासत में मिली संपत्ति पर टैक्स लगे. पिछले महीने दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक से पहले ऑक्सफैम ने एक रिपोर्ट जारी की थी. इसमें कहा गया था कि 2017 में भारत में जो संपत्ति पैदा हुई उसका 73% हिस्सा 1% बड़े अमीरों को मिला. जिन मुट्‌ठी भर लोगों के हाथों में संपत्ति है, उनकी अमीरी में भी तेजी से इजाफा हो रहा है. बता दें कि 2005 में देश के अरबपतियों की संपत्ति जीडीपी के 5% के बराबर थी. 2008 में यह बढ़कर 22% पर पहुंच गई. उसी साल ग्लोबल इकोनॉमी आर्थिक संकट की चपेट में आ गई. इससे 2012 में संपत्ति में गिरावट आई और अरबपतियों की संपत्ति जीडीपी की तुलना में 10% रह गई.
इंडिया इनइक्वलिटी रिपोर्ट 2018 जारी
ऑक्सफैम इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार 5 साल पहले इनकी नेटवर्थ जीडीपी के 10% के बराबर थी. 2015 से दुनिया के सबसे अमीर 1% लोगों के पास बाकी लोगों की तुलना में ज्यादा संपत्ति है. सिर्फ 8 लोगों की संपत्ति सबसे गरीब आधे लोगों के बराबर है. 20 वर्षों में 500 लोग अपने वारिसों को 136 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति विरासत में देंगे. यह रकम भारत की मौजूदा जीडीपी से थोड़ा ही कम है. 1988 से 2011 के दौरान सबसे गरीब 10% लोगों की संपत्ति 200 रुपए से भी कम बढ़ी, जबकि शीर्ष 1% की कमाई में 182 गुना इजाफा हुआ. दुनिया में सिर्फ 8 लोगों के पास आधे गरीबों के बराबर संपत्ति है.
एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम दबाए बैठे हैं देश के विलफुल डिफॉल्टर्सएक लाख करोड़ से ज्यादा की रकम दबाये बैठे हैं विलफुल डिफॉल्टेर 
30 सितंबर 2017 तक के आंकड़ों के हिसाब से 1.1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बैंकों की राशि विलफुल डिफॉल्टर्स के पास है। टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक 9000 ऐसे खाते हैं जिनके लिए बैंक में रिकवरी के लिए लॉ सूट फाइल किया गया है। इसमें से टॉप 11 उधारकर्ताओं के पास 1000 करोड़ रुपये (प्रत्येक) का बकाया है। यह कुल मिलाकर 26000 करोड़ रुपये की राशि बनती है।
डेटा के अनुसार जतिन मेहता की कंपनी विनसम डायमंड एंड ज्वैलरी लिमिटेड और फॉरेवर प्रीशियस एंड डायमंड लिमिटेड के पास करीब बैंकों की 5500 करोड़ रुपये की राशि बकाया है। मेहता की कंपनियों के बाद विजय माल्या की किंगफिशऱ एयरलाइंस का नंबर आता है जिसके पास 3000 करोड़ रुपये की बकाया राशि है। इस सूची में तीसरे नंबर पर कोलकता की कंपनी REI Agro है। इस कंपनी के मालिक संदीप झुनझुनवाला हैं जो खबरों के अनुसार लंदन और सिंगापुर स्टॉक एक्सचेंज में भी लिस्ट की जा चुकी है। साथ ही यह आईपीएल टीम के को स्पॉन्सर भी रह चुके हैं। इस कंपनी के पास 2730 करोड़ रुपये की बकाया राशि है। अगले स्थान पर प्रबोध कुमार तिवारी और उनके परिवार की कंपनियां हैं। माहुआ मीडिया, पर्ल स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड, सेंचुरी कम्युनिकेशन्स और पिक्सिन मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के पास बैंक की 2416 करोड़ रुपये की बकाया राशि है।
इस सूची में बैंक के अनुसार जो अन्य कंपनियां हैं जिनपर 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि बकाया है और वे समर्थ होने के बावजूद इसे चुका नहीं रहे हैं वे विजय चौधरी की जूम डेवेलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, नितिन कास्लीवाल की रीड एंड टेलर (इंडिया) और एस कुमार्स नेशनवाइड लिमिटेड और मीडिया के दिग्गज टी वेंकेटरमन की डेक्कन क्रॉनिकल होल्डिंग लिमिटेड शामिल है।
डेटा इस बात का संकेत देता है कि देश में बैड लोन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बीते एक वर्ष में इन मामलों में 27 फीसद तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बीते तीन वर्षों में इसमें क्रमश: 38 फीसद, 67 फीसद और 35 फीसद की तेजी दर्ज की गई है। वहीं, सितंबर 2013 और सितंबर 2017 के बीच यह आंकड़ा चार गुना बढ़ गया है। यह 28417 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.1 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
बैंकों के आधार पर अगर इस डेटा का अध्ययन किया जाए तो राष्ट्रीय बैंक इस पूरी राशि में 60 फीसद की हिस्सेदारी रखते हैं। एसबीआई और उसके सहयोगी बैंकों की इस पूरी राशि में एक चौथाई की हिस्सेदारी है। वहीं, निजी बैंकों ने भी 14000 करोड़ रुपये की विल्फुल डिफॉल्डट की घोषणा की है।

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बिना पैंट्री की गाड़ी 
रेलवे में भ्रष्टाचार 
अभी कुछ दिन पूर्व ट्रेन नंबर 12171 में सफर करने का अवसर मिला। गाड़ी में पैंट्री न होने के कारण बाहरी चाय वाले चाय बेच रहे थे, खाना परोसने वाले बाहरी। पैंट्री की ड्रेस न होने और छोटे थर्माकोल के ग्लास होने पर जब चाय वाले से पूछा कि "गाड़ी के कम स्टेशन होने पर तुम कहाँ तक जाओगे, और छोटे से ग्लास में 10 रूपए की चाय बेच रहे हो, आखिर बिना टिकट कैसे चढ़ते हो?" चाय वाले का जवाब सुन बोगी में बैठे समस्त यात्री स्तब्ध रह गए। उसका जवाब था, "बाबूजी ठेकेदार हर महीने 1 लाख रूपए देता है। अब अगर छोटे कप में 10 रूपए की चाय नहीं बेचेंगे, तो ठेकेदार को कमाई कहाँ से होगी?" लगभग यही जवाब खाना परोसने वाले का था। यानि लोकमान्य तिलक(ट) मुंबई से हरिद्वार तक कितने करोड़ो का धन्धा फलफूल रहा है और भ्रष्टाचार दूर करने वाले गहरी नींद में सो रहे हैं ?
अब प्रश्न उत्पन्न होता है कि क्या अब तक किसी सरकार या रेलवे मंत्री को नहीं मालूम की लम्बे सफर की गाड़ी, जिसके स्टेशन भी कम हैं, आखिर यात्री चाय, पानी एवं भोजन कहाँ से और कैसे करेगा या करता होगा? रेल किराये में सुविधाओं के नाम पर वृद्धि की जाती है, लेकिन रेलवे में व्याप्त भ्रष्टाचार पर किसी रेलवे मंत्री ने ध्यान क्यों नहीं दिया? क्या रेलवे मंत्री इस भ्रष्टाचार से अज्ञान हैं? और अगर अज्ञान हैं, तो दिमाग नहीं।दिमाग इसलिए नहीं कि किसी रेल मंत्री ने आज तक रेलवे से यह नहीं पूछा कि "इतने लम्बे सफर की गाड़ी में पैंट्री क्यों नहीं?" ऐसी पता नहीं और कितनी गाड़ियाँ होंगी,  बिना पैंट्री के भ्रष्टाचार  सहारे चल रही होंगी?आखिर वर्तमान सरकार भी अपना कार्यकाल पूरा करने के अन्तिम पड़ाव है, वह सरकार जिसके नेता भ्रष्टाचार दूर करने  का दावा करते फिरते थे। उसी सरकार के राज में भ्रष्टाचार। और सरकार इस ओर ऑंखें मूंदे हुए है, क्यों ?
मोदी सरकार और पिछली सरकारों में क्या है, फर्क? क्या रेलमंत्री रेलवे अधिकारियों से पूछने का साहस करेंगे कि लम्बी दुरी की कितनी गाड़ियों में पैंट्री नहीं है और क्यों?
रेलवे ने चुपचाप 2 चार्ज बढ़ा दिए हैं। 
रेलवे ने चुपचाप 2 चार्ज बढ़ा दिए हैं। अगर आप रेलवे में बीमार होते हैं और डॉक्टर को दिखाते हैं तो अब आपको पहले के मुकाबले 5 गुना ज्यादा चार्ज देना होगा। इसके अलावा रेलवे के रिटायरिंग रूम को बुक कर कैंसिल किया तो आपको अब दोगुना कैंसिलेशन चार्ज देना होगा। इसलिए अगर आप ट्रेन से यात्रा करते हैं तो इन चार्ज के बारे जान लें।
अगर आप ट्रेन में बीमार होते हैं और डॉक्टर की मदद लेते हैं तो आपको 100 रुपए चुकाने होंगे। पहले ये फीस सिर्फ 20 रुपए थी। रेलवे बोर्ड ने इस बारे में फैसला किया है। हालांकि रेलवे ने कहा है कि रेल दुर्घटना की स्थिति में अगर यात्री को डॉक्टर की सहायता दी जाती है तो उसके लिए कोई चार्ज नहीं देना होगा।अगर कोई यात्री ट्रेन में बीमार होता है और रेलवे के डॉक्टर से इलाज करवाता है तो उसे 100 रुपए देने होंगे। कई बार रेलवे 20 रुपए की फीस नहीं लेता था। ये चार्ज काफी पहले तय किया गया था। इस फैसले का असर जनरल क्लास में यात्रा करने वाले मरीजों पर ज्यादा होगा।
आप ट्रेन से यात्रा कर रेलवे के रिटायरिंग रूम या डॉरमेट्री की सेवा का उपयोग करते हैं तो अब आपको ज्यादा चार्ज देना होगा। भारतीय रेलवे ने रिटायरिंग रूम और डॉरमेट्री की बुकिंग कैंसिलेशन के चार्ज बढ़ा दिए हैं। ये बुकिंग IRCTC की वेबसाइट के जरिए होती है। अगर अब आप बुकिंग के 2 दिन पहले की तारीख पर रिटायरिंग रूम कैंसिल करते हैं तो आपको बुकिंग की 20 फीसदी रकम कैंसिलेशन चार्ज के तौर पर देनी होगी। पहले ये चार्ज 10 फीसदी था। अगर आप 1 दिन पहले बुकिंग कैंसिल करते हैं तो आपकी 50 फीसदी रकम चार्ज के तौर पर कट जाएगी। आपने जिस दिन की बुकिंग की है अगर उस दिन आपने इसको कैंसिल किया तो आपका पूरा पैसा काट लिया जाएगा।

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